-हमारे देश में आरक्षण -
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संविधान में दलित शोषित जन को मुख्य धारा में जोड़ने. उनके आर्थिक सामाजिक विकास के लिये कुछ साल के लिये आरक्षण का प्रावधान रखा ।
जब देखा गया कि उस वर्ग का पर्याप्त विकास नहीं हुआ है तब आरक्षण की अवधि बढाई . रही ।अब भी यह जारी है । इससे अनारक्षित वर्ग को निश्चित ही नुकसान हो रहा है । वे इस आरक्षण से बहुत चिढ़ते हैं । समय समय पर विरोध करते हैं ।
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कहा जाता है कि वोट बैंक के कारण कांग्रेस ने आरक्षण को जारी रखा।
तो फ़िर भाजपा ने पूर्ण बहुमत होते हुए भी क्यों बंद नहीं किया?
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निश्चित ही इससे प्रतिभा को नुकसान होता है । प्रतिभा का नुकसान याने देश का नुकसान ।
लेकिन प्रतिभा का नुकसान तब भी होता था जब शम्बुक, अम्बेडकर जैसे विद्वान को जाति आधार पर प्रताड़ित किया गया ।
वैसे हमने यह भी देखा है कि अनारक्षित लोग भी देश का बहुत नुकसान करते हैं । -
वे दुश्मन देशों को देश की गोपनीय जानकारी देकर पकड़े जाते हैं ।
वे सर्जन किसी के पेट में सर्जरी के बाद कैंची और रुई छोड़ देते हैं ।
वे गोशाला घोटाले में पकड़े जाते हैं ।
उनके सेक्स रेकेट पकड़े जाते हैं ।
उनके द्वारा बनाए बड़े बड़े पूल भवन गिर जाते हैं ।
वे आय कर विभाग द्वारा आय कर चोरी के मामले में पकड़े जाते हैं ।
वे बड़े बड़े भ्रष्टाचार मामले में पकड़े जाते हैं ।
वे ही बैंकों से करोड़ों रूपये लेकर विदेश भाग जाते हैं ।
. और भी कई....
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कहा जाता है कि आरक्षण का लाभ आर्थिक सामाजिक रूप से उच्च स्तर के परिवार को भी लाभ मिल रहा है ।
इस पर अवश्य विचार कर उचित निर्णय लेना चाहिए ।
वैसे ही गरीबी रेखा से नीचे का लाभ कुछ धनीमानी लोग भी ले रहे हैं ।
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
शनिवार, 30 मार्च 2019
हमारे देश में आरक्षण
धर्म का अर्थ
यः धारयति सः धर्मः|
जो धारण करने योग्य है, जो धारण करते हैं ,
जो धारण करना चाहिए वह धर्म है|
आत्म दीपो भव_ गौतम बुद्ध
अपना धर्म सोच समझकर स्वयं निश्चित करें कि हमें क्या धारण करना चाहिए|
सोमवार, 25 मार्च 2019
धार्मिक ग्रन्थों की पढ़ाई
हमारे पूरे भारत के सभी स्कूल कालेजों में एक और optional art group होना चाहिए "हमारे धर्म "। ( गीता, रामायण, चारों वेद, सभी पुराण, भागवत कथा, श्री राम कथा....के अलावा बाइबिल, कुरान...... ..सभी धार्मिक ग्रंथ )
मुझे लगता है धार्मिक कट्टर लोग अपने बच्चों को यही संकाय पढ़ने के लिये कहेंगे लेकिन आज के विद्यार्थी निश्चित ही intelligent हैं । वे यह सब पढ़ कर इनकी माञताओं से दूर हो जाएंगे और वैज्ञानिक सोच वाले बन जाएंगे ।
शुक्रवार, 15 मार्च 2019
मन की बात
मोदी जी रेडियो में मन की बात सुनाते हैं ।
बाकी समय जो कहते हैं वह सब किसके मन की बात होती है ?
