समाज और संविधान के नियमों पर डिबेट होना गलत नहीं है| वाद विवाद से सभी पहलु सामने आते हैं तदनुसार सोच विचार कर कालांतर में नियम कानून में संशोधन परिवर्तन होते हैं जो आवश्यक है| परिवर्तन ही गति है| गति ही जीवन है| लकीर के फकीर परिवर्तन की कोई बात चर्चा सुनना भी नहीं चाहते|
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