मैं पूजा पाठ, अजपाजप, भगवान देवी देवताओं की मुर्तियों के सामने मत्था टेकना उनसे कुछ मांगना सालों से छोड़ दिया । मैं किसी गुरू से कर्ण मंत्र नहीं लिया याने मेरा कोई कान फूंका गुरू नहीं है ।
कभी कभी ध्यान करता हूं ।
मन्दिरों में चढ़ावा नहीं देता जहाँ भगवान देवी देयताओं की मुर्तियाँ होती हैं । सिर्फ़ एक मंदिर में चढ़ावा दिया हूं जहाँ साक्षात् देवी देवता विद्यार्थियों को बहुत कम वेतन में अच्छी शिक्षा देते हैं । वह मंदिर है बटमूल आश्रम महाविद्यालय महापल्ली जिला रायगढ़ ।
मानवता मेरा धर्म है । विद्यार्थियों के हित में कुछ कुछ करता रहता हूं ।
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
बुधवार, 26 जून 2019
मेरा धर्म मानवता
मंगलवार, 25 जून 2019
पढ़े लिखे मुर्ख
हाँ सही कहा, पढ़े लिखे मुर्ख पेड़ पर नहीं फलते। वे लकीर के फ़कीर होते हैं जो विज्ञान का क ख ग भी नहीं जानते । नये विचार को सुनना भी नहीं चाहते ।
ऐसे मुर्ख किसी विचार का तर्क आधार युक्त जबाब नहीं दे सकते, वे दूसरों को मुर्ख कह कर खुश होते हैं ।
तिरस्कार बहिष्कार
मेरे विचार से अन्तर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित करें न करें उनका तिरस्कार बहिष्कार नहीं करना चाहिए ।
सोमवार, 24 जून 2019
साजिश
सालों से नफ़रतों के बीज बो रहे हैं । अब फ़लने फ़ूलने लगे हैं ।
सब सोची समझी साजिश है । हिंदू मुस्लिम लड़ाई दंगा मारकाट.. मुस्लिम दूसरे देश में चले जाएंगे । हमारा देश हिंदुस्थान बन जाएगा ।
रविवार, 23 जून 2019
संविधान का पालन
संविधान का पालन करना चाहिए सब को लेकिन क्या भारत माता की जय और वंदे मातरम बोलना भी जरूरी है सब के लिये? हम तो बोलते हैं लेकिन घटिया नीच संकीर्ण चोर अपराधी गद्दार राष्ट्र द्रोही घूसखोर लोग भी वंदे मातरम और भारत माता की जय कहते हैं ।
शनिवार, 22 जून 2019
अन्तर्जातीय विवाह
मेरे विचार से अन्तर्जातीय विवाह को भले ही प्रोत्साहित न करें लेकिन उनका तिरस्कार बहिष्कार नहीं करना चाहिए ।
*************#
हर जाति में उच्चता का दम्भ भरा है । कहते हैं अन्तरर्जातीय विवाह से खून का मिश्रण हो जाएगा जो उन्हें मंजूर नहीं । अब तक मिश्रण नहीं हुआ है ऐसा कहने का कोई आधार नहीं है । हमारे भारत में अधिकतर जाति के लोग mix colour के हैं याने एक जाति के लोग एक ही रंग रूप के नहीं हैं ।
पौराणिक काल, महाभारत काल में अंतर्जातीय विवाह प्रचलित थे । बाद में जातीय घमंड पनपा है ।
जरूरत पड़ने पर कथित नीची जाति का खून भी लेते हैं । कहते हैं हमारी जाति के संस्कार उच्च हैं । देख रहे हैं सब कहने की बात है । एक ही जाति में अलग अलग संस्कार होते हैं ।
कई बार युवा वर्ग में हत्या आत्म हत्या का कारण भी यह जाति दम्भ ही होता है ।
अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता देने वाले निश्चित ही किसी जाति धर्म से उपर मानवता के पुजारी होते हैं । जाति अहंकार वाले अंतर्जातीय विवाह करने वालों को जाति समाज से बहिष्कृत कर देते हैं ।
विज्ञान अनुसार जिन जातियों में सिकल सेल बीमारी होती है अन्तर्जातीय विवाह से भावी पीढी कम होगी ।
** ***********#
मेरे विचार से अन्तर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित भले न करें लेकिन जो करते हैं उनका तिरस्कार बहिष्कार नहीं करना चाहिए ।
**************#
कृपया coment box में बिना तर्क आधार के असहमति व्यक्त न करें । कोई व्यक्तिगत प्रश्न उपदेश न दें ।
लकीर के फ़कीर तो इस पोस्ट को पढ कर सोच विचार करना पसंद नहीं करेंगे । बाकी युवा विचार वालों में से कुछ लोग क्या कहेंगे सोच कर चाहते हुए भी like नहीं करेंगे ।
बुधवार, 19 जून 2019
कुम्भ
आस्तिक बताते हैं कुम्भ नहाने से पाप धुल जाते हैं !