सत्ता की बागडोर
ये तो बता दो कोई 15 अगस्त 1947 को तिरंगा फ़हराने के लिये मोदी जी, हिन्दू महासभा या आर एस एस के किसी को क्यों नहीं बुलाये? इन्हें सत्ता की बागडोर क्यों नहीं सौंपे?
अनुकरण
हमारी पुरानी परम्पराओं को पकड़ के रखना कोई जरूरी नहीं । जो ठीक लगे, अच्छा लगे मुस्लिम या इसाइयों का अनुसरण अनुकरण करने में क्या बुराई है? लेकिन लकीर के फ़कीर लोगों को कुछ भी नया अच्छा नहीं लगता ।
गुरुवार, 14 मार्च 2019
प्रार्थना
देश में कोई बड़ी दुर्घटना होने से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की हम कामना करते हैं, भगवान से हम प्रार्थना करते हैं ।
अच्छा होता भगवान से प्रार्थना करते कि हमारे देश में कभी कोई दुर्घटना न हो ।
प्रर्थना
देश में कोई बड़ी दुर्घटना होने से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं, भगवान से हम प्रार्थना करते हैं ।
अच्छा होता भगवान से प्रार्थना करते कि हमारे देश में कभी कोई दुर्घटना न हो ।
सोमवार, 11 मार्च 2019
बात बात पर झूठ बोलने वालों से लोग सबूत मांगते हैं । लेकिन एअर स्ट्राइक के बाद फोटो या वीडियो लेना सम्भव नहीं ।
सवाल और प्रमाण
जब संदेहास्पद बात करे कोई तो सवाल करना, सबूत मांगना गलत नहीं है ।
वैसे पुलवामा के बाद पकिस्तान में सेना द्वारा किये air strike का फोटो या video लेना आसान नहीं था जरूरी भी नहीं था ।
लेकिन ध्यान रहे विज्ञान सवाल और प्रमाण पर ही विकसित होता है ।
सवाल करने वाले प्रमाण मांगने वाले मुर्ख नहीं होते. लकीर के फ़कीर नहीं होते ।
बुधवार, 6 मार्च 2019
ज्ञानी
ये गाली गलौच करने वाले, झूठ अफ़वाह फ़ैलाने वाले, नफ़रत के बीज बोते हैं । वे पुस्तकें पत्रिकायें ग्रंथ पढ़ना जरूरी नहीं समझते । लेकिन बहुत ज्ञानी होते हैं ।
सोमवार, 4 मार्च 2019
वे बहुत ताकतवर हैं
वे बहुत ताकतवर हैं
ज्यादा मत बोलो वर्ना
तुम्हारा मुंह बंद कर देंगे
फिर माफ़ी मांगोगे या
अपनी बात वापस लोगे
तब ओंठों के टाँके खोलेंगे
वे बहुत ताकतवर हैं
ज्यादा मत लिखो वर्ना..
रविवार, 20 जनवरी 2019
मनु स्मृति और कुरान अब नहीं ये हमारे संविधान
कुरान, मनु स्मृति तब के संविधान थे जिसे धर्म कहा गया ।
ये धारयति से धर्मः। जो धारण करने योग्य हो, जिसे धारण करें वह धर्म है।
उनमें देश काल परिस्थिति अनुसार आवश्यक संशोधन नहीं किया गया । फ़लस्वरूप ये खत्म हो रहे हैं ।
अब तो हमारा संविधान ही हमारा धर्म है।
रविवार, 9 दिसंबर 2018
भक्ति ओर श्रद्धा
यज्ञ हवन पूजा पाठ में भक्ति होती है, स्वार्थ होता है, कुछ मांग होती है भगवान देवी देवताओं से| महात्मा गांधी की समाधि पर कोई श्रद्धा सुमन अर्पित करे, प्रणाम करे तो वह स्वार्थ नहीं, कोई मांग नहीं केवल श्रद्धा होती है|
भक्ति ओर श्रद्धाशनिवार, 8 दिसंबर 2018
सब के रास्ते अलग अलग
अगर भगवान अल्लाह सब एक ही हैं तो उनके बताए रास्ते भी एक ही होना चाहिए| हिंदू मुस्लिम सब अलग अलग क्यों?
