हमारे गांव में हरिजन सम्मेलन
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बहुत पहले हमारे गाँव लोइंग में हरिजन सम्मेलन हुआ था सम्मेलन में हरिजन लोग भी भोजन बनाने में सहभीगी हुए थे । पूरे गाँव के लोगों बीच बस्ती में एक पंगत में भोजन किये । यह सब हमारे परिवार के आदरणीय श्री पूर्ण चंद्र गुप्ता जी के प्रयास से सफल रहा । कई साल तक दूसरे गांव के लोग हमें अछूत मानते थे । बाद में वे कथित महान जातिवाती लोग सब भूल गए ।
हम 1967-1975 के बीच मेरे मित्र चाचा स्व श्री सुभाष चंद्र गुप्ता जी के साथ हमारे गांव के एक हरिजन मित्र पैनका के घर में चाय पानी पीते थे ।
आज कल लोग घर के बाहर भोजन करते हैं । कोई नहीं जानता बनाने वाले या परोसने वाले किस जाति के हैं । याने तथाकथित उच्च जाति के लोग कथित शुद्र जाति के लोगों के द्वारा बनाया गया भोजन प्रेम से खाते हैं । इसी तरह रक्त शुद्धता की बात करने वाले जरूरत पड़ने पर शुद्रों का खून अपने शरीर में चढ़ाते हैं ।
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 18 जुलाई 2019
हमारे गाँव लोइंग में हरिजन सम्मेलन
बुधवार, 17 जुलाई 2019
जातीय समाज और खाप खत्म हो जाएंगे
जाति को समाज कहना आज उचित नहीं है, यह संकुचित दायरा है ।आज पूरा विश्व एक समान माना जाता है क्यों कि सबका प्रभाव सब पर पड़ता है । ।
जातीय दम्भ को बकरार रखने के लिए जाति समाज, खाप पंचायत चलाई जा रही है ।इनका भविष्य में खत्म हो जाएगा ।जय जगत ।
सम्पूर्ण विश्व एक समाज
समाज का अर्थ जाति समाज कहना ठीक नहीं है । पहले समाज याने एक समुदाय को कहा जाता था जो परस्पर आर्थिक ब्यावसायिक, सामाजिक सम्बन्धों के साथ मिलकर रहते थे, सुख दुख के भागिदार होते थे । अब समाज का मतलब जाति से नहीं, पूरा देश, पूरा विश्व हो गया है । क्यों कि पूरे विश्व के लोग परस्पर सम्बन्धित होते हैं । एक देश के लोगों की तकलीफ़ से दूसरे देश के लोगों को भी दुख होता है । एक देश का प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ता है । इसिलिये विनोबा जी जय भारत नहीं, जय जगत कहते थे ।
सामाजिक बहिष्कार
चोर, घूसखोर, अपराधी, सरकारी पैसा खाने वाले, सरकारी नौकरी करने वाले समय खाने वाले, झूठ बोलने वाले, रिश्तेदारों का पैसा जमीन हड़पने वालों, . ...का बहिष्कार करना चाहिए ।
सोमवार, 15 जुलाई 2019
हिंदू संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश
हिंदू एक संस्कृति है । भारतीय संस्कृति । कुछ लोग कोशिश कर रहे हैं इस तहजीब को नष्ट करने की ।
रविवार, 14 जुलाई 2019
unfriend या block कर देना चाहिए
सोशल मीडिया में ऐसे लोगों को unfriend या block कर देना चाहिए ।
*जो किसी विचार, जानकारी से सहमत नहीं होने से उसका विरोध करना तो चाहते हैं लेकिन उनके पास कोई तर्क आधार नहीं होता ऐसे लोग कुतर्क या गाली गलौच करते हैं ।
*जो किसी पोस्ट से सम्बधित जबाब न देकर बेकार की बात लिखते हैं ।
शनिवार, 13 जुलाई 2019
स्वमूत्र चिकित्सा
हमारे भारत में विभिन्न चिकित्सा पद्धतियाँ प्रचलित हैं लेकिन सभी कारगर नहीं।