हम पूछतें हैं इतने पाप करते ही क्यों हो , की कुम्भ जाना पड़े ...!!
सोमवार, 17 जून 2019
कर्मेण्येव अधिकारस्ते..
गीता के श्लोक पर सवाल नहीं लेकिन हमसे भूल हो सकती है ।
*******
गीता के श्लोक को लिखने में हम भूल कर सकते हैं| मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा डी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
कई लोगों से मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ|
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम्
गीता का यह चित्र श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
सोचने की बात है कि गीता में
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए"नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए"
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्नमधर्मस्य) नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य (अभ्युत्थानम् धर्मस्य) कहा गया होगा|
**"*"**"
जो संस्कृत का कखग भी नहीं जानते खुद को महा ज्ञानी समझते हैं |फिर भी बकबक करते हैं इससे अनावश्यक परेशानी होती है । कृपया ऐसे लोग दूर रहें ।
जो संस्कृत के जानकार होते हैं वे ज्यादातर लकीर के फ़कीर होते हैं । कुछ भी नया सुनना भी पसंद नहीं करते ।
हाई स्कूल तक सभी संस्कृत पढ़ते हैं उनसे निवेदन है मेरे संदेह पर गौर करें तथा तर्क आधार सह अपना विचार व्यक्त करें ।
संस्कृति
लकीर के फ़कीर संस्कृति का रोना रोते रहते हैं । वे चाहते हैं पीछे ले जाना । आगे बढ़ना नहीं चाहते, किसी को आगे बढ़ते देखना नहीं चाहते ।
दरअसल हम जैसा जीते हैं वही संस्कृति है । परिवर्तन संशोधन के साथ सतत विकास ही संस्कृति है ।
शनिवार, 15 जून 2019
कर्मेण्येव अधिकारस्ते..
गीता के श्लोक पर सवाल नहीं लेकिन हमसे भूल हो सकती है ।
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गीता के श्लोक को लिखने में हम भूल कर सकते हैं| मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा डी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
कई लोगों से मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ|
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम्
गीता का यह चित्र श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
सोचने की बात है कि गीता में
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए"नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए"
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्नमधर्मस्य) नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य (अभ्युत्थानम् धर्मस्य) कहा गया होगा|
**"*"**"
जो संस्कृत का कखग भी नहीं जानते खुद को महा ज्ञानी समझते हैं |फिर भी बकबक करते हैं इससे अनावश्यक परेशानी होती है । कृपया ऐसे लोग दूर रहें ।
जो संस्कृत के जानकार होते हैं वे ज्यादातर लकीर के फ़कीर होते हैं । कुछ भी नया सुनना भी पसंद नहीं करते ।
हाई स्कूल तक सभी संस्कृत पढ़ते हैं उनसे निवेदन है मेरे संदेह पर गौर करें तथा तर्क आधार सह अपना विचार व्यक्त करें ।
कर्मेण्येव अधिकारस्ते..