सभी एक मत होते हैं
कहते हैं उपर वाले की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता| तो ये उपर में रहने वाले अल्लाह भगवान.. सभी किसी पत्तीको हिलाते समय एकमत होते हैं?
शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018
आघात
-आघात-
छः दिसम्बर ब्यानबे
दिन था रविवार
हम गर्वित थे हर्षित थे
मुस्लिमों को चिढ़ाकर
पुण्य के भागी बने थे
बाबरी मस्जिद गिराकर|
अगला दिन सोमवार
चैन की नींद सोया था
अचानक मैंने देखा
सामने साक्षात भगवान
श्री राम चंद्र विराजे हैं|
मैं आनंद से विभोर
भगवान के चरण स्पर्श
करने हुआ उद्यत
किंतु भगवान राम ने
मारी एक लात
मेरे सीने पर|
कहा - हे मेरे अंध भक्त
तुने क्यों दिल दुखाया
मानवता के भक्तों का
मैं खुशी से रहता था
अयोध्या के मस्जिद में|
तुझे क्या तकलीफ थी
कि उसे ध्वस्त कर दिया
जब तू रह सकता है
फैजाबाद के मुसाफिर खाना में
तो मैं क्यों नहीं रह सकता
अयोध्या के बाबरी मस्जिद में?
अचानक नींद खुली थी
देखा वह तो सपना था
सचमुच एक सपना था
उनका कोई चिन्ह नहीं था
किंतु पदाघात का दर्द
अब भी सीने में था|
शनिवार, 10 नवंबर 2018
ईमानदारी की खोज
हमारे देश के आर एस एस और भाजपा चाहते हैं ईमादारी| इसलिए अटल, मोदी, योगी, ऊमा जी उन्हें पसंद हैं| क्योंकि उनके परिवार नहीं है|
उनके लिए अन्य योग्यता जरूरी नहीं है बस शादी न करें| भूल से कर लिए तो पत्नी का त्याग कर दें|
ये अलग बात है कि आर एस एस और भाजपा के बहुत सारे लोग भी अन्य दलों की तरह भ्रष्टाचारी होंगे|
गुरुवार, 8 नवंबर 2018
बहुत सारे ईश्वर
हमारा धर्म हर प्राणी से प्रेम होना चाहिए | लेकिन सभी धर्म एक दूसरे के विरुद्ध घृणा द्वेष फैला रहे हैं| बहुत सारे ईश्वर भगवान खुदा गॉड हैं जो मनुष्यों के बीच दिवाल खड़े कर रहे हैं|
बुधवार, 24 अक्टूबर 2018
मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018
नया जमाना, नई पीढ़ी
लकीर के फकीर कोई नई बात, कोई परिवर्तन सुनना भी पसंद नहीं करते| ऐसे लोग खुद को महा ज्ञानी समझते हैं और नए जमाने को, नई पीढ़ी को बात बात पर खराब बताते हैं|
satyamshiwamsundaram.blogger.com: लोकतंत्र में जाति धर्म
satyamshiwamsundaram.blogger.com: नफरत के बीज
satyamshiwamsundaram.blogger.com: नफरत के बीज
सोमवार, 22 अक्टूबर 2018
नफरत के बीज
गांधी नेहरू सुभाष भगत ... ... .. सबके रास्ते अलग अलग थे लेकिन मंजिल एक थी|
ये गांधी सुभाष को लड़ाने वाले तब अपनी खिचड़ी अलग पका रहे थे झूठ अफवाह के सहारे नफरत के बीज तैयार कर रहे थे|
लोकतंत्र
रोशन अग्रवाल, विजय अग्रवाल, उमेश अग्रवाल, डॉ राजू अग्रवाल...
