शुक्रवार, 3 मार्च 2017

ताक झांक

गुरमोहर ने सैनिक की हत्या का दोषी किसी दुश्मन देश को नहीं माना| युद्ध को दोषी माना| हमारी मानसिकता को| इसमें गलत क्या था कि कुछ तथाकथित राष्ट्रवादी उसके पीछे पड़ गए|
सोशल मिडिया में प्रसारित गुरमोहर के नाम वाली विडिओ नकली भी हो सकती है| यदि नकली है तो बनाने वाले को जेल दाखिल करना चाहिए|
यदि असली है तो -
किसी की निजी जिंदगी में ताक झांक करना गलत है| उसे प्रसार प्रचार करना निश्चित ही घटिया मानसिकता है|
लड़का मस्ती कर सकता है दारू पी सकता है गाना गा सकता है|
कोई लड़की का मस्ती क्यों नहीं कर सकती? उसकी मस्ती पर दूसरों को क्यों तकलीफ है|
****
गुरमोहर के नाम से प्रसारित कार left driving है|

बुधवार, 1 मार्च 2017

सरहदें

सैनिक की हत्या दुश्मन देश का सैनिक या कोई देश नहीं करता, युद्ध करता है|
जाति धर्म देश की सरहदें मानवता के दुश्मन हैं|

विचार का विरोध


जो भी हो जितना भी मतभेद हो हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी के चित्र पर जूता मारना बहुत गलत है|
मतभेद के कारण किसी की हत्या करना भी गलत है|

अपने धर्म को कितना मानते हैं?

नाहिद अख्तर का एक नगमा है_
अल्ला ही अल्लाह किया करो|
दुख न किसी को दिया करो||
***** इसे कितने मुस्लिम मानते हैं?
************
वेद मंत्र है_
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे  सन्तु निरामयाः|
**** इसे कितने हिंदू मानते हैं!

सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

धर्म बनाम संविधान

कोई भी धर्म अच्छा नहीं है| सबमें कमी है लेकिन कोई संशोधन परिवर्तन करना नहीं चाहते स्वार्थी लोग|
यदि ईमानदारी से संशोधन हो तो वह देश का संविधान ही रह जाएगा|

संकीर्णता

संकीर्णता और कट्टरता ईसाइयों की अपेक्षा हिंदुओं  में अधिक, हिंदुओं की अपेक्षा मुसलमानों में अधिक है|
यही आतंकवाद का आधार है|

रविवार, 26 फ़रवरी 2017

संकीर्णता बनाम उदारता


हिंदू मुस्लिम की तरह संकीर्ण सोच वाले नहीं होते इसी लिए वे आतंकवादी भी नहीं होते| इसीलिए चार्वाक ऋषि, जाबाली ऋषि, गौतम बुद्ध, भगत सिंह जैैसे नास्तिक भी हुए हमारे देश में|
हां अब हमारे हिंदुओं में भी कुछ संकीर्णता बढ़ रही है|

सब जानते हैं

घोटाला भ्रष्टाचार किसी एक पार्टी की बपौती नहीं, सबका अधिकार है। क्योंकि भगवान और देवी देवताओं को पटाना सबको आता है|

मुखबीरी

कुछ जलनखोर नेहरू जी को बदनाम करने के लिए उन्हें मुखबीर कहते हैं क्योंकि
चंद्रशेखर आजाद नेहरू से मिले, उसके बाद आजाद को पोलिस ने घेर लिया|
याने की उस दिन जो लोग मिले आजाद जी से  पशु पक्षी भी सबने मुखबीरी की थी|
गधे. .

दामोदर सावरकर का नामकरण

कोई बताएंगे श्री विनायक सावरकर को "वीर सावरकर" क्यों कहते है्?
यह  सम्मानित नाम किसने दिया ?

असहमति का जबाब हत्या? जलनखोरी

[2/26, 07:23] N R  Pradhan: नक्सलवाद का उद्देश्य आर्थिक समानतता लाना है मार पीट, लूट मार, चोरी डकैती हत्या करके| क्या उचित कहा जाए?
[2/26, 07:24] N R  Pradhan: वैचारिक असहमति के कारण किसी की हत्या कदापि उचित नहीं|
[2/26, 07:46] N R  Pradhan: जो वर्ग दल तथातथित राष्ट्र भक्त गांधी के हत्यारे का समर्थन करते हैं वे देश की आजादी के लिए कुछ भी नहीं किए थे|

शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

क्यों!