गीता के श्लोक पर सवाल नहीं लेकिन हमसे भूल हो सकती है ।
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गीता के श्लोक को लिखने में हम भूल कर सकते हैं| मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा डी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
कई लोगों से मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ|
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम्
गीता का यह चित्र श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
सोचने की बात है कि गीता में
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए"नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए"
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्नमधर्मस्य) नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य (अभ्युत्थानम् धर्मस्य) कहा गया होगा|
**"*"**"
जो संस्कृत का कखग भी नहीं जानते खुद को महा ज्ञानी समझते हैं |फिर भी बकबक करते हैं इससे अनावश्यक परेशानी होती है । कृपया ऐसे लोग दूर रहें ।
जो संस्कृत के जानकार होते हैं वे ज्यादातर लकीर के फ़कीर होते हैं । कुछ भी नया सुनना भी पसंद नहीं करते ।
हाई स्कूल तक सभी संस्कृत पढ़ते हैं उनसे निवेदन है मेरे संदेह पर गौर करें तथा तर्क आधार सह अपना विचार व्यक्त करें ।
मंगलवार, 11 जून 2019
मृतक भोज
मेरे विचार से मृतक भोज के संबंध में किसी जाति समाज द्वारा कोई नियम नहीं बनाना चाहिए । मृतक भोज का बहिष्कार तिरष्कार करना उचित नहीं । जब भी मौका मिला मैं विरोध किया हूं ।
जो मृतक भोज बंद करने की बात करते हैं उन्हें
अपने घर परिवार से पहल करनी चाहिए । स्वयम् अपनी इच्छा लिख कर अपने परिवार तथा समाज के चार - पांच लोगों को दे दें ।
इस संबंध में कोई नियम न बनाएं। कोई भोज दे , न दे । जैसा भोज देना चाहे, मीठा खिलाए जो जो खिलाए अपनी मर्जी ।
मेरा यह विचार पहले भी व्यक्त किया हूं फेसबुक में ।
*******
मेरा यह भी सुझाव है धनी लोगों के लिये -
70-75 साल उम्र के बाद एक उत्सव मनाएं अपने जीने का । अपने परिवार, रिश्तेदार, मित्र्, परिचितों शुभ चिंतकों को आमंत्रित करें ।
मनोकामना पूरी होती है
पहले सुना था देवी देवताओं की मुर्तियों के दर्शन करने से मनोकामना पूरी होती है । अब कहने लगे हैं उनकी मुर्तियों के फोटो सोशल मीडिया में शेअर करने से मनोकामना पूरी होती है । गज़ब ।
गुरुवार, 30 मई 2019
मातृ भाषा का महत्व
छत्तीसगढ़ में ओड़िया भाषी कुछ लोग अपने बच्चों को ओड़िया भाषा से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं|
अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाला आपका बच्चा अपनी मातृ भाषा या राष्ट्र भाषा में ठीक से बात नहीं कर सकता या नहीं समझ सकता तो यह गर्वित होने की नहीं लज्जित होने की बात है|
मंगलवार, 28 मई 2019
अयोध्या में राम मंदिर
अयोध्या में मस्जिद के पास ही राम जी का मंदिर, कोप भवन जानकी रसोई, दरबार.. मुझे याद आ रहे हैं 1981-82 में हम देखे थे । वह सब नहीं हैं क्या?
सोमवार, 27 मई 2019
एक नई पार्टी का गठन हो
कांग्रेस और अन्य सभी दलों को खत्म कर एक नया दल बनाना चाहिए जिसके उद्देश्य हो लोक कल्याण, वैज्ञानिक सोच। पद लोलूप लोगों को न रखें ।
साधु बाबा असामान्य
साधु बाबा लोग असमान्य होते हैं । इन्हें जंगल पहाड़ में रहना चाहिए । आबादी क्षेत्र में निषेध होना चाहिए ।
वोट देने का अधिकार नहीं होना चाहिए ।
गुरुवार, 23 मई 2019
मंगलवार, 21 मई 2019
आर्य और अनार्य
हमारे देश के मूल निवासी ST और OBC हैं ।आर्य बाहर से आये थे । वे मूल निवासियों को अनार्य कहते थे ।
ST को असुर कहते थे और OBC को राक्षस ।
ये मनु के किसी वर्ण में से नहीं हैं ।
कांग्रेस को खत्म कर नया संगठन बनाने का सलाह
गांधी जी के सलाह अनुसार कांग्रेसी "कांग्रेस"को खत्म कर नया संगठन "लोक सेवा दल" बना लेते। तो क्या फ़र्क पड़ता?