मतलब अग्रवाल लोग एकजूट नहीं हैं|
होना भी नहीं चाहिए|
लोकतंत्र में जाति धर्म आधारित वोटिंग नहीं होनी चाहिए|
किसी भी जाति समाज में किसी एक उम्मीदवार के लिए सर्वसम्मति नहीं हो सकती|
होना भी नहीं चाहिए| लोकतंत्र में jati dharm आधारित वोटिंग नहीं होनी चाहिए|
जाति धर्म नहीं योग्यता देखकर वोट देना चाहिए|
शनिवार, 20 अक्टूबर 2018
हिंदू धर्म
मनु जी के चार वर्णों ब्राह्मण क्षत्रीय वैश्य शुद्र में से ब्राह्मणों द्वारा रचित वेद पुराण स्मृति को हम हिंदू धर्म मानते हैं| लेकिन हमारे देश के सुप्रीम कोर्ट के अनुसार हिंदू कोई धर्म नहीं है| यह एक संस्कृति है|
जानकार लोग कृपया हिंदू धर्म क्या है? इसकी जानकारी दें|
ईश्वर की खोज
पृथ्वी कैसे बनी, ब्रह्मांड को किसने बनाया? उसका नियमित संचालन कौन करता है? जीवन प्राण कौन देता है? कौन लेता है? मृत्यु के बाद क्या होता है?
इन्हीवअनुत्तरित प्रश्नो के जाबाब के लिए ईश्वर भगवान खुदा अल्लाह गॉड की खोज की गई| इससे मन शांत हो जाता है| सब कुछ वही करता है उसी की मर्जी से होता है ऐसा मान लेने से मन की उद्वीग्नता कम हो जाती है| मन की शांति के लिए यह मनोवैज्ञानिक इलाज है जो माने उसके लिए| जो न माने वह किसी बड़ी दुर्घटना की क्षति को सोच सोच कर अशांत रह सकता है परेशान रह सकता है वर्षों तक या जीवन भर| हो सकता है उस पीड़ा को नहीं झेल पाने से वह पागल हो जाय|
शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2018
लोकतंत्र में राजनीति
राजतंत में आम जन को राजनीति से दूर रखा जाता था| लोकतंत्र में हर वयस्क नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह राजनीति से जुड़े| वोट देना भी राजनीति से जुड़ना है|
वोट मांगना ही राजनीति नहीं, वोट देना भी है|
वोट और स्वार्थ
किसी भी जाति समाज के नेताओं के द्वारा अपने पद और अपने संगठन से जुड़े लोगों की संख्या बताकर वोट दिलाने का आश्वासन देकर किसी राजनैतिक दल से रकम लेना बहुत घटिया काम है| ऐसे स्वार्थी नेताओं को समाज में कोई पद नहीं देना चाहिए|
किसी जाति समाज द्वारा समाज के लोगों से किसी को वोट देने के लिए अपील नहीं करना चाहिए| इसके लिए कोई नियम आदोश निर्देश जारी करना उचित नहीं|
सब कुछ पूर्व निर्धारित
हमारे हिंदू धर्म के अनुसार जो भी होता है पूर्व निर्धारित होता है| याने भगवान द्वारा तय होता है| बाढ़ भूकम्प, युद्ध, दंगे फसाद, हत्या चोरी डकैती, बलात्कार, भ्रष्टाचार... सब कुछ.. यह भी कोई पत्ता हिलता हो तो वह भी उपर वाले की मर्जी से . सब
कुछ वही करता है| गजब है यह मान्यता|
कोई इसे बकवास कहे तो उनकी धार्मिक आस्था को चोट लगेगी| और इन मान्यताओं के प्रचार प्रसार से हमारी वैज्ञानिक आस्था को चोट लगेगी उसका क्या?