कोई बताएं_
मंगल पांडे ने एक अंग्रेज पर गोली क्यों चलाई ?
रानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेज सरकार से क्यों लड़ाई की?

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

पढ़ें सोचें समझें

Yogesh Bhoy  ने वाट्सएप ग्रुप विचार मंच में भेजा है_
"""''
ज्वलंत प्रश्न?
मंगल पांडे को फाँसी❓
तात्या टोपे को फाँसी❓
रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेज सेना ने घेर कर मारा❓

एक बात समझ मे नही आती कि भगवान ने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवच-कुण्डंल दिये थे❓
जिसकी वजह से अग्रेंजो ने इन दोनो को फाँसी तो दूर , कभी एक लाठी तक नही मारी...❓
उपर से यह दोनों भारत के बापू और चाचा बन गए और इनकी पीढ़ियाँ आज भी पूरे देश के उपर अपना पेंटेंट समझती है❓
गहराई से सोचिए❓❓❓

🚩अखंड हिन्दू🚩
हिन्दू सेवार्थ कटिबद्ध
---------------------***-----------------------------# क्या मंगल पांडे, रानी लक्ष्मी बाई हमारे देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़े थे ?
# गांधी नेहरू कांग्रेस ने आजादी के लिए अहिंसात्मक आंदोलन किया था| बिना अस्त्र शस्त्र के| उन्हें कानून के अनुसार पोलिस या न्यायालय द्वारा गोली या फांसी नहीं दी जा सकती|
आज भी अहिंसात्मक हड़ताल, रैली, अनशन करने वाले को गोली फांसी नहीं होती|
# ये अखंड हिंदू हि्दू सेवार्थ वालों को क्यों जलन हो रही है गांधी नेहरू से? इस दल के पूर्वज आजादी के लिए क्या क्या किए थे? यह भी बताना चाहिए| क्या किसी भी तरह वे अंग्रेजों से लड़े थे? वे डरते थे तो कम से कम हमारे तैंतीस करोड़ देवी देवताओं को प्रार्थना कर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने के लिए भेज देते तो ये अंग्रेज एक पल में खतम हो जाते|
************************"*"****""*""
इतिहास को पढ़ना और समझना चाहिए|. किसी के पोस्ट को बिना सोचे समझे शेअर करना उचित नहीं|
कुछ जलनखोर लोगों को भड़काने अफवाह उड़ाने में लगे हैं सच में कुछ झूठ मिलाकर|
वे जानते हैं कि बार बार कोई बात कहने से कुछ लोग बिना सोचे समझे मान लेते हैं|

बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

नहीं समझा

सज्जन हैं तो दुर्जन भी होंगे|
यह तो समझ में आ गया लेकिन ये नहीं समझा
हरिजन है तो .. .
सत्य नारायण हैं तो..
महा लक्ष्मी हैं तो..
धर्म पत्नी हैं तो. .

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

धर्म पत्नी

Bharat Vitthal ne bheja h whatsapp group me_
धर्म-पिता - मतलब असली पिता नहीं.
धर्म-माता - मतलब असली माता नहीं.
धर्म-पुत्र - मतलब असली पुत्र नहीं.
धर्म-भाई - मतलब असली भाई नहीं.
धर्म-बहन - मतलब असली बहन नहीं.
लेकिन ....
ये जबर्दस्त गलती कैसे हुई.?
धर्म-पत्नी - मतलब असली पत्नी.

पता करो शास्त्रों में कहां गलती हुई...
🤔********
एक पुरानी घटना_
एक शिक्षक ने आवेदन पत्र दिया था जिसमें लिखा था " मेरी धर्म पत्नी के इलाज के लिए"
मैंने पूछा - आपकी धर्म पत्नी के अलावा भी कोई पत्नी है?