मोरार जी देसाई भी रोज सुबह अपना मूत्र पीते थे । वे प्रधान मंत्री बने तब यह सार्वजनिक हुआ । उसी दौरान स्वमूत्र चिकित्सा पर कुछ पुस्तकें भी प्रकाशित हुई जिसमें अपने मूत्र से सभी रोगों का इलाज बताया गया था ।
पता नहीं आजकल वे पुस्तकें दुकानों में है या नहीं ।
मुर्खों की मुर्खता
किसी विचार, जानकारी से सहमत नहीं होने से कुछ मुर्ख उसका विरोध करना तो चाहते हैं लेकिन उनके पास कोई तर्क आधार नहीं होता ऐसे लोग कुतर्क या गाली गलौच करते हैं , दूसरों को मुर्ख कहते हैं ।
मुर्खों की मुर्खता
किसी विचार, जानकारी से सहमत नहीं होने से कुछ मुर्ख उसका विरोध करना तो चाहते हैं लेकिन उनके पास कोई तर्क आधार नहीं होता ऐसे लोग कुतर्क या गाली गलौच करते हैं , दूसरों को मुर्ख कहते हैं ।
कट्टर लोगों से दूर रहना चाहिए
जो किसी धर्म या राजनैतिक पार्टी के कट्टर समर्थक हों उनसे दूर ही रहना चाहिए । block कर देना चाहिए । खासकर जो किसी विचार या जानकारी का तर्क आधार युक्त विरोध नहीं कर सकते, कुतर्क या गाली गलौज करते हैं ।
RSS का गणवेश
लगभग 90 साल तक RSS का गणवेश था ढीला ढाला half pent और टोपी यह समझ में नहीं आता भारतीय संस्कृति के ठेकेदार क्यों पसंद किये?
बहुत आलोचना होने से अब full pent में आ गये। कोई जानकार बताएंगे क्यों ऐसा किया गया? धोती कुरता कोई असुविधाजनक नहीं था लाठी चालन और meeting के लिए ।
RSS द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों में आचार्य और आचार्या शुरू से ही धोती कुर्ता , साड़ी पहनते हैं ।
शुक्रवार, 12 जुलाई 2019
भारत भारत है । हिंदू राष्ट्र का क्या मतलब ?
सामान्यतः लोग हिंदू एक को एक धर्म ही मानते हैं जिसमें भगवान हैं श्री राम, श्री कृष्ण. श्री विष्णु....
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार हिंदू कोई धर्म नहीं, एक संस्कृति है ।
याने भारत की संस्कृति । भारत की तहजीब ।
तो हिंदू हिंदू क्यों कह रहे हैं भारतीय कहें ।
हिंदू राष्ट्रवाद का क्या मतलब? भारतीय राष्ट्रवाद कहें । भारत भारत है फ़िर
हिंदू राष्ट्र की बात क्यों जब सारे भारतीय हिंदू हैं ।
भ्रष्टाचार का विकास
भ्रष्ट अपराधी बहुत आस्तिक होते हैं ।आम लोगों की अपेक्षा ज्यादा पूजा पाठ करते हैं ।खूब तीर्थ यात्रा करते हैं । शायद वे अपने गुनाहों से बचने के लिए ऐसा करते हैं । उन्हें लगता है ऐसा करने से भगवान उन्हें माफ़ कर देंगे । इसिलिये हमारे देश में भ्रष्टाचार जोरदार विकास कर रहा है ।
भ्रष्टाचार का विकास
भ्रष्ट अपराधी बहुत आस्तिक होते हैं ।आम लोगों की अपेक्षा ज्यादा पूजा पाठ करते हैं ।खूब तीर्थ यात्रा करते हैं । शायद वे अपने गुनाहों से बचने के लिए ऐसा करते हैं । उन्हें लगता है ऐसा करने से भगवान उन्हें माफ़ कर देंगे । इसिलिये हमारे देश में भ्रष्टाचार जोरदार विकास कर रहा है ।
बुधवार, 10 जुलाई 2019
पेट्रोल का क्या करें
सोशल मीडिया में यह उपदेश दे रहे हैं लोग --
सच्चे हिंदुओं जितना अधिक हो सके, कोशिश करो कि इन मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार करो..आर्थिक चोट, शारीरिक चोट से बढ़कर होती है।
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ये तो बतादो पेट्रोल का क्या करें?