बुधवार, 17 अक्टूबर 2018
भारतवर्ष का पुराना संविधान
भारतवर्ष का पुराना संविधान _
***"*************कॉपी पेस्ट संकलित है| यदि कुछ गलत हो तो कृपया सही सही बताएं|
1 - यह जो ब्राम्हण, क्षेत्रीय, वैश्य व शूद्र जो विभाजन है वह मेरा द्वारा ही रचा गया है।
- गीता 4-13
2 - मेरी शरण में आकर स्त्री ,वेश्य , शूद्र भी जिन कि उत्त्पति पाप योनि से हुइ है परम गति को प्राप्त हो जाते है। भगवत गीता 9-32
3 - शूद्र का प्रमुख कार्य तीनो वर्णो की सेवा करना है।
- महाभारत 4/50/6
4 - शूद्र को सन्चित धन से स्वामी कि रक्षा करनी चाहिये। - महाभारत 12/60/36
5 - शूद्र तपस्या करे तो राज्य निर्धनता में डूब जायेगा।
- वाo .रामायण 7/30/74
6- ढोल .गवार .शूद् पशु नारी |
सकल ताड़ना के अधिकारी ||
- रामचरित मानस 59/5
7- पूजिये विप्र सील गुन हीना, शूद्र न गुण गन ग्यान प्रविना।
-रामचरितमानस 63-1
8- वह शूद्र जो ब्राम्हण के चरणो का धोवन पीता है राजा उससे कर TAX न ले।
- आपस्तंबधर्म सूत्र 1/2/5/16
9 - जिस गाय का दूध अग्निहोत्र के काम आवे शूद्र उसे न छुये। कथक सन्हिता 3/1/2
10- शूद्र केवल दूसरो का सेवक है इसके अतिरिक्त उसका कोइ अधिकार नही है।
- एतरेय ब्राम्हण 2/29/4
11- यदि कोइ ब्राम्हण शूद्र को शिक्षा दे तो उस ब्राम्हण को चान्डाल की भाँति त्याग देना चाहिये।
- स्कंद पुरान 10/19
12 - यदि कोइ शूद्र वेद सुन ले तो पिघला हुआ शीशा, लाख उसके कान में डाल देना चाहिये।
यदि वह वेद का उच्चारण करे तो जीभ कटवा देना चाहिये। वेद स्मरण करे तो मरवा देना चाहिये।
गौतम धर्म शूत्र 12/6
13 - देव यज्ञ व श्राद्ध में शूद्र को बुलाने का दंड 100 पर्ण।
विष्णु स्मृति 5/115
14 - ब्राम्हण कान तक उठा कर प्रणाम करे, क्षत्रिय वक्षस्थल तक, वैश्य कमर तक व शूद्र हाथ जोड़कर एवं झुक कर प्रणाम करे।
आपस्तंब धर्म शूत्र 1,2,5,/16
15 - ब्राम्हण की उत्पत्ति देवता से, शूद्रो की उत्पत्ति, राक्षस से हुइ है।
तेत्रिय ब्राम्हण 1/2/6/7
17 - यदि शूद्र जप ,तप, होम करे तो राजा द्वारा दंडनिय है।
गौतम धर्म सूत्र 12/4/9
17- यज्ञ करते समय शूद्र से बात नहीं करना चाहिये।
शतपत ब्राम्हाण 3;1/10
18- जो शूद्र अपने प्राण, धन तथा अपनी स्त्री को, ब्राम्हण के लिए अर्पित कर दे ,उस शूद्र का भोजन ग्राहय है।
विष्णु पुराण 5/11
👉महाभारत"कहती है - शूद्र राजा नहीं बन सकता।
👉"गीता" कहती है - शूद्र को ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्यों की गुलामी करनी चाहिए ।
👉"रामायण" कहती है - शूद्र को ज्ञान प्राप्त करने पर मृत्युदंड मिलना चाहिए ।
👉"वेद" कहते है कि शूद्र ब्रह्मा के पैरोँ से पैदा हुआ है इसिलिये वो नीच है ।
👉"मनुस्मृति" के अनुसार - शूद्र का कमाया धन ब्राह्मण को बलात् छीन लेना चाहिए ।
👉"वेद" कहते है - शूद्र का स्थान ऊपर के तीनों वर्णों के चरणों में है।
मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018
जगत का कल्याण
पद्ममुख पंडा_
बहुत से धर्माचार्य ईश्वर को अपना रक्षा कवच मानते हैं जिस दिन सिद्ध हो गया कि ईश्वर नहीं है उस दिन इनके आजीविका का माध्यम भी समाप्त हो जाएगा
कहते हैं कि ईश्वर अनुभव में होता है उसे देखने के लिए दिव्य दृष्टि चाहिए क्या ईश्वर नहीं चाहता कि संपूर्ण संसार उसे दिव्य दृष्टि से देखे पूरा विश्व खुशियों से भरा हो?