मंदिर मस्जिद

अजान नमाज पूजा पाठ यज्ञ हवन से कुछ भी नहीं होता । जो होता है मेहनत से होता है ।
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काश ये खूबसूरत मस्जिद मंदिर हमारे दिलों को भी खूबसूरत बना देते है ।

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

चौदह फरवरी हैरान परेशान है

अफवाह फैलाने में माहिर कुछ झूठे लोग
सोशल मिडिया में लिख रहे हैं कि भगत सिंह को फांसी का आदेश 14 फरवरी 1930 को हुआ था|
सीधे सादे लोग उसे मानकर प्रचारित भी कर रहै हैं|
सच है  07 अक्टूबर 1930 को
भगतसिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को फांसी की सज़ा सुनाई गई।
23 मार्च 1931को उन्हें फांसी दी गई|
******
हमारे देश में महान बलात्कारी आसा राम बापू के परामर्श को मानकर 14 फरवरी को मातृ पितृ दिवस मनाने की कोशिश हो रही है|
********
अब 14 फरवरी को नर्मदा जयंती मनाने की कोशिश शुरू हो गई|
14 फरवरी को वेलेंटाइन डे| कुछ सालों से शहीद भगत सिंह को भिड़ा रहे हैं| कुछ माता पिता को भिड़ा रहे हैं| अब नर्मदा नदी को|
"*********
  चौदह फरवरी हैरान परेशान है|
"""************************

रविवार, 12 फ़रवरी 2017

चार युग

AmartaRam Meghwal Rohina >
आज आप सभी को "युगों" के बारे में बताता हूं :--
1- "सतयुग" = जिस युग में केवल ब्राह्मण ही पढ़-लिख सकता था, इसलिये वह जो बोलता था, वही सत्य समझा जाता था, इसलिये उसे सतयुग कहते हैं ।
2- "द्वापर" = जिस युग में ब्राह्मण के साथ क्षत्रिय भी पढ़ने लगे..यानी दो वर्ण पढ़ने लगे इसलिये उसे द्वापर युग कहने लगे.
3- "त्रेतायुग" = जिस युग में बाह्मण, क्षत्रिय, वैश्य..यानी तीनों वर्ण पढ़ने लगे, इसलिये त्रेतायुग कहने लगे ।
4- "कलयुग" = जिस युग में ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य..के साथ-साथ शूद्र /अछूत भी पढ़ने लगे..इसलिये इसे कलयुग यानी अशुभ/अधर्म/पाप का युग कहने लगे ।
अब आप खुद समझ जाइये.....
कलयुग यानी "कल युग" आपके लिये अच्छा है..... / या सतयुग, द्वापर, त्रेता, अच्छा था..... ?????
आप चिंतन स्वयं करें.... !!!

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

पश्चिमी संस्कृति का डर

विदेशों में हमारी संस्कृति का प्रभाव देखकर बहुत खुश होते हैं हम|
लेकिन विदेशी संस्कृति वेलेंटाइन डे का विरोध कर रहे हैं हम_
कुछ साल से उसी दिन मातृ पितृ दिवस मनाकर |
अफवाह फैलाकर कि शहीद भगत सिंह को उसी दिन फांसी की सजा सुनाई गई थी या फांसी दी गई थी|
गार्डन पार्क में वेलेंटाइन डे मनाने वालों को परेशान कर, अपमानित कर|
********"*
विदेशी संस्कृति से इतनी बुरी है या उससे खतरा है तो रहन सहन, खान पान सबमें वापस जाओ पुराने की ओर| कानून बना दो|
कम्प्युटर मोबाइल टी वी मोटर साइकल... .... सब बंद करो, हां विमान रहने दो क्योंकि वेद पुराण में लिखा है|
श्री राम कृष्ण पेंट शर्ट टाई कोट नहीं पहनते थे|
देवी सरस्वती दुर्गा सलवार सूट ब्लाउज ..  नहीं पहनती थी|
आंग्लभाषाया त्यागेत् संस्कृतं वद|
*****
वैसे विदेशी संस्कृति को सबसे पहले 1925 में RSS राष्ट्रीय स्वयं संघ ने पश्चिमी संस्कृति को अपनाया पेंट शर्ट को गणवेष बनाकर|

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

नामकरण

गांधी जी को किसी सरकारी आदेश से "महात्मा", "राष्ट्र पिता" या "बापू" नहीं कहा जाता| किसी ने कहा लोगों ने कहा|
आसा राम को कुछ लोग "बापू" कहते हैं|
किसी को भी कोई कुछ नाम दे क्या समस्या है? "भगवान" कहो "महात्मा" कहो .. जो चाहो| जो चाहेगा बोलेगा, जो न चाहे नहीं कहेगा|
कोई किसी के नामकरण के लिए सरकाऱ के आदेश या अनुमति की आवश्यकता नहीं होती|

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

जयकारा

कोई लड़ रहा हो या लड़ने जा रहा हो तो उसके शुभचिंतकों के द्वारा  प्रोत्साहित करने के लिए जयकारा लगाया जाता है|
वर्तमान कोई भगवान देवी देवता गुरू लड़ाई नहीं करने वाले हैं इसलिए उनका जयकारा लगाना अनावश्यक है|.,,,_
जय ईशु. जय श्रीराम. जय गुरुदेव...  ???

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

राम राज्य का प्रभाव

मैंने भी राम राज्य का प्रभाव देखा है|_
*********
एक शिक्षक कुछ आदिवासी विद्यार्थियों को छड़ी से पीट रहे थे .. तड़ाक .तड़ाक.  क्यों रे पढ़ के कलेक्टर बनोगे? सड़ाक,, ..खेत में कौन काम करेगा रे . सड़ाक सड़ाक..तड़ाक...

मैंने महान गुरू द्रोणाचार्य को भी देखा है| उन्होंने अपने विषय के प्रायोगिक परीक्षा में एक विद्यार्थी को 50 में 50 दिया, किंतु उसे सैद्धांतिक में 150 में मात्र 02 अंक मिला|
दूसरे विद्यार्थी को प्रायोगिक में कम अंक देने के कारण उस एक विषय में डिक्टिंशन नहीं ला सका, बाकी सभी में D मिला|

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

अवतार


ईश्वरवादियों द्वारा कल्पित युगों में ईश्वर द्वारा लिए गये अवतारों के विषय में विचार करते हैं। चूंकि सतयुग में चारों चरण पुण्य के ही थे इसलिए इस युग में एक भी पापी व्यक्ति नहीं था तो ऐसी स्थिति में इस युग में ईश्वर को एक भी अवतार नहीं लेना चाहिए था। लेकिन हम पंडितों की पोथियों में देखते हैं कि इस युग में ईश्वर ने मत्स्य, कच्छप, सुकर एवं नृसिंह नामक चार अवतार लिए। अब हमारे सामने प्रश्न यह उपस्थित हो जाता है कि जब इस योग में एक भी पापी नहीं हुआ था, तो ईश्वर ने चार अवतार क्यों लिए ? *...... यशवंत जोगी*

विश्वास

कहते हैं पूरा विश्वास से मानो तो सब कुछ हो सकता है|
मानो तो भगवान, न मानो तो पत्थर|
मान लें कि 2+3=7  तो क्या सही हो जाएगा?

बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

शांति पाने के लिए

शांति पाने के लिए _
घर परिवार, ड्युटी duty से भाग जाएं| अवश्य शांति मिलेगी| मंदिर मस्जिद . .कहीं भी या फिर पिकनिक. जंगल. . कहते हैं नशा भी तनाव दूर करता है| या कहीं एकांत में कुछ भी बुदबुदाइए .बोलिए चाहे निरर्थक ही हो ..उडु्ग बुड़ुग अगडम बगडम नमो वमो कुडुम. कर के देखिए| या सब कुछ भूल कर नाचें गाएं भजन हो या कोई फिल्मी कुछ भी|  जोर जोर से हंसें या खूब जोर से चिल्लाएं|
संक्षेप में जीवन से भागें | जब तक भागेंगे तनाव से दूर रहेंगे| शांति मिलेगी|

मंगलवार, 31 जनवरी 2017

स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन

हमारे देश में स्मार्ट सिटी कुछ ही शहरों को क्यों? सब को क्यों नहीं? कुछ शहरों के लिए इतना अधिक? गांवों के लिए कुछ नहीं| क्यों?
स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन कुछ ही शहरों में| विदेशी वाह वाह करेंगे| हमारा अच्छा इमेज बनेगा विदेशों में

सोमवार, 30 जनवरी 2017

भ्रष्टाचार के संरक्षक

भ्रष्टाचार के संरक्षक हमारे भगवान और देवी देवता हैं| उनका मस्का लगाकर, उनके एजेंटो को कुछ देकर हर तरह के अपराध पाप से मुक्त हो सकते हैं|
इसीलिए यह भ्रष्टाचार सर्वब्यापी हो गया है, दिनोदिन बढ़ता जा रहा है|
अन्ना जी जितना चिल्लाएं, अनशन करें; मोदी जी जितने छापे मारें इसका नाश बहुत मुश्किल है| यह तो घर - घर में, जन जन में विद्यमान है|
खूनी गोडसे को माल्यार्पण|
गाँधी जी को माल्यार्पण|
चेहरे पे चेहरा लगा लेते हैं लोग|

मतभेद

मतभेद होना गलत नहीं, मतभेद के लिए कोई हत्या करे वह निश्चित ही बहुत घटिया होगा उस हत्यारे को सही ठहराने वाले आज भी हैं कुछ नीच और जलनखोर

रविवार, 22 जनवरी 2017

धर्म और संविधान

तथाकथित धर्म वेद पुराण कुरान के नियम परंपराओं से हटकर भी  संविधान में कुछ नियम कानून बनाए गए हैं|
तथाकथित धर्मऔर संविधान का एक साथ पूरा पूरा पालन संभव ही नहीं हैं|
इसलिए हमारा संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए|

वेद और नामकरण

गांधी जी को महात्मा, राष्ट्र पिता; नेहरू को चाचा, सरोजनी नायडू को भारत कोकिला, सुभाष चंद्र बोस को नेता जी..    ...  ये सब नामकरण सरकार द्वारा नहीं किया गया है| लोग अपनी मर्जी से इस तरह का उपनाम जोड़ देते हैं| अगर किसी को इन नामों से आपत्ति जलन हो तो वे उपयोग न करें| साहित्यकार अपना उप नाम वेद से पूछकर नहीं स्वयं अपनी मर्जी से रखते हैं|
किसी का नामकरण वेद से पूछकर नहीं होता| हमारे देश का नामकरण भी नहीं| कौन कौन सा काम वेद अनुसार हो रहा है? देश की आजादी की लड़ाई वेद के अनुसार नहीं होने के कारण वेद के जानकारों ने उस लड़ाई में भाग नहीं लिए क्या? यह लोकतंत्र, चुनाव, शुद्रों के लिए स्कूल, ब्राह्मणों का नौकरी करना, छूआ छूत न मानना, .... यह सब वेद अनुसार हो रहा है क्या?
वेद को जो देखे भी नहीं वे गांधी को राष्ट्र पिता कहने से वेद का हवाला देकर आपत्ति कर रहे हैं|
बौद्ध, जैनी, आर्य समाजी, पं श्री राम शर्मा  गायत्री शक्ति पीठ के अवुयायी.... क्या वेद को मानते हैं?
हम वेद को माने या नहीं यह हमारी मर्जी है| वेद को मानने के लिए हमारे संविधान में कोई कानून नियम नहीं बनाया गया है| हम हमारे संविधान को मानेंगे|
हमारा संविधान ही हमारा धर्म है|

रविवार, 15 जनवरी 2017

शनिवार, 14 जनवरी 2017

अंध भक्त दूर हों

जो अपनी बात सार्वजनिक मंच, सोशल मिडिया, प्रिंट मिडिया में कहने का साहस नहीं करते,  केवल वाट्सएप ग्रुप के किसी मंच में कहते हैं  वे निश्चित ही घटिया मानसिकता के हैं| ऐसे ही जलनखोर लोग कान कान में झूठ अफवाह फैलाने में माहिर होते हैं| ऐसा वे अपनी मूर्खता जलनखोरी और अंधभक्ति के कारण करते हैं|
ऐसे भक्त मुझसे दूर हो जांय, मेरे  वाट्सएप ग्रुप "विचार मंच" मंच में भी न रहें|

मंगलवार, 10 जनवरी 2017

बड़ा दिमाग

दर असल ब्राह्मणों का दिमाग अपेक्षाकृत बड़ा होता है| पुराने जमाने में वे दूसरों को अध्ययन से वंचित रखने की कोशिश किए अपने हित में| उनके बताए मार्ग का लोग आंख बंद कर पालन करने लगे| आम जन के लिए स्कूल खोले गए अंग्रेज शासन काल में| लोगों के बंद दिमाग खुलने लगे| सोच विचार करने लगे| ब्राह्मणवाद का विरोध भी शुरू हो गया| लेकिन इसे ब्राह्मण परिवार में जन्मे लोगों का विरोध नहीं समझना चाहिए| क्योंकि आज वे हर तरह के कार्य कर रहे हैं मंत्री प्रशासक अधिकारी सैनिक अध्यापक व्यवसायी डॉक्टर इंजिनियर चपरासी.

गाली

Bramahan ....  ko... gali..dena ..
..fashion  ho...gaya
hay....
**********
ब्राह्मणवाद की आलोचना होती है, ब्राह्मण परिवार में पैदा होने वालों की नहीं|
यह कोई फैशन नहीं, लोगों के खुले दिमाग का परिणाम है|

रविवार, 8 जनवरी 2017

दिमाग

दिमाग हर व्यक्ति के पास होता है| लेकिन फर्क यह होता है कि कौन कितना उपयोग करता है|

भावना को ठेस

वैज्ञानिक सोच  के विरुद्ध कोई बात कहने से हमारी विज्ञान सम्मत भावना को ठेस पहुंचती है| सरकार, न्यायालय को हमारी भी चिंता करनी चाहिए|

बुधवार, 4 जनवरी 2017

अंतर

हिंदी साहित्य में रुचि रखने वालों से एक प्रश्न-
राजेंद्र यादव तथा राजेंद्र अवस्थी में गुण धर्म आधार पर अंतर बताइए|

बुधवार, 28 दिसंबर 2016

धार्मिक कट्टरता

हिंदू धर्म के मुताबिक_
सति प्रथा सही. विधवा विवाह गलत. शुद्र का अध्ययन अध्यापन करना, सैनिक, अधिकारी बनना गलत|
मुस्लिम धर्म के मुताबिक_
ब्याज लेना गलत| बुरका में रहना जरूरी|
    ********
कट्टर भक्तों को चाहिए कि अपने धर्म के पुरानी परंपराओं नियमों को लागू कर,ें लागू कराने की कोशिश करें|

निवेदन


किसी भी धर्म के कट्टर भक्तों से निवेदन है कि वे मुझसे दूर रहें|

संस्कृति रक्षा

​हा हा हा.. संस्कृति रक्षा के ठेकेदार पता नहीं और क्या क्या शुरू करेंगे|

वेलेंटाइन दिवस 14 फरवरी को मातृ पितृ दिवस|

क्रिसमस 25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस|

दिब्यांग

साधु संतों को दिब्यांग कहना सही है या गलत? कृपया कारण सहित बताएं|

राज्य

तर्क आधार सहित अपना विचार व्यक्त करें| श्रीराम, श्रीकृष्ण, .. . किसके राज्य में प्रजा अधिक सुखी थी?

मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

दिब्येन्द्रीय

कहते हैं पहले के ऋषि मुनी साधु संतों के कर्मेन्द्रीय ज्ञानेन्द्रीय सभी अंग दिब्य होते थे, अलौकिक अद्भुत क्षमतावान होते थे| क्या आज कोई दिब्येन्द्रीय/दिब्यांग हैं?

रविवार, 25 दिसंबर 2016

बुराई से डर

बुराई से डर कर भागना ठीक नहीं उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए|
ब्याप्त बुराइयों के कारण जाति समाज देश  दुनियाँ या धर्म को छोड़ने का निर्णय उचित नहीं है|

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

धोखा

धोखा-  -
किसी ने मेरे एक मित्र डॉ एस एस गुप्ता जी को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा| बताया " कार्यक्रम शिक्षा से संबंधित है| शिक्षा में रुचि रखने वाले आप लोगों को अवश्य जाना चाहिए|
मित्र के कहने से मैं निर्धारित तिथि को रायगढ़ के रेड क्वीन में समय पर उपस्थित हो गया| कई युवक युनिफार्म में आगंतुकों का स्वागत कर रहे थे|मेरे मित्र को मेसेज किया कि मैं पहुँच गया हूँ| हाल के अंदर मुझे बैठाया गया|   
     कुछ देर बाद घोषणा हुई - हमारी कंपनी आपके फायदे के लिए आपके शहर में काम शुरू करने जा रही है|  आप सब को कंपनी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए पधार रहे हैं मिस्टर अबस | आप लोग उनके स्वागत में खड़े हो जाएं, जोरदार तालियां बजाइए| सब खड़े होकर ताली बजाने लगे|
      मुझे अजीब लग रहा था| मैं क्यों खड़ा होता| क्यों स्वागत करता| मैं खड़ा नहीं हुआ, चुपचाप बैठा रहा|
    खैर वे मंचासीन हुए| उन्हें तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बड़ा सा फूल माला पहनाया गया|
       माइक लेकर मिस्टर अबस ने कहा-
आप सबका मैं अभिनंदन करता हूँ| मैं जानता हूँ आपका शहर उर्जावान है| रायगढ़ के युवा बहुत उर्जावान हैं|
पीछे से तालियों की गड़गड़ाहट|
है कि नहीं?
पीछे से आवाज - हाँ हम उर्जावान है्ं|
वे दोनो हाथ उपर नीचे 180,  90,  45 अंश में घुमा रहे थे| मुझे हमारे देश के एक बड़े नेता के भाषण देने की स्टाइल याद आ रही थी|
पीछे से तालियों की गड़गड़ाहट|
है कि नहीं! बोलिये|
पीछे से आवाज- हां हैं|
       मैं यह भी जानता हूं कि आप सब कुछ करना चाहते हैं| बड़ा आदमी बनना चाहते हैं| है कि नहीं?
पीछे से आवाज - हाँ हम बड़ा बनना चाहते हैं|
      तो हम आपको बहुत धनी बनाना चाहते हैं| बोलिए बनना चाहते हैं?
पीछे से आवाज- हां हम धनी बनना चाहते हैं|
मैं परेशान हो रहा था| कहां फँस गया|  मुड़कर देखा पूरा हाल भरा था| पीछे कुछ लोग युनिफार्म में खड़े थे जो बीच बीच में  में ताली बजा रहे थे | उत्साहित करने के लिए समवेत स्वर में जी हां जी हां बोल रहे थे|
अब मैं झेल नहीं सका| हेलमेट उठाया, बाहर चला आया| पीछे बैठे थे मेरेे मित्र | वे भी मेरे पीछे पीछे बाहर आ गए|
   किसी कहने से  पहली बार मेरा समय बरबाद हुआ| बहुत अखर रहा था|
     हमारे गाँव लोइंग के रविवारीय स्वाध्याय केंद्र का समय हो रहा था जहां हम सेवा निवृत शिक्षक कर्मचारी निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाते हैं प्राथमिक माध्यमिक विद्यार्थियों को| हम दोनो मित्र बिना चाय नास्ता किए सीधे लोइंग पहुँचे स्वाध्याय केंद्र में|

गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

युवाओं से उम्मीद

अपने विऱोधी विचार को भी सुनना पढ़ना चाहिए| सोच समझकर तर्क आधार युक्त अपनी राय देनी चाहिए|
लेकिन ऐसा लकीर के फकीर नहीं कर सकते| वे तो सुनेंगे ही नहीं| क्योंकि वे महा ज्ञानी होते हैं|
युवा वर्ग से उम्मीद की जाती है क्योंकि वे जिज्ञासु होते हैं सब कुछ जानना चाहते हैं|

Following

किसी के सम्पूर्ण गुण धर्म का follow करना संभव नहीं है| एक या एकाधिक गुण का follow कर हम उनके Follower हो सकते हैं| मैं गांधी, नेहरू, इंदिरा, अटल, मोदी जी ...... का follower हूँ|
लेकिन मैं किसी का भक्त नहीं हूँ|

पीने का पानी

सहमत नहीं तो कारण सहित विस्तार से समझाइए| पीने पानी स्वच्छ हो, शुद्ध हो, पवित्र हो?

बुधवार, 14 दिसंबर 2016

Universal?

भगवान ईश्वर अल्लाह खुदा गॉड देवी देवता भूत प्रेत सब सार्वभौनिक universal क्यों नहीं होते?

मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

ताला और आस्था

आस्तिकों की आस्था संदिग्ध| ईश्वर की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता तो ताला ही क्यों लगाते हैं?

प्रभु इच्छा

कहते हैं धर्म भक्ति आस्था की कमी के कारण समाज का पतन हो रहा है|
यह प्रभु की इच्छा से ही हो रहा होगा फिर क्या चिंता?

रविवार, 11 दिसंबर 2016

फांसी गोली

रैली आंदोलन करने वालों को किसी कानून में फांसी नहीं हो सकती| बाबा रामदेव, अन्ना, केजरीवाल को सरकार का विरोध करने से फांसी होगी क्या? फिर आजादी के आंदोलन के लिए गांधी नेहरू या अन्य कांग्रेसियों को फांसी गोली क्यों मिलती?

शनिवार, 10 दिसंबर 2016

भक्ति और श्रद्धा

यज्ञ हवन पूजा पाठ में भक्ति होती है, स्वार्थ होता है, कुछ मांग होती है भगवान देवी देवताओं से| महात्मा गांधी की समाधि पर कोई श्रद्धा सुमन अर्पित करे, प्रणाम करे तो वह स्वार्थ नहीं, कोई मांग नहीं केवल श्रद्धा होती है|
भक्ति ओर श्रद्धा में बहुत अंतर है|

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

आस्तिक का अर्थ

कहा जाता है कि जो वेद को नहीं मानता वह नास्तिक है|
लेकिन मेरे विचार से .. सः अस्ति याने भगवान है ऐसा मानने वाला आस्तिक है| सः न अस्ति = सः नास्ति याने भगवान नहीं है ऐसा मानने वाला नास्तिक है|

आस्तिक नास्तिक

प्रचलित धर्मों का विरोध करता हूँ या पूजा पाठ नहीं करता| इसका मतलब यह नहीं कि मैं नास्तिक हूँ|
      मैं भगवान को जानता समझता नहीं, इसलिए फिलहाल आस्तिक नहीं हूँ| जिस दिन मैं जान गया वह है, तो आधा अधूरा नहीं शत प्रतिशत आस्तिक हो जाऊंगा|

धर्म और संविधान

        अपने अपने संविधान और अपने धर्म की आलोचना कर आवश्यक सुधार करना चाहिए| दूसरे की  आलोचना आवश्यक नहीं|
        देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवर्तन होना चाहिए| यदि धर्मों में भी संशोधन होते रहें तो अंत में वह होगा हमारे देश का संविधान|

गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

प्यार

कब तक शव ममियों का मस्का लगाते टाईम पास करें|
इतनी बड़ी दुनियां इतने सारे लोग आओ सबसे प्यार करें|

एकमत

कहते हैं उपर वाले की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता| तो ये उपर में रहने वाले अल्लाह भगवान.. सभी किसी पत्तीको हिलाते समय एकमत होते हैं?

मोदी जी

ब्रह्मचारी जी शक्तिशाली हैं, उत्साही हैं| कुछ नया करने की इच्छा बलवती है| भारत स्वछता अभियान. शौचालय निर्माण, अब नोटबंदी| आगे आगे देखिए होता क्या है|

अलग अलग भगवान

अगर भगवान अल्लाह सब एक ही हैं तो उनके बताए रास्ते भी एक ही होना चाहिए| हिंदू मुस्लिम सब अलग अलग क्यों?

बुधवार, 7 दिसंबर 2016

विरोध

मैं मोदी का जी विरोध करूं तो कांग्रेसी न समझें, कल उनका भी विरोध करूंगा| अम्बेडकर जी की प्रशंसा करता हूं लेकिन बाबावादी या जय भीम वाला नहीं हूँ|

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

दिमाग का उपयोग

आम तौर पर युवा वर्ग लकीर के फकीर नहीं होते| कुछ ही होते हैं जो बिना सोच विचार किए मान लेते हैं| वे अपने दिमाग का कम उपयोग करते हैं|