मतभेद और मनभेद
अटल बिहारी बाजपेयी जी की एक बात मैं याद रखता हूँ..
मत भेद को मन भेद नहीं बनाना चाहिए ।
रक्ष संस्कृति अर्थात राक्षस
आचार्य चतुरसेन के वयम् रक्षामः में कहा है यः रक्षति सः राक्षसः। राक्षस अर्थात रक्ष संस्कृति, रक्षा करने की संस्कृति ।
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ये राक्षस भारत के मूल निवासी ST, और OBC ।
बड़े दिमाग वाले आर्य भारत में आकर राक्षसों के ऊपर हो गये ।
मंगलवार, 9 जुलाई 2019
हिंदी में मात्रा, वर्ण
हिंदी को कुछ अनावश्यक मात्रा वर्णों से मुक्त कर देना चाहिए ।
ँ , ,
ऋ, ष, ञ, ङ, त्र , ,
रविवार, 7 जुलाई 2019
कुछ ने तोड़ा सबने नहीं
बौद्ध विहारों को कुछ हिन्दुओं ने तोड़ा, सभी हिंदुओं ने नहीं ।
सभी मुसलमानों ने जजिया कर नहीं लगाया, मंदिर नहीं तोड़ा ।
मंगलवार, 2 जुलाई 2019
आम सभा
किसी भी संस्था में किसी विशेष उद्देश्य (चुनाव, बजट प्रस्ताव...) को लेकर आहूत आम सभा के अलावा साल में कम से कम एक बार संस्था के हित में बृहद चर्चा के लिये आहूत करना चाहिए जिसमें संस्था के विकास के लिए सदस्यों के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर उचित निर्णय लिया जा सके । ऐसे आम सभा एक दो घंटा के लिये नहीं अपितु पूरा दिन हो ताकि सदस्यों को विचार विमर्श के लिये पर्याप्त समय मिल सके ।
आम सभा
किसी भी संस्था में किसी विशेष उद्देश्य (चुनाव, बजट प्रस्ताव...) को लेकर आहूत आम सभा के अलावा साल में कम से कम एक बार संस्था के हित में बृहद चर्चा के लिये आहूत करना चाहिए जिसमें संस्था के विकास के लिए सदस्यों के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर उचित निर्णय लिया जा सके । ऐसे आम सभा एक दो घंटा के लिये नहीं अपितु पूरा दिन हो ताकि सदस्यों को विचार विमर्श के लिये पर्याप्त समय मिल सके ।
आम सभा
किसी भी संस्था में किसी विशेष उद्देश्य (चुनाव, बजट प्रस्ताव...) को लेकर आहूत आम सभा के अलावा साल में कम से कम एक बार संस्था के हित में बृहद चर्चा के लिये आहूत करना चाहिए जिसमें संस्था के विकास के लिए सदस्यों के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर उचित निर्णय लिया जा सके । ऐसे आम सभा एक दो घंटा के लिये नहीं अपितु पूरा दिन हो ताकि सदस्यों को विचार विमर्श के लिये पर्याप्त समय मिल सके ।
रविवार, 30 जून 2019
सबसे अच्छा सोशल मीडिया
उपन्यास कथा कहानी कविता निबंध में लेखक अपने मन की बात लिखता है । लोग खरीदकर पढ़ते थे लेकिन अब बहुत कम लोग खरीद रहे हैं ।मैं खुद दस बारह साल से छोड़ दिया ।
अब सोशल मीडिया अपना विचार ब्यक्त करने, विचार और जानकारी के आदान प्रदान के लिये सबसे अच्छा साधन है ।
अपने मन की बात
facebook twitter में कोई मेरे मन की बात पोस्ट करता है तो मैं शेअर कर देता हूं । टाईप करने से बच जाता हूँ । वैसे भी और उनकी तरह अच्छी शैली में निबंध कविता नहीं लिख सकता ।
कभी कभी किसी पोस्ट पर मुझे संशय हो तो debate discuss के लिये और कोई पोस्ट दूसरों की जानकारी के लिये भी शेअर करता हूं ।
शुक्रवार, 28 जून 2019
सपनों के सौदागर सपना दिखाते हैं
सालों से अखंड भारत का सपना दिखाने वाले खुद कुछ किये नहीं , बस सपना दिखाते हैं ये सपनों के सौदागर ।
अब भी यह सपना दिखा रहे हैं कुछ तथा कथित देश भक्त । क्या पाकिस्तान बंगला देश को भारत में जबर्दस्ती शामिल करने के लिए युद्ध करना उचित होगा?