भ्रांतिपूर्ण स्थिति से उबरने के लिए बुद्धि व तर्क ही एकमात्र उपाय है इसी में जगत का कल्याण निहित है|
सोमवार, 15 अक्टूबर 2018
महा आश्चर्य
बहुत आश्चर्य!
हमारे देश में बहुत सारे लोग ईश्वर को जानते समझते हैं| यह भी सच है कि अधिकतर लोग भ्रष्टाचारी पापी अपराधी स्वार्थी हैं|
आश्चर्य
बहुत आश्चर्य|
मानते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं| सम्पूर्ण ब्रह्मांड का संचालन करते हैं वे फिर भी हम उनके रहने बसने, खाने पीने की चिंता करते हैं| इस चिंता में हम मरते मारते भी हैं|
शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018
पूजे अगर खेत के ढेले
रामधारी सिंह दिनकर_
उठ मंदिर के दरवाजे से,
जोर लगा खेतों में अपने|
पूजे अगर खेत के ढेले,
तो सचमुच कुछ पा जाएगा|
भीख या कि वरदान मांगता
पड़ा रहा तो पछताएगा||
शुक्रवार, 21 सितंबर 2018
मुहर्रम
मुहर्रम में लोग अपने शरीर को लहुलुहान कर लेते हैं| वे बहुत बहादुर होते हैं|
वे चाहें तो आतंकवादियों को लहुलुहान कर सकते हैं|
शनिवार, 15 सितंबर 2018
यदा यदा हि...
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत|
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं युगे युगे|
या
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत|
अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदात्मनं सृजाम्यहम् युगे युगे||
********
गीता के श्लोक को लिखने में हम भूल कर रहे हैं? मुझे संदेह हुआ| मैं 1995 में गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से पढ़ा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा जी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
कई लोगों को मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ|
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष के लिए
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य का
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम = सृजामि अहम्=सृजन करता हूँ ।
मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम् |
गीता का यह चित्र श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
सोचने की बात है कि गीता में
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए" नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए"
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्थामधर्मस्य) नहीं|
अभ्युत्थानम् घर्मस्य (अभ्युत्थानम् धर्मस्य) कहा गया होगा|.
**"*"**"
शुक्रवार, 14 सितंबर 2018
यदा यदा हि..
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत|
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं युगे युगे|
या
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत|
अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदात्मनं सृजाम्यहम् युगे युगे||
********
गीता के श्लोक को लिखने में हम भूल कर सकते हैं/कर रहे हैं? मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा जी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
कई लोगों को मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ|
तब मैं मई 2015 में फेसबुक में लिखा| 2016, 2017, 2018 में फिर से शेअर किया| 17-06-2018 को फेसबुक और वाट्सएप कई ग्रुप में शेअर किया|
मेरे वाट्सएप ग्रुप "विचार मंच" में रचनाकार महेश शर्मा ने आज दिनांक 17-06-2018 के अर्थ बताया -
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम् |
उसी दिन यथार्थवादी चिंतक, रचानाकार पद्ममुख पंडा महापल्ली मुझसे सहमत हुए| कुछ और भी| सहमत हुए|
गीता का यह चित्र श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
सोचने की बात है कि गीता में
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए" नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए"
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्थामधर्मस्य) नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य (अभ्युत्थानम् धर्मस्य) कहा गया होगा|.