सोमवार, 20 मई 2019
कर्म अनुसार वर्ण
कर्म अनुसार वर्ण प्रचलित नहीं है जिस जाति के परिवार में पैदा होता है उसी जाति का माना जाता है कर्म अनुसार वर्ण मान्य होने से कथित शुद्र जाति के परिवार में जन्मे किसी अध्यापक को ब्राह्मण परिवार में जन्मे किसी अध्यापक लड़की के साथ शादी करने में कोई सामाजिक बाधा नहीं होगी । यह बहुत अच्छा होता लेकिन ऐसा होता नहीं है ।
भारत के मूल निवासी राक्षस
भारत के मूल निवासी हैं ST और OBC । ST जंगलों में रहते थे । मैदानी इलाकों में OBC रहते थे जो खेती करते थे । आज कल ST भी खेती करते हैं । भारत के मूल निवासियों को पुराणों में राक्षस कहा गया है ।
ये मनु के चार वर्णों में नहीं आते ।
गुरुवार, 16 मई 2019
समाज सेवा
यह समझ में नहीं आता की साठ बासठ के बाद लोगों को समाज सेवा, भजन कीर्तन, मंदिर मस्जिद, तीर्थ यात्रा, .... की कैसे सूझती है/ यह सब थोडा बहुत पहले से क्यों नहीं होता? कुछ लोग सेवा निवृत्ति पश्चात् पेंट शर्ट छोड़ कर धोती कुरता पहनते हैं, कोई दाढ़ी रखने लगते हैं/ परिवर्तन,,, ..?
एक शिक्षक अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर बोले "मैं अब भागवत शरण में जीवन बिताऊंगा/ पता नहीं वे अब तक किसके शरण में थे?
शुक्रवार, 3 मई 2019
पूजा आरती की जरूरत नहीं है
मेरे विचार से सर्व शक्तिमान कथित ईश्वर या किसी देवी देवता को हमारी सेवा, पूजा, आरती (प्रशंसा गीत/मस्का) या भोग लगाने की जरूरत नहीं है|
बुधवार, 1 मई 2019
श्री कृष्ण जी
श्रीकृष्ण जी उस जमाने के most intelligennt थे| वे 16 कलाओं में पारंगत थे । याने hero. बहुत सारी लड़कियां उनसे प्रेम करती थीं| कृष्ण जी सबसे प्रेम करते थे| he was a great lover.
इसमें आलोचना की कोई गु्ंजाईश नहीं|
कृष्ण की 8 ही पत्नियां थीं यथा- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
उस जमाने में एकाधिक विवाह करने का रिवाज था| क्योंकि बहुत युद्ध होने के कारण पुरूषों की संख्या कम हो जाती थी|
उस समय विवाहेत्तर प्रेम को समाज बुरा नहीं मानता था| प्रेमिका को कभी पत्नी का दर्जा नहीं मिलता | इसलिए श्रीकृष्ण की 16008 पत्नियां थीं कहना गलत है| आठ के अलावा बाकी सब प्रेमिकाएं थीं| कुछ सच में उनसे यमुना किनारे मिलती थी उनके बाँसुरी के धून का आनंद लेती थी, बाकी मन ही मन उनसे प्रेम करती थीं ।
कृष्ण जी के शानदार व्यक्तित्व के कारण बाद में भी मीरा उन्हें पति मानने लगी| आज भी कई लड़कियां खुद को उनकी प्रेमिका/ पत्नी मानकर किसी और से शादी नहीं करतीं|
हमारा धर्म हमारा संविधान
समाज के लिए बनाए गए नियम धर्म कहलाता जिसका धारण (पालन) करना चाहिए| उसमें देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवर्तन होते रहना चाहिए जैसा कि संविधान| जिसमें परिवर्तन नहीं वहां गति नहीं| जिसमें गति नहीं वह जीवंत नहीं मृत हो जाता है|
हमारा संविधान ही हमारा धर्म|
रविवार, 21 अप्रैल 2019
मतभेद
हर कोई किसी न किसी के विरोध में बोलता है ।
मत भेद हो तो गोली हत्या थप्पड़ मारना गाली गलौच करना आतंकवाद है ।
गुरुवार, 18 अप्रैल 2019
वोट और विकास
यदि गोबर विज्ञान का विकास चहते हैं तो मोदी जी को वोट दें अन्यथा नहीं ।
मोदी हार जाते हैं तो मानना पड़ेगा भारत आगे जाना चाहता है पीछे नहीं ।
सोमवार, 15 अप्रैल 2019
एक हजार का नोट
हमारे देश में आश्चर्य!
500, 2000 के नोट चल रहे हैं लेकिन 1000 का क्यों बंद किया गया? 1000 के नये नोट क्यों नहीं ?
कोई तर्क सम्मत कारण है तो कृपया कोई जानकार बताएं ।
या यही मान लें कि मोदी जी की कोई सनक है या यह नोट उनके लिए किसी गोबर वैज्ञानिक ने अशुभ बताया है?
भारत का संविधान हमारा है
हमारे देश के संविधान को अम्बेडकर का संविधान कहना कहाँ तक उचित है?
अगर उनका है तो उस पर सर्वाधिकार उनके उत्तराधिकारियों का होना चाहिए । तब तो उनके उत्तराधिकारियों की अनुमति के बिना उसमें कोई संशोधन परिवर्तन नहीं हो सकता ।
***
यह भारत का संविधान हमारा संविधान है ।
ज्ञातव्य है कि संविधान सभा में 200 सदस्य थे ।
सभा द्वारा गठित drafting comittie का प्रमुख अम्बेडकर जी को मनोनीत किया गया था ।
बेशक उन्होने अपनी पूरी योग्यता का उपयोग कर संविधान निर्माण में बहुत श्रम किया ।
निश्चित ही अम्बेडकर जी महान थे ।
शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019
मैं किसी का भक्त नहीं
मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि
# मैं किसी भी राजनैतिक दल का भक्त नहीं हूं । आज कुछ भाजपा के विरुद्ध कुछ लिख रहा हूं तो कल कांग्रेस के विरुद्ध भी लिख सकता हूँ ।
# एक बात और कांग्रेस ने देश के लिए बहुत किया है इसे मैं कभी नकार नहीं सकता ।
सोमवार, 1 अप्रैल 2019
आस्था पर चोट
धार्मिक आस्था के विरुद्ध कोई लिखता है कहता है तो धार्मिक लोगों की आस्था को चोंट पहुंचती है । ऐसे विचार को कानून अनुसार दंडनीय माना जाता है । facebook में comlaint होने से delete कर देते हैं ।
यह उचित नहीं है । हमारी वैचारिक स्वतंत्रता का हनन है ।
किसी अंधेविश्वासी, झूठ, अवैज्ञानिक लेख विचार से हमारी वैज्ञानिक सोच पर चोंट ठेस पहुंचती है ।
रविवार, 31 मार्च 2019
हम ही भ्रष्ट हैं
sex रैकेट चलाने वाले, गोशाला घपला करने वाले , बैंक का करोड़ों रूपये लेकर विदेश भाग जाने वाले और बलात्कारी बाबा लोग सभी हिंदू हैं ।
याने कि हम भ्रष्ट हैं ।
वे अंधे नहीं
वे अंधे नहीं हैं ।कांग्रेस कार्य काल का विकास देखना नहीं चाहते. जानना नहीं चाहते । उन्हें जो बताया जा रहा है वे बिना सोचे समझे मान लेते हैं ।यही उनकी खासियत होती है ।
वे जानना चाहते तो अपने घर परिवार के बुजूर्गों से पूछ लेते उनके जमाने में क्या स्थिति थी?
शनिवार, 30 मार्च 2019
इलाज
आजादी के बाद से जनसंघ, हिन्दू महासभा, आर एस एस भाजपा वालों की सरकार होती तो किसी इन्जेक्शन टेबलेट की जरूरत ही नहीं होती ।
सारे इलाज मंत्र हवन पूजा पाठ से हो जाते ।
स्कूल में विद्यार्थी बिना समझे रट रहे हैं
मैं सेवा निवृत्ति के बाद अपने क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा लिया हूँ.. मैंने देखा कि विद्यार्थी पाठ को बिना समझे रटते हैं | प्राथमिक तथा पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अधिकतर विद्यार्थी अपनी पाठ् पुस्तक के पाठ को अपनी मातृभाषा (छत्तीसगढ़ी, ओडिया ) में नहीं सुना सकते
हमारे देश में आरक्षण
-हमारे देश में आरक्षण -
*******
संविधान में दलित शोषित जन को मुख्य धारा में जोड़ने. उनके आर्थिक सामाजिक विकास के लिये कुछ साल के लिये आरक्षण का प्रावधान रखा ।
जब देखा गया कि उस वर्ग का पर्याप्त विकास नहीं हुआ है तब आरक्षण की अवधि बढाई . रही ।अब भी यह जारी है । इससे अनारक्षित वर्ग को निश्चित ही नुकसान हो रहा है । वे इस आरक्षण से बहुत चिढ़ते हैं । समय समय पर विरोध करते हैं ।
*******
कहा जाता है कि वोट बैंक के कारण कांग्रेस ने आरक्षण को जारी रखा।
तो फ़िर भाजपा ने पूर्ण बहुमत होते हुए भी क्यों बंद नहीं किया?
******
निश्चित ही इससे प्रतिभा को नुकसान होता है । प्रतिभा का नुकसान याने देश का नुकसान ।
लेकिन प्रतिभा का नुकसान तब भी होता था जब शम्बुक, अम्बेडकर जैसे विद्वान को जाति आधार पर प्रताड़ित किया गया ।
वैसे हमने यह भी देखा है कि अनारक्षित लोग भी देश का बहुत नुकसान करते हैं । -
वे दुश्मन देशों को देश की गोपनीय जानकारी देकर पकड़े जाते हैं ।
वे सर्जन किसी के पेट में सर्जरी के बाद कैंची और रुई छोड़ देते हैं ।
वे गोशाला घोटाले में पकड़े जाते हैं ।
उनके सेक्स रेकेट पकड़े जाते हैं ।
उनके द्वारा बनाए बड़े बड़े पूल भवन गिर जाते हैं ।
वे आय कर विभाग द्वारा आय कर चोरी के मामले में पकड़े जाते हैं ।
वे बड़े बड़े भ्रष्टाचार मामले में पकड़े जाते हैं ।
वे ही बैंकों से करोड़ों रूपये लेकर विदेश भाग जाते हैं ।
. और भी कई....
******
कहा जाता है कि आरक्षण का लाभ आर्थिक सामाजिक रूप से उच्च स्तर के परिवार को भी लाभ मिल रहा है ।
इस पर अवश्य विचार कर उचित निर्णय लेना चाहिए ।
वैसे ही गरीबी रेखा से नीचे का लाभ कुछ धनीमानी लोग भी ले रहे हैं ।
धर्म का अर्थ
यः धारयति सः धर्मः|
जो धारण करने योग्य है, जो धारण करते हैं ,
जो धारण करना चाहिए वह धर्म है|
आत्म दीपो भव_ गौतम बुद्ध
अपना धर्म सोच समझकर स्वयं निश्चित करें कि हमें क्या धारण करना चाहिए|
सोमवार, 25 मार्च 2019
धार्मिक ग्रन्थों की पढ़ाई
हमारे पूरे भारत के सभी स्कूल कालेजों में एक और optional art group होना चाहिए "हमारे धर्म "। ( गीता, रामायण, चारों वेद, सभी पुराण, भागवत कथा, श्री राम कथा....के अलावा बाइबिल, कुरान...... ..सभी धार्मिक ग्रंथ )
मुझे लगता है धार्मिक कट्टर लोग अपने बच्चों को यही संकाय पढ़ने के लिये कहेंगे लेकिन आज के विद्यार्थी निश्चित ही intelligent हैं । वे यह सब पढ़ कर इनकी माञताओं से दूर हो जाएंगे और वैज्ञानिक सोच वाले बन जाएंगे ।
शुक्रवार, 15 मार्च 2019
मन की बात
मोदी जी रेडियो में मन की बात सुनाते हैं ।
बाकी समय जो कहते हैं वह सब किसके मन की बात होती है ?
सत्ता की बागडोर
ये तो बता दो कोई 15 अगस्त 1947 को तिरंगा फ़हराने के लिये मोदी जी, हिन्दू महासभा या आर एस एस के किसी को क्यों नहीं बुलाये? इन्हें सत्ता की बागडोर क्यों नहीं सौंपे?
अनुकरण
हमारी पुरानी परम्पराओं को पकड़ के रखना कोई जरूरी नहीं । जो ठीक लगे, अच्छा लगे मुस्लिम या इसाइयों का अनुसरण अनुकरण करने में क्या बुराई है? लेकिन लकीर के फ़कीर लोगों को कुछ भी नया अच्छा नहीं लगता ।
गुरुवार, 14 मार्च 2019
प्रार्थना
देश में कोई बड़ी दुर्घटना होने से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की हम कामना करते हैं, भगवान से हम प्रार्थना करते हैं ।
अच्छा होता भगवान से प्रार्थना करते कि हमारे देश में कभी कोई दुर्घटना न हो ।
प्रर्थना
देश में कोई बड़ी दुर्घटना होने से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं, भगवान से हम प्रार्थना करते हैं ।
अच्छा होता भगवान से प्रार्थना करते कि हमारे देश में कभी कोई दुर्घटना न हो ।
सोमवार, 11 मार्च 2019
बात बात पर झूठ बोलने वालों से लोग सबूत मांगते हैं । लेकिन एअर स्ट्राइक के बाद फोटो या वीडियो लेना सम्भव नहीं ।
सवाल और प्रमाण
जब संदेहास्पद बात करे कोई तो सवाल करना, सबूत मांगना गलत नहीं है ।
वैसे पुलवामा के बाद पकिस्तान में सेना द्वारा किये air strike का फोटो या video लेना आसान नहीं था जरूरी भी नहीं था ।
लेकिन ध्यान रहे विज्ञान सवाल और प्रमाण पर ही विकसित होता है ।
सवाल करने वाले प्रमाण मांगने वाले मुर्ख नहीं होते. लकीर के फ़कीर नहीं होते ।
बुधवार, 6 मार्च 2019
ज्ञानी
ये गाली गलौच करने वाले, झूठ अफ़वाह फ़ैलाने वाले, नफ़रत के बीज बोते हैं । वे पुस्तकें पत्रिकायें ग्रंथ पढ़ना जरूरी नहीं समझते । लेकिन बहुत ज्ञानी होते हैं ।
सोमवार, 4 मार्च 2019
वे बहुत ताकतवर हैं
वे बहुत ताकतवर हैं
ज्यादा मत बोलो वर्ना
तुम्हारा मुंह बंद कर देंगे
फिर माफ़ी मांगोगे या
अपनी बात वापस लोगे
तब ओंठों के टाँके खोलेंगे
वे बहुत ताकतवर हैं
ज्यादा मत लिखो वर्ना..