अखंड भारत का सपना
अखंड भारत का सपना दिखाने वाले कुछ किये नहीं , बस सपना दिखाते हैं ये सपनों के सौदागर ।
गुरुवार, 27 जून 2019
मेरे गुरू
मैं किसी गुरू से कर्ण मंत्र नहीं लिया याने मेरा कोई कान फूंका गुरू नहीं है ।
मेरे गुरू हैं मेरे दादा जी, माता पिता, मेरे स्कूल शिक्षक, उपन्यासकार, कथाकार, कवि, लेखक, सम्पादक, सोशल मीडिया के विचारक, प्रकृति
बुधवार, 26 जून 2019
मेरा धर्म मानवता
मैं पूजा पाठ, अजपाजप, भगवान देवी देवताओं की मुर्तियों के सामने मत्था टेकना उनसे कुछ मांगना सालों से छोड़ दिया । मैं किसी गुरू से कर्ण मंत्र नहीं लिया याने मेरा कोई कान फूंका गुरू नहीं है ।
कभी कभी ध्यान करता हूं ।
मन्दिरों में चढ़ावा नहीं देता जहाँ भगवान देवी देयताओं की मुर्तियाँ होती हैं । सिर्फ़ एक मंदिर में चढ़ावा दिया हूं जहाँ साक्षात् देवी देवता विद्यार्थियों को बहुत कम वेतन में अच्छी शिक्षा देते हैं । वह मंदिर है बटमूल आश्रम महाविद्यालय महापल्ली जिला रायगढ़ ।
मानवता मेरा धर्म है । विद्यार्थियों के हित में कुछ कुछ करता रहता हूं ।
मंगलवार, 25 जून 2019
पढ़े लिखे मुर्ख
हाँ सही कहा, पढ़े लिखे मुर्ख पेड़ पर नहीं फलते। वे लकीर के फ़कीर होते हैं जो विज्ञान का क ख ग भी नहीं जानते । नये विचार को सुनना भी नहीं चाहते ।
ऐसे मुर्ख किसी विचार का तर्क आधार युक्त जबाब नहीं दे सकते, वे दूसरों को मुर्ख कह कर खुश होते हैं ।
तिरस्कार बहिष्कार
मेरे विचार से अन्तर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित करें न करें उनका तिरस्कार बहिष्कार नहीं करना चाहिए ।
सोमवार, 24 जून 2019
साजिश
सालों से नफ़रतों के बीज बो रहे हैं । अब फ़लने फ़ूलने लगे हैं ।
सब सोची समझी साजिश है । हिंदू मुस्लिम लड़ाई दंगा मारकाट.. मुस्लिम दूसरे देश में चले जाएंगे । हमारा देश हिंदुस्थान बन जाएगा ।
रविवार, 23 जून 2019
संविधान का पालन
संविधान का पालन करना चाहिए सब को लेकिन क्या भारत माता की जय और वंदे मातरम बोलना भी जरूरी है सब के लिये? हम तो बोलते हैं लेकिन घटिया नीच संकीर्ण चोर अपराधी गद्दार राष्ट्र द्रोही घूसखोर लोग भी वंदे मातरम और भारत माता की जय कहते हैं ।
शनिवार, 22 जून 2019
अन्तर्जातीय विवाह
मेरे विचार से अन्तर्जातीय विवाह को भले ही प्रोत्साहित न करें लेकिन उनका तिरस्कार बहिष्कार नहीं करना चाहिए ।
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हर जाति में उच्चता का दम्भ भरा है । कहते हैं अन्तरर्जातीय विवाह से खून का मिश्रण हो जाएगा जो उन्हें मंजूर नहीं । अब तक मिश्रण नहीं हुआ है ऐसा कहने का कोई आधार नहीं है । हमारे भारत में अधिकतर जाति के लोग mix colour के हैं याने एक जाति के लोग एक ही रंग रूप के नहीं हैं ।
पौराणिक काल, महाभारत काल में अंतर्जातीय विवाह प्रचलित थे । बाद में जातीय घमंड पनपा है ।
जरूरत पड़ने पर कथित नीची जाति का खून भी लेते हैं । कहते हैं हमारी जाति के संस्कार उच्च हैं । देख रहे हैं सब कहने की बात है । एक ही जाति में अलग अलग संस्कार होते हैं ।