**"*"**"
रविवार, 2 सितंबर 2018
नागरिक होने का अधिकार
"जो कोई कुछ करता है उसे करने दो तुम क्यों उनको देखते हो?" कुछ भी हो रहा हो निस्पृह बने रहो|
वाह गजब का उपदेश है|
याने कोई रेप करता है कुछ भी करता है हमें क्या|
साधु संतों बाबाओं का यह उपदेश देश दुनियां से कोई मतलब नहीं रखने की शिक्षा देता है|
ऐसे तपस्वी बाबा साधु संत मंदिरों के पुजारी जो देश दुनियां से कोई मतलब नहीं रखते| जब तक जागते हैं जप तप, भजन कीर्तन, पूजा पाठ, यज्ञ हवन करते रहते हैं|
ऐसे लोगों को लोकतंत्र में नागरिक होने का, वोट देने का अधिकार होना चाहिए?
शुक्रवार, 31 अगस्त 2018
हमारे भगवान देवी देवता सबसे ज्यादा
हम हिंदुओं के सबसे अधिक भगवान और देवी देवता| तो हम हिंदू महान|हमारी संस्कृति महान| याद है हमारे भगवान देवी देवताओं के नाम? तैंतीस करोड़?
अपडेटेट धर्म संविधान
यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करने योग्य हो वह धर्म है|
हमारा अपडेटेड धर्म है संविधान| संशोधन होता रहता है |
लेकिन लकीर के फकीर अपडेटेड धर्म को कम महत्व देते हैं पुराने धर्म से चिपके रहना पसंद करते हैं|
बुधवार, 29 अगस्त 2018
RSS का हाफ पेंट
कोई बता सकते हैं हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षक RSS राष्ट्रीय स्वयं सेवक का लगभग 90 साल तक गणवेष हाफ पेंट क्यों था? धोती कुरता क्यों नहीं?
यदि आधुनिक युग में धोती कुरता को उपयुक्त नहीं माना गया तो फुल पेंट क्यों नहीं?
वैसे भी ये स्वयं सेवक केवल उनके बैठक या लाठी चालन, परेड आदि के समय ही हाफ पेंट पहनते थे| अपने नीजी जीवन में सभी फुल पहनते थे हाफ नहीं|
सोमवार, 13 अगस्त 2018
भारतीय गोबर विज्ञान बनाम गधों का विज्ञान-
विज्ञान का क ख ग नहीं जानने वाले बड़े पद पर आसीन हो जाने से खुद को विज्ञान का जानकार समझने लगते हैं| - -
हमारे देश के दो प्रधान मंत्रियों ने कहा -
#- हम बिना परीक्षण किए परमाणु बम बताएंगे|
#- एक चाय वाला गंदे नाले में पाईप लगाकर नाले के गैस का उपयोग इंधन के रूप में करता था| यह सिम्पल टेकनिक है|
(इंधन के लिए यह सस्ता सरल सुलभ तरीका है|)
त्याग
किसी ने राज पाट और पत्नी का त्याग किया सत्य पाने के लिए|
किसी ने पत्नी छोड़ा राजपाट पाने के लिए|
गुरुवार, 19 जुलाई 2018
विश्वास
जो भगवान पर विश्वास करने की बात करते हैं वे मंदिर, घर, मोटर साइकिल. . में अच्छी क्वालिटी का मजबूत ताला लगाते हैं| यह कैसा विश्वास?
