समाज का अर्थ जाति समाज कहना ठीक नहीं है । पहले समाज याने एक समुदाय को कहा जाता था जो परस्पर आर्थिक ब्यावसायिक, सामाजिक सम्बन्धों के साथ मिलकर रहते थे, सुख दुख के भागिदार होते थे । अब समाज का मतलब जाति से नहीं, पूरा देश, पूरा विश्व हो गया है । क्यों कि पूरे विश्व के लोग परस्पर सम्बन्धित होते हैं । एक देश के लोगों की तकलीफ़ से दूसरे देश के लोगों को भी दुख होता है । एक देश का प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ता है । इसिलिये विनोबा जी जय भारत नहीं, जय जगत कहते थे ।
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
बुधवार, 17 जुलाई 2019
सम्पूर्ण विश्व एक समाज
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