शनिवार, 22 जून 2019

अन्तर्जातीय विवाह


मेरे विचार से अन्तर्जातीय विवाह को भले ही प्रोत्साहित न करें लेकिन उनका तिरस्कार बहिष्कार नहीं करना चाहिए ।
*************#
हर जाति में उच्चता का दम्भ भरा है । कहते हैं अन्तरर्जातीय विवाह से खून का मिश्रण हो जाएगा जो उन्हें मंजूर नहीं । अब तक मिश्रण नहीं हुआ है ऐसा कहने का कोई आधार नहीं है । हमारे भारत में अधिकतर जाति के लोग mix colour के हैं याने एक जाति के लोग एक ही रंग रूप के नहीं हैं ।
पौराणिक काल, महाभारत काल में अंतर्जातीय विवाह प्रचलित थे । बाद में जातीय घमंड पनपा है ।
जरूरत पड़ने पर कथित नीची जाति का खून भी लेते हैं । कहते हैं हमारी जाति के संस्कार उच्च हैं । देख रहे हैं सब कहने की बात है । एक ही जाति में अलग अलग संस्कार होते हैं ।
कई बार युवा वर्ग में हत्या आत्म हत्या का कारण भी यह जाति दम्भ ही होता है ।
       अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता देने वाले निश्चित ही किसी जाति धर्म से उपर मानवता के पुजारी होते हैं । जाति अहंकार वाले अंतर्जातीय विवाह करने वालों को जाति समाज से बहिष्कृत कर देते हैं ।
विज्ञान अनुसार जिन जातियों में सिकल सेल बीमारी होती है अन्तर्जातीय विवाह से भावी पीढी कम होगी ।
** ***********#
मेरे विचार से अन्तर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित भले न करें लेकिन जो करते हैं उनका तिरस्कार बहिष्कार नहीं करना चाहिए ।
**************#
कृपया coment box में बिना तर्क आधार के असहमति व्यक्त न करें । कोई व्यक्तिगत प्रश्न उपदेश न दें ।
लकीर के फ़कीर तो इस पोस्ट को पढ कर सोच विचार करना पसंद नहीं करेंगे । बाकी युवा विचार वालों में से कुछ लोग क्या कहेंगे सोच कर चाहते हुए भी like नहीं करेंगे ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें