Narendra Vikram
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 29 अगस्त 2017
धार्मिक अंधविश्वास
Rattan Lal Gottra
किसी भी तरह का अंधविश्वास , किसी भी तरह का भगवान के नाम का लालच या डर , हरदम गर्त में लेकर जाता है।
जो लोग राम रहीम की हरकतों को देख कर आंखें मूंदे हुए है और अंधविश्वास से प्रेरित पुरानी ओर नई प्रथाओं को सपोर्ट कर रहे है, कोई इस वजह से प्रथाओं का वहन कर रहा है कि उनके पूर्वज सालो से मानते आ रहे है, वो निश्चित ही मानसिक गुलाम है।
मनुष्य हर पीढ़ी में नया बदलाव लाता है, उसमे दिमाग का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो बदलते वक्त, विचारो को ग्रहण करके ही सम्भव है।।
कोई भी धार्मिक, अंधविश्वास से भरी मान्यता केवल डर और लालच पैदा कर सकती है।किसी तरह का आत्मविश्वास नही।।
हमारा लक्ष्य उच्च शिक्षा होनी चाहिए जो हमे ये निर्धारित करने में सहायक हो कि क्या सही है या गलत।।
अगर हमने पुरानी, outdated प्रथाओं को नही छोड़ा तो राम रहीम जैसे कितने बाबा,पण्डे,पुजारी हमारे घरों में हवन,पूजा,शादी, ब्याह के नाम पर घर मे घुसेंगे और हमारी माताओ, बहनो,बेटियो के साथ मुँह काला करेंगे।
अभी वक़्त है खुद को समाज को सक्षम बनाने का, जुड़ने का ओर लोगो को जोड़ने का।
सोमवार, 28 अगस्त 2017
अज्ञानता से मानसिक गुलामी
Suresh Katariya
अज्ञानता से भय पैदा होता है, भय से अन्धविश्वाश पैदा होता है, अंध विश्वास से अंधभक्ति पैदा होती है।अंधभक्ति से मनुष्य का विवेक शून्य हो जाता है और जिसका विवेक शून्य हो जाता है वह इंसान तर्क नही कर सकता, तर्क सुन भी नहीं सकता और फिर यहीं से शुरू होती है मानसिक गुलामी और बाबाओं का खेल।
भारत में करोड़ो लोग इस समस्या से पीड़ित हैं.
#रेशनलिस्ट
बाबा राम रहीम का वकील
कोई बताएगा बलात्कारी डेरा सच्चा बाबा राम रहीम का वकील कोर्ट में क्या दलील दिया? किस आधार पर अपील करेगा? वहां क्या तर्क देगा?
रविवार, 27 अगस्त 2017
पाखंड का विरोध
Ashish Kumar Bairwa
मेरा उद्देश्य किसी सम्प्रदाय, धर्म विशेष एवं व्यक्तिगत रूप से किसी की भावनाओ को ठेस पहूचाना नही है अपितु मेरा उद्देश्य पाखण्डवाद को भगाकर लोगो मे वैज्ञानिक सोच विकसित करना है।
मन की बात
मन की बात रेडियो में क्यों? रेडियो को बचाने की चिंता है ?
सरकारी कोशिश से मन की बात सुनने का का क्या औचित्य है?
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आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं ।?
यह मोदी जी के मन की बात है?
हमारे प्रधान मंत्री जी के विचार नहीं हैं?
क्या मन की बात सार्वजनिक मंच पर व्यक्त करने से प्रधान मंत्री पद, भाजपा या आर एस एस रोक रहे हैं?
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किसी पद पर या संगठन/संस्था से जुड़े हों तो मन की बात सार्वजनिक रूप से व्यक्त नहीं करते लेकिन मन की बात अपने निकटतम मित्र से कहते हैं ।
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मन में विभिन्न विचार आते हैं । कुछ विचार सार्वजनिक करते हैं सब नहीं ।
लोग क्या कहेंगे
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संतोषी माता का जन्म
संतोषी माता का जन्म पोस्ट कार्ड के जरिये हुआ था| यह देवी हमारे तैंतीस करोड देवी देवताओं के अलावा है|
स्वर्ग में टिफिन सेवा
Vineet Upadhyay
स्वर्ग में कोई टिफिन सेवा अभी चालू नहीं हुई है इसलिए धरती पर ही मां बाप की सेवा वास्तविक श्राद्ध है।
नास्तिक का मतलब
Rattan Lal Gottra
नास्तिक का मतलब है जिसकी आस्था किसी ईश्वरीय शक्ति में न होकर स्वयं में हो.