कई बार युवा वर्ग में हत्या आत्म हत्या का कारण भी यह जाति दम्भ ही होता है ।
अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता देने वाले निश्चित ही किसी जाति धर्म से उपर मानवता के पुजारी होते हैं । जाति अहंकार वाले अंतर्जातीय विवाह करने वालों को जाति समाज से बहिष्कृत कर देते हैं ।
विज्ञान अनुसार जिन जातियों में सिकल सेल बीमारी होती है अन्तर्जातीय विवाह से भावी पीढी कम होगी ।
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मेरे विचार से अन्तर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित भले न करें लेकिन जो करते हैं उनका तिरस्कार बहिष्कार नहीं करना चाहिए ।
**************#
कृपया coment box में बिना तर्क आधार के असहमति व्यक्त न करें । कोई व्यक्तिगत प्रश्न उपदेश न दें ।
लकीर के फ़कीर तो इस पोस्ट को पढ कर सोच विचार करना पसंद नहीं करेंगे । बाकी युवा विचार वालों में से कुछ लोग क्या कहेंगे सोच कर चाहते हुए भी like नहीं करेंगे ।
बुधवार, 19 जून 2019
कुम्भ
आस्तिक बताते हैं कुम्भ नहाने से पाप धुल जाते हैं !
हम पूछतें हैं इतने पाप करते ही क्यों हो , की कुम्भ जाना पड़े ...!!
सोमवार, 17 जून 2019
कर्मेण्येव अधिकारस्ते..
गीता के श्लोक पर सवाल नहीं लेकिन हमसे भूल हो सकती है ।
*******
गीता के श्लोक को लिखने में हम भूल कर सकते हैं| मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा डी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
कई लोगों से मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ|
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम्
गीता का यह चित्र श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
सोचने की बात है कि गीता में
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए"नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए"
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्नमधर्मस्य) नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य (अभ्युत्थानम् धर्मस्य) कहा गया होगा|
**"*"**"
जो संस्कृत का कखग भी नहीं जानते खुद को महा ज्ञानी समझते हैं |फिर भी बकबक करते हैं इससे अनावश्यक परेशानी होती है । कृपया ऐसे लोग दूर रहें ।
जो संस्कृत के जानकार होते हैं वे ज्यादातर लकीर के फ़कीर होते हैं । कुछ भी नया सुनना भी पसंद नहीं करते ।
हाई स्कूल तक सभी संस्कृत पढ़ते हैं उनसे निवेदन है मेरे संदेह पर गौर करें तथा तर्क आधार सह अपना विचार व्यक्त करें ।
संस्कृति
लकीर के फ़कीर संस्कृति का रोना रोते रहते हैं । वे चाहते हैं पीछे ले जाना । आगे बढ़ना नहीं चाहते, किसी को आगे बढ़ते देखना नहीं चाहते ।
दरअसल हम जैसा जीते हैं वही संस्कृति है । परिवर्तन संशोधन के साथ सतत विकास ही संस्कृति है ।
शनिवार, 15 जून 2019
कर्मेण्येव अधिकारस्ते..
गीता के श्लोक पर सवाल नहीं लेकिन हमसे भूल हो सकती है ।
*******
गीता के श्लोक को लिखने में हम भूल कर सकते हैं| मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा डी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
कई लोगों से मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ|
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम्
गीता का यह चित्र श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
सोचने की बात है कि गीता में
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए"नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए"
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्नमधर्मस्य) नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य (अभ्युत्थानम् धर्मस्य) कहा गया होगा|
**"*"**"
जो संस्कृत का कखग भी नहीं जानते खुद को महा ज्ञानी समझते हैं |फिर भी बकबक करते हैं इससे अनावश्यक परेशानी होती है । कृपया ऐसे लोग दूर रहें ।
जो संस्कृत के जानकार होते हैं वे ज्यादातर लकीर के फ़कीर होते हैं । कुछ भी नया सुनना भी पसंद नहीं करते ।
हाई स्कूल तक सभी संस्कृत पढ़ते हैं उनसे निवेदन है मेरे संदेह पर गौर करें तथा तर्क आधार सह अपना विचार व्यक्त करें ।
कर्मेण्येव अधिकारस्ते..
गीता के श्लोक पर सवाल नहीं लेकिन हमसे भूल हो सकती है ।
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गीता के श्लोक को लिखने में हम भूल कर सकते हैं| मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा डी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
कई लोगों से मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ|
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम्
गीता का यह चित्र श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
सोचने की बात है कि गीता में
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए"नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए"
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्नमधर्मस्य) नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य (अभ्युत्थानम् धर्मस्य) कहा गया होगा|
**"*"**"
जो संस्कृत का कखग भी नहीं जानते खुद को महा ज्ञानी समझते हैं |फिर भी बकबक करते हैं इससे अनावश्यक परेशानी होती है । कृपया ऐसे लोग दूर रहें ।
जो संस्कृत के जानकार होते हैं वे ज्यादातर लकीर के फ़कीर होते हैं । कुछ भी नया सुनना भी पसंद नहीं करते ।
हाई स्कूल तक सभी संस्कृत पढ़ते हैं उनसे निवेदन है मेरे संदेह पर गौर करें तथा तर्क आधार सह अपना विचार व्यक्त करें ।
मंगलवार, 11 जून 2019
मृतक भोज
मेरे विचार से मृतक भोज के संबंध में किसी जाति समाज द्वारा कोई नियम नहीं बनाना चाहिए । मृतक भोज का बहिष्कार तिरष्कार करना उचित नहीं । जब भी मौका मिला मैं विरोध किया हूं ।
जो मृतक भोज बंद करने की बात करते हैं उन्हें
अपने घर परिवार से पहल करनी चाहिए । स्वयम् अपनी इच्छा लिख कर अपने परिवार तथा समाज के चार - पांच लोगों को दे दें ।
इस संबंध में कोई नियम न बनाएं। कोई भोज दे , न दे । जैसा भोज देना चाहे, मीठा खिलाए जो जो खिलाए अपनी मर्जी ।
मेरा यह विचार पहले भी व्यक्त किया हूं फेसबुक में ।
*******
मेरा यह भी सुझाव है धनी लोगों के लिये -
70-75 साल उम्र के बाद एक उत्सव मनाएं अपने जीने का । अपने परिवार, रिश्तेदार, मित्र्, परिचितों शुभ चिंतकों को आमंत्रित करें ।
मनोकामना पूरी होती है
पहले सुना था देवी देवताओं की मुर्तियों के दर्शन करने से मनोकामना पूरी होती है । अब कहने लगे हैं उनकी मुर्तियों के फोटो सोशल मीडिया में शेअर करने से मनोकामना पूरी होती है । गज़ब ।
गुरुवार, 30 मई 2019
मातृ भाषा का महत्व
छत्तीसगढ़ में ओड़िया भाषी कुछ लोग अपने बच्चों को ओड़िया भाषा से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं|
अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाला आपका बच्चा अपनी मातृ भाषा या राष्ट्र भाषा में ठीक से बात नहीं कर सकता या नहीं समझ सकता तो यह गर्वित होने की नहीं लज्जित होने की बात है|
मंगलवार, 28 मई 2019
अयोध्या में राम मंदिर
अयोध्या में मस्जिद के पास ही राम जी का मंदिर, कोप भवन जानकी रसोई, दरबार.. मुझे याद आ रहे हैं 1981-82 में हम देखे थे । वह सब नहीं हैं क्या?