गुरुवार, 17 मई 2018
परिवर्तन
समाज और संविधान के नियमों पर डिबेट होना गलत नहीं है| वाद विवाद से सभी पहलु सामने आते हैं तदनुसार सोच विचार कर कालांतर में नियम कानून में संशोधन परिवर्तन होते हैं जो आवश्यक है| परिवर्तन ही गति है| गति ही जीवन है| लकीर के फकीर परिवर्तन की कोई बात चर्चा सुनना भी नहीं चाहते|
रविवार, 13 मई 2018
स्वर्ग में हमारा एकाधिकार
नर्क में गैर हिंदुओं, विदेशियों की भीड़ है| हमारे पाप, भ्रष्टाचार, ..सब से मुक्त करने वाली गंगा माता की कृपा से स्वर्ग में हमारा एकाधिकार है ।
शनिवार, 5 मई 2018
बुधवार, 2 मई 2018
भगवान
बहुत सारे लोग भगवान को जानते मानते हैं| छोटे छोटे बच्चे भी|
कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो जीवन भर जानने की की कोशिश करने के बाद भी नहीं जान पाते|
गुरुवार, 26 अप्रैल 2018
धर्म
यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करें वह धर्म है| जो धारण करने योग्य हो वह धर्म है | धर्म = गुण धर्म|
सनय समय पर विचारकों ने धारण करने के लिए नियम सुझाए| सभी ने अलग अलग सुझाया| सबका सुझाव परस्पर विरोधी है| कई धर्म हैं संसार में| (हिंदू, मुस्लिम, इसाई, .... . ) इस परस्पर विरोधी धर्मों को समझकर गौतम बुद्ध ने कहा -"अप्प दीपो भव" अपना दीपक स्वयं बनो| अपना रास्ता स्वयं चुनो|
*********
एक सर्वमान्य धर्म हो सकता है वह मानवता का धर्म|
इसी धर्म का विम्ब है हमारा संविधान| यही हमारा धर्म होना चाहिए|
*********
रविवार, 8 अप्रैल 2018
सकून
सच हो या न हो ..
ईश्वर, आत्मा, पुनर्जन्म की धारणा को मान लेने से मन को शांति मिलती है, एक आशा .. हम फिर जन्म लेंगे| ये मरना और जन्म लेना चलता रहेगा,,,हमारी आत्मा तो कभी मरेगी नहीं|
सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं|
शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018
प्राण प्रतिष्ठा
मंत्रों से किसी पत्थर की मूर्ति पर प्राण प्रतिष्ठा कर जीवित कर सकते हैं लेकिन किसी मृत प्राणी को जीवित नहीं कर सकते|
वे ठगते हैं| हम ठगाते हैं|
सोमवार, 2 अप्रैल 2018
रविवार, 1 अप्रैल 2018
विद्यार्थियों के लिए
जो लकीर के फकीर नहीं बनना चाहते खास कर
युवा वर्ग के लिए_ ****
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लकीर के फकीर चालाक और स्वार्थी लोग नहीं चाहते कि नई पीढ़ी के दिमाग खुले हों|
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जो बिना सोचे समझे दूसरों की हाँ में हाँ मिलाते हैं, लिखी हुई या सुनी हुई बात को बिना विचारे स्वीकार कर लेते हैं वे अपने दिमाग का उपयोग नहीं करते|
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उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ो| इतिहास विज्ञान खूब पढ़ो| पढ़ कर सुन कर सोच विचार करो|
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हर बात पर प्रश्न करो| क्या? क्यों? कैसे?
सबसे महत्वपूर्ण है क्यों???
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जिनके पास कोई तर्क आधार युक्त जबाब नहीं होता वे गाली देने लगते हैं|
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जो इंटेलिजेंट होते हैं वे लकीर के फकीर नहीं हो सकते| वे विद्रोही होते हैं|
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दिमाग खुली रखो| तर्क करो| आधार सहित जबाब दो| जबाब न हो तो गाली मत दो|
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जो डिबेट पसंद नहीं करते वे सच जानना नहीं चाहते या जान बूझकर सच को उजागर होने देना नहीं चाहते |
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