नास्तिक व्यक्ति गलत कामों को गलत समझ के नहीं करता, न कि नरक के भय से.
नास्तिक व्यक्ति काल्पनिक स्वर्ग में जगह पाने के लोभ से अच्छा काम नहीं, बल्कि परोपकार के लिए करता है.
नास्तिक स्वतंत्र रूप से अपने दिमाग से सोचता है न कि हजारों साल पहले लिखी किताबों की बकवास को प्रमाण मानता है.
नास्तिक अपने कार्यों की जिम्मेदारी खुद लेता है न कि किसी गुरु, धर्म और भगवान भरोसे रहता है.
नास्तिक आत्मविश्वास के साथ कार्य करता है और ईश्वर को मन्नत के रूप में रिश्वत पेश नहीं करता.
नास्तिक उस अपराध के लिए ग्लानि में नहीं रहता जोकि उसने किया नहीं और न ही जिस पर उसका कोई वश था.
नास्तिक इस लोक में खुशहाली और परलोक में स्वर्ग दिलाने का वादा कर आपसे दक्षिणा नहीं लेता.
नास्तिक किसी को काल्पनिक रहस्यमयी शक्तियों और आकस्मिक दुर्घटनाओं से भयभीत नहीं करता.
नास्तिक अन्धविश्वासी नहीं होता.
नास्तिक मैंने बता दिए अब आस्तिक आप खुद समझ लो
धर्म ही धंधा है
Radheshyam Mahaseth
धर्म ही धंधा है और धर्म ही चंदा भी , अपने विकृत स्वरूपों में | और चंदा एवं धंधा के इस विकृत स्वरूप को जब वोट बैंक के कॉकटेल में डुबोया जाता , तब कभी रामपाल तो कभी राम रहीम सरीखे अवतारी पुरुष का बड़े भाग्य से इस मायावी दुनिया में आगमन होता | ताकि महिला मात्र का कल्याण हो सके | और तब क्या सत्ता और क्या समाज ,क्या लोक और क्या तंत्र ,न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका और खबरपालिका तक सब ऐसे अवतारी पुरुष के सामने कांपते नजर आते है | भरोसा न हो तो हरियाणा के मंत्री जी का बयान सुन लीजिए और इस सच्चाई को भी समझ लीजिए कि पिछले अरसठ वर्षों में अयोध्या मसले पर फैसला आया क्यों नही ,और क्यों सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि दोनों पक्ष आपस में मिल बैठकर मामला सलट ले , यानि बात जब धर्म की आई तो न्यायपालिका तक के हाथ -पाँव कापने लगे | इधर हरियाणा के मंत्री महोदय कह रहे कि पंचकुला और आसपास के इलाकों में धारा 144 बाबा राम रहीम के अनुयायियों के लिए नही है | तो मंत्री जी से पूछा जाना चाहिए कि फिर यह धारा किसके स्वागत में है मंत्री साहब ? कानून व्यवस्था पर संकट का खतरा किससे मंडरा रहा है ? आने -जाने वाले राहगीरों से ? खेलने -कूदने वाले मासूमों से ? या फिर तीन तलाक वाली महिलाओं से ? घर में बैठ आपको भले सबकुछ तमाशा -नौटंकी लग रहा हो , मगर मंत्री जी से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जी तक की साँसे अटकी हुई है | पसीने छुट रहे है | याद नही है आपको , हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान अमित साह ने अपने चौवालीस विधायक उम्मीदवारों के साथ जाकर राम रहीम के दरबार में माथा टेका था , 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर आगे दिल्ली और हाल के पंजाब विधानसभा चुनाव में भी राम रहीम ने भाजपा को वोट देने की अपील अपने भक्तों से की थी | तो खट्टर साहब को अपनी हैसियत का अंदाजा बखूबी है | मोदी और साह को अच्छे से पता है कि राम रहीम के नाम पर तांडव मचाने वाली यही महिला उनके सत्ता की सीढ़ी है | राम रहीम के यौन शोषणकारी चरित्र की चर्चा 2002 में उस वक्त भी हुई थी जब केंद्र में वाजपेयी की सरकार थी | विपक्षी दवाब पर सीबीआई जांच की मांग स्वीकार भी हो गई मगर मामला उसके आगे बढ़ा नही , वाजपेयी ने कदम पीछे खींच लिया | 2013 में जब कांग्रेस के काल में बलात्कारी आसाराम की गिरफ्तारी हुई तब उमा भारती ने कहा कि यह हिन्दू आस्था पर हमला है , और याद कीजिए यह वही उमा भारती है जिसने बाबरी मस्जिद के मीनार पर चढकर उत्पातियों को उकसाते हुए नारा दिया था - तेल लगा के डाबर का ,नाम मिटा दो बाबर का | " रामलला हम आएँगे ,मंदिर वही बनाएँगे " नब्बे के दशक में जब वाजपेयी द्वारा गढे इस नारे को आडवानी ने सियासी फिजा में उछाला तो वह अनायास नही था | यह और बात है कि राज्य से लेकर केंद्र तक सत्ता मिलने के बावजूद आज तक मंदिर बन नही पाया | इसलिए आए दिन देश के अलग -अलग हिस्से में जो तरह -तरह के बाबा अपना जौहर दिखाते नजर आते है , वह सब ऐसे ही खलिया नही है , सब के सब राजनेताओं द्वारा पालित -पोषित और संरक्षित है | अंग्रेजों ने धर्म के राजनैतिक इस्तेमाल की जो तकनीक विकसित की , भारत के राजनेता उसकी गंभीरता को खूब समझते है | जिस मुल्क में बड़े -बड़े डिग्रीधारी तथाकथित रूप से शिक्षित डाक्टर ,इंजीनियर और कलक्टर पत्थर के लिंग पर दूध डालता नजर आए , धर्म का सियासी इस्तेमाल ऐसे जड़ -संकीर्ण ,रूढ़िवादी ,पिछड़े समाज में न हो सके तो फिर धर्म के होने पर भी तो लानत है |
राधा कृष्ण
Veeru Ji
राधे कृष्ण की रट लगाने वालो
अगर तुम्हारी बेटी राधा की तरह किसी से प्रेम करने लगे,,तो प्रेमी लड़के को कृष्ण की तरह सम्मान दोगे या मारकूट कर दोगे?
न्यायालय हमारी संस्कृति को बदनाम कर रही है?
Radheshyam Mahaseth
और इन सबके बीच भाजपा सांसद साक्षी महाराज के मीठे बोल | पढ़ लीजिए ,सुन लीजिए | दिल को शान्ति मिलेगी , सुकून होगा | जनतंत्र में आस्था बढ़ेगी | साक्षी महाराज ने कहा " न्यायपालिका को उसकी औकात में रहनी चाहिए , न्यायलय हमारी संस्कृति को बदनाम कर रही है , बाबा राम रहीम के है लाखों अनुयायी है , अपने फैसले पर विचार करे न्यायपालिका | " ठीक यही बात 2013 में उस वक्त उमा भारती बोली थी जब आसाराम को गिरफ्तार किया गया था | " तो क्या माना जाए , बलात्कार ही है हिन्दुस्तान की संस्कृति ? बलात्कारियों को बचाना ही हिन्दू धर्म है ?और बलात्कार के इस संस्कृति के खिलाफ फैसला देने अक्धिकार किसी में नही ? आरएसएस जिस संस्कृति की बात करता है ,क्या उसकी सच्चाई यही है ? और फिर सही -गलत का फैसला जब समर्थकों की संख्या देखकर ही होगी ,तब तो देश के सभी भ्रष्ट नेताओं के पास करोड़ों समर्थक है ? फिर तो वे सभी निर्दोष हुए | आपको बताते चले कि साक्षी महाराज खुद भी हिन्दू धर्म गुरु है | भगवा चोला धारण करते है | इनके ऊपर भी न्यायालय में बलात्कार और हत्या के दो मामले दर्ज है | क्या साक्षी महाराज को अपना काला भविष्य नजदीक आता दिख रहा है ? लेकिन सवाल साक्षी महाराज या किसी भोगी नाथ जैसों तक की नही है | चिंताजनक स्थिति तो यही है कि जब क़ानून बनाने वाली संसद में बलात्कारी बाबाओं को बैठने और बोलने का मौका मिलने लगे तो जाहिर है कार्यवाही बलात्कारियों के खिलाफ नही बल्कि बलात्कार