सोमवार, 27 मई 2019
एक नई पार्टी का गठन हो
कांग्रेस और अन्य सभी दलों को खत्म कर एक नया दल बनाना चाहिए जिसके उद्देश्य हो लोक कल्याण, वैज्ञानिक सोच। पद लोलूप लोगों को न रखें ।
साधु बाबा असामान्य
साधु बाबा लोग असमान्य होते हैं । इन्हें जंगल पहाड़ में रहना चाहिए । आबादी क्षेत्र में निषेध होना चाहिए ।
वोट देने का अधिकार नहीं होना चाहिए ।
गुरुवार, 23 मई 2019
मंगलवार, 21 मई 2019
आर्य और अनार्य
हमारे देश के मूल निवासी ST और OBC हैं ।आर्य बाहर से आये थे । वे मूल निवासियों को अनार्य कहते थे ।
ST को असुर कहते थे और OBC को राक्षस ।
ये मनु के किसी वर्ण में से नहीं हैं ।
कांग्रेस को खत्म कर नया संगठन बनाने का सलाह
गांधी जी के सलाह अनुसार कांग्रेसी "कांग्रेस"को खत्म कर नया संगठन "लोक सेवा दल" बना लेते। तो क्या फ़र्क पड़ता?
सोमवार, 20 मई 2019
कर्म अनुसार वर्ण
कर्म अनुसार वर्ण प्रचलित नहीं है जिस जाति के परिवार में पैदा होता है उसी जाति का माना जाता है कर्म अनुसार वर्ण मान्य होने से कथित शुद्र जाति के परिवार में जन्मे किसी अध्यापक को ब्राह्मण परिवार में जन्मे किसी अध्यापक लड़की के साथ शादी करने में कोई सामाजिक बाधा नहीं होगी । यह बहुत अच्छा होता लेकिन ऐसा होता नहीं है ।
भारत के मूल निवासी राक्षस
भारत के मूल निवासी हैं ST और OBC । ST जंगलों में रहते थे । मैदानी इलाकों में OBC रहते थे जो खेती करते थे । आज कल ST भी खेती करते हैं । भारत के मूल निवासियों को पुराणों में राक्षस कहा गया है ।
ये मनु के चार वर्णों में नहीं आते ।
गुरुवार, 16 मई 2019
समाज सेवा
यह समझ में नहीं आता की साठ बासठ के बाद लोगों को समाज सेवा, भजन कीर्तन, मंदिर मस्जिद, तीर्थ यात्रा, .... की कैसे सूझती है/ यह सब थोडा बहुत पहले से क्यों नहीं होता? कुछ लोग सेवा निवृत्ति पश्चात् पेंट शर्ट छोड़ कर धोती कुरता पहनते हैं, कोई दाढ़ी रखने लगते हैं/ परिवर्तन,,, ..?
एक शिक्षक अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर बोले "मैं अब भागवत शरण में जीवन बिताऊंगा/ पता नहीं वे अब तक किसके शरण में थे?
शुक्रवार, 3 मई 2019
पूजा आरती की जरूरत नहीं है
मेरे विचार से सर्व शक्तिमान कथित ईश्वर या किसी देवी देवता को हमारी सेवा, पूजा, आरती (प्रशंसा गीत/मस्का) या भोग लगाने की जरूरत नहीं है|