सोमवार, 17 जून 2019

संस्कृति

लकीर के फ़कीर संस्कृति का रोना रोते रहते हैं । वे चाहते हैं पीछे ले जाना । आगे बढ़ना नहीं चाहते,  किसी को आगे बढ़ते देखना नहीं चाहते ।
दरअसल हम जैसा जीते हैं वही संस्कृति है । परिवर्तन संशोधन के साथ सतत विकास ही संस्कृति है ।

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