पीड़ितों के ही खिलाफ होगी | आवाज इंसाफ के लिए नही बल्कि जुल्मियों के पक्ष में ही बुलंद होगी | और तब महिला सुरक्षा और समृद्धि की बात ,नेताओं के जुबान से मजाक नही तो क्या समझा जाए ? याद रहे उसी हरियाणा में पीएम मोदी ने बेटी बचाओ का नारा भी दिया था ,यूपी चुनाव के दौरान जोर -शोर से महिला सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया था | तो क्या अब मोदी अपने इस बेशर्म सांसद के खिलाफ कार्यवाही करेंगे ? उन दो महिलाओं के दर्द को समझेंगे जिसने ऐसे ताकतवर राम -रहीम के खिलाफ पिछले पन्द्रह सालों से लड़ाई लड़ रही , जिस राम -रहीम के चरणों में अमित साह शीश झुकाते है ,मनोहर लाला खट्टर नतमस्तक होते है ,भाजपा सहित तमाम दलों के नेता जिसकी आरती उतारते है ? क्या किसी नेता ने उन दो महिलाओं के पक्ष में बयान दिया ,उसके घर जाकर हौसला अफजाई की ? आप सोच लीजिए उन महिलाओं के ऊपर इन पन्द्रह सालों में कैसे -कैसे जुल्म हुए होंगे ? कितनी धमकियां मिली होंगी ? कितना सताया गया होगा ? मगर सलाम करिए उन दोनों महिलाओं को जिसने अपनी जिद्द और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की जूनून की बदौलत इस बलात्कारी बाबा को सलाखों में पहुंचा दिया ,जिस बाबा के समर्थन में आपके सांसद खुलकर बयान दे रहे है |और तब एक सवाल यह भी कि धर्म माना किसे जाए ?
इन बाबाओं के पाखण्ड और कर्मकांडों को , या फिर महात्मा गांधी के उस शब्द को जिसमे उन्होंने कहा कि " सत्य ही इश्वर है ,सेवा ही धर्म है " ,विवेकानंद के उन विचारों को जब उन्होंने कहा " मानव सेवा ,दीन -दुखियों की सहायता ही धर्म है " | वाकई अगर धर्म और धर्म गुरु के मायने आपके लिए वही रह गए है जो साक्षी महाराज ,राम -रहीम ,रामपाल ,आदित्यनाथ और आसाराम जैसे पाखंडियों के बोल है तब फिर दुनिया थूकेगी आपके इस धर्म और संस्कृति पर | दुनिया में कही मुंह दिखाने के लायक नही रहेंगे आप | और तब यूरोपीयन आपको असभ्य ,अशिक्षित ,गंवार नही तो क्या तार्किक ,बौद्धिक और विवेकशील समझेगा |
आस्था बनाम तर्क
Suresh Soni
आस्था को मैं इसलिए सही नहीं मानता क्योंकि इससे सच को पहचानने की क्षमता नहीं रह जाती ! मैं तार्किकता को महत्व देता हूं |
बाबा राम रहीम का सच
Ruba Ansari -
#एनडीटीवी के प्राइम टाइम शो में स्वराज इंडिया पार्टी के प्रमुख योगेंद्र यादव ने बताया कि रेप पीड़िता साध्वी की इस गुमनाम चिट्ठी को पंचकूला के स्थानीय सांध्य दैनिक अखबार 'पूरा सच' में अक्षरश: प्रकाशित किया गया था. आरोप है कि इसके बाद राम रहीम के इशारे पर 'पूरा सच' अखबार के संपादक रामचन्द्र छत्रपति के घर में घुसकर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था. उसी चिट्ठी के आधार पर राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने रेपिस्ट करार दिया है. कोर्ट की ओर से गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद साध्वी की उसी गुमनाम चिट्ठी को दैनिक जागरण ने प्रकाशित किया है, आप पढ़िए किन शब्दों में पीड़िता ने बयां किया था दर्द-:
सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत सरकार
विषय : डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें.
श्रीमान जी, यह है कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा, हरियाणा (धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में सेवा कर रही हूं. मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 18-18 घंटे सेवा करती हैं. हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है. साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा योनिक शोषण (बलात्कार) किया जा रहा है. मैं बीए पास लड़की हूं. मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं, जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी.
साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्या साधु गुरुजोत ने रात के 10 बजे मुङो बताया कि आपको पिता जी ने गुफा (महाराज के रहने का स्थान) में बुलाया है. मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी. यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुङो बुलाया है. गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं. हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है. बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है. मैं यह सब देखकर हैरान रह गई. मुझे चक्कर आने लगे. मेरे पांव के नीचे की जमीन खिसक गई. यह क्या हो रहा है. महाराज ऐसे होंगे? ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. महाराज ने टीवी को बंद किया व मुङो साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है. मेरा यह पहला दिन था.
महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं. तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं, क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था. तो अब ये तन-मन हमारा है. मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं.
जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है तो उन्होंने कहा - श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे. फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं, यह कोई नई बात नहीं है. हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं. तुम्हारे घरवाले इस प्रकार से हमारे पर विश्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं. वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते. यह तुमको अच्छे से पता है. हमारी सरकार में बहुत चलती है.
हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं. राजनीतिज्ञ हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे. हम तुम्हारे परिवार के नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे. सभी सदस्यों को अपने सेवादारों (गुडों) से मरवा देंगे. सबूत भी नहीं छोड़ेंगे. यह तुम्हें अच्छी तरह पता है कि हमने गुंडों से पहले भी डेरे के प्रबंधक फकीर चंद को खत्म करवा दिया था जिनका अता-पता तक नहीं है. ना ही कोई सबूत बकाया है. जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे. 1इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन मास में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है.
आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं, उन सबके साथ मुंह काला किया गया है. डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं. जिन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है. इनमें ज्यादातर लड़कियां बीए, एमए, बीएड, एमफिल पास हैं, मगर घरवालों के अंधविश्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं.
हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख न उठाकर देखना, आदमी से 5-10 फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है लेकिन दिखाने में देवी हैं मगर हमारी हालत वेश्याओं जैसी है.
मैंने एक बार अपने परिवारवालों को बताया कि डेरे में सबकुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में होते हुए कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है. तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं.
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति...
अरुण जैन
Shashi Atulkar
जब जब इस धरती पर अधर्म होगा
तब तब इस धरती पर भगवान जन्म लेगे !!
अब आपको समझ आ गया न की इस कलयुग में कोई अधर्म नहीं हो रहा इसलिए भगवान् ने भी रिटायरमेंट ले लिया 😊
आस्था की दुकानदारी
Manish Chouhan
आस्था की दुकानदारी:-
नमस्कार दोस्तो,भरे मन से ही सही आपके लिए आज का दिन शुभ होने की दुआ करता हूं।
रेप जैसे संगीन गुनाह पर एक ढोंगी बाबा को दोषी करार दिया जाता है और पूरे पश्चिमोत्तर भारत में उसके गुंडों का तांडव शुरू हो जाता है। इधर प्रधानमंत्री घोषणा करते हैं कि आस्था के नाम पर किसी की भी गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी (यह जानते हुए भी कि उनकी तो पार्टी ही इसी आस्था नाम की बुनियाद पर टिकी है) तो दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी का मुख्यमंत्री हालात को बेकाबू होने देता है। पार्टी का एक भी नेता इस ढोंगी बाबा की निंदा नहीं करता, बल्कि उसके एक सांसद साक्षी महराज उसके बचाव में यह कहते हुए खड़े हो जाते हैं कि उस पर केवल एक महिला ने आरोप लगाए हैं जबकि लाखों-करोड़ों लोग 'उनके' साथ खड़े हैं। यह वही सोच है, वही संख्या- बल है जिसके सहारे पार्टी निरंतर जनता की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील बनी रहती है।
न्यायालय में बहस पूरी हो जाने के बाद फैसले की तारीख भी तय हो जाती है फिर भी हरियाणा सरकार के दो मंत्री अनिल विज और राम विलास शर्मा 10 अगस्त को सिरसा के डेरे में (या यों कहें कि अड्डे पर) मनाए जा रहे ढोंगी बाबा के जन्मदिन समारोह में भाग लेने जाते हैं और 51 लाख का गिफ्ट चैक दे कर चले आते हैं। आत्मा पर लेषमात्र भी कोई बोझ नहीं। कोर्ट बार बार निर्देश देता है कि भीड़ को इकट्ठा मत होने दें, लेकिन प्रशासन है कि धारा 144 तक नहीं लगाता और कोर्ट में इसे क्लैरीकल भूल बताता है। तारीख, समय और तबाही मचाने वाले लोगों का पता होने के बावजूद हरियाणा सरकार नागरिकों के जान-माल की रक्षा नहीं कर पाती। इसे प्रशासन की काहिली और नाकामी कहें या अनावश्यक दबाव बनाने की सियासी चाल ! फैसला तो आपको करना है ।
बात केवल एक राजनीतिक पार्टी की हो ऐसा भी नहीं है। लगभग सभी पार्टियां इसी सिंड्रोम से ग्रस्त हैं। इस मामले में कांग्रेस,भाजपा और अकाली दल कोई भी अछूता नहीं है। आखिरकार सवाल तो एक करोड़ वोटों के एक साथ झोली आ गिरने की बात है भाई ! कैसे उस व्यक्ति के पांव न छुए जाएं? हमारे प्रधानमंत्री ने भी अगर छू लिए तो कौन सा आसमान टूट पड़ा !
लेकिन इस सब का दुखद पहलू यह है कि मीडिया या किसी भी नेता ने रेप की शिकार दोनों साध्वियों के प्रति सांत्वना का एक शब्द भी कहना मुनासिब नहीं समझा;
मामले को अंजाम तक पहुंचाने वाले सीबीआई जांबाज अफसर डीएसपी डागर की प्रशंसा में दो बोल नहीं बोले और न ही ढोंगी बाबा का पर्दाफाश करने वाले बहादुर पत्रकार राम चंद्र छत्रसाल के साहस और ईमानदारी को याद किया। याद रहे इस पत्रकार को इसकी कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी है। उसे काफी समय तक धमकियां दी गई, फिर भी नहीं माना तो गोली मार कर हत्या कर दी गई । गोली लगने के बावजूद पीजीआई, चंडीगढ़ में ईलाज के लिए दाखिल वह व्यक्ति बीस दिन तक जीवित रहता है और बयान देना चाहता है लेकिन हरियाणा पुलिस उसका बयान तक नहीं लेती।
एक हो तो बात भी की जाए। पूरे देश में कुकरमुत्तों की तरह उग आए और मौजूद ऐसे ही ढोंगियों के आश्रम निरीह जनता की आस्था का ही कारोबार करते हैं। भूल जाइए कि कोई भी आपको इनके मोहपाश से कभी आजाद कर सकता है। नेता लोग तो इन्हें बढ़ावा देकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे रहेंगे ; अपनी मदद तो आपको स्वयं ही करनी होगी।
बाबा राम रहीम क्या देश भक्त हैं
कोई बताएंगे ये बाबा राम रहीम और उनके भक्त भारत माता की जय बोलते थे या नहीं?
शुक्रवार, 25 अगस्त 2017
मंगलवार, 22 अगस्त 2017
उन्हें पता नहीं मजहब क्या है
Neha Thakur > Friends are Friend
शुक्र है परिंदों को नहीं पता
उनका मजहब क्या है �
वरना आसमाँ से भी खून की बारिश ☔ � होती
#नेहाठाकुर��
धर्म कर्म
Suresh Soni
मेरा एक मित्र -
धर्म कर्म में भी तो पैसा लगाया करो , दान दिया करो | मंदिर निर्माण पट्टिका में बहुत लोगों के नाम हैं पर आपका नाम नही है |
मेरा जवाब -
धर्म कर्म में पैसा खर्च करता तो हूं | किसी गरीब बच्चे की फीस भरना , कापी किताब खरीद कर देना , आपके लिए धर्म भले न होगा पर मेरे लिए यही धर्म है |
मंदिर के लिए दान देने वाले बहुतेरे मिल जाएंगे पर गरीबों की समस्या को कौन देखता है ?