गुरुवार, 18 मई 2017

कश्मीर समस्या


ਧਰਮਿੰਦਰ ਗੂਗਲ

नबील अहमद की अहमियत:
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जब हम कश्मीर के बारे में सोचते हैं, तो आतंकवाद के बारे में सोचते हैं, उन नौजवानों के बारे में सोचते हैं, जो हाथों में पत्थर लेकर उन्हें सुरक्षा बलों पर फेंकते हैं। लेकिन आतंकवाद और पत्थर फेंकते नौजवान कश्मीर का अधूरा सच हैं। कश्मीर का इससे बड़ा सच वह है, जो अक्सर खबरों की सनसनी के बीच अपने लिए जगह नहीं बना पाता। अचानक किसी घटना के बाद हम ऐसे सच से रूबरू हो पाते हैं और फिर जल्द ही उसे भूल भी जाते हैं। जैसे हम नबील अहमद वानी को लगभग भूल चुके थे। पिछले साल उनका नाम सुर्खियों में तब आया था, जब उन्होंने सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ़ में कमांडेंट पद के लिए हुई प्रवेश परीक्षा में टॉप किया था। हमने इसे एक छोटी सी खबर मानकर भुला दिया। नबील को मिलने वाला कवरेज आतंकवादी बुरहान वानी को मिलने वाले कवरेज का दसवाँ हिस्सा भी नहीं था, जबकि बुरहान वानी जहां नौजवानों से एक हाथ में पत्थर और दूसरे में हथियार लेने की बात कह रहा था, तो वहीं नबील वानी कह रहे थे कि नौजवानों को हाथ में कलम पकड़नी होगी, वे पढ़-लिख कर ही आगे बढ़ सकेंगे, पत्थर फेंक कर नहीं। हम उन गुमराह नौजवानों के बारे में खूब चर्चा करते रहे हैं, जो बुरहान वानी को अपना रोल मॉडल मानते हैं, लेकिन उन बहुसंख्य नौजवानों को भुला दिया गया, जिनके रोल मॉडल नबील अहमद वानी हैं।नबील अहमद वानी इन दिनों फिर से चर्चा में हैं। उन्होंने महिला कल्याण मंत्री मेनका गांधी को एक चिट्ठी लिखी है। यह चिट्ठी उनकी बहन के बारे में है, जो पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में पढ़ रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें महिला छात्रवास छोड़ने को कहा है। नबील ने अपनी चिट्ठी में यह भी लिखा है कि उन्हें अपने परिवार को लेकर हमेशा चिंता रहती है, क्योंकि आतंकवादी संगठन उनके खिलाफ हैं। नबील की इस तरह की चिंता जायज भी है। पिछले दिनों कश्मीर घाटी में जिस तरह आतंकवादियों ने लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की निर्मम हत्या की, वह बताता है कि आतंकी समूह उन सभी लोगों से नफरत करते हैं, जो भारतीय तंत्र में ऊंचे पदों पर पहुंचे हैं और कश्मीरी नौजवानों के असली रोल मॉडल हैं। आतंकी संगठनों की दिक्कत यह है कि ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। कश्मीरी नौजवान सिविल सर्विसेज, पीसीएस, आईआईटी सभी प्रवेश परीक्षाओं में मेहनत करके अपने लिए जगह बना रहे हैं। यहां तक कि वे खेलों के क्षेत्र में भी तेजी से आगे आ रहे हैं। यहां यह नहीं भूलना चाहिए कि ये उस प्रदेश के नौजवान हैं, जहां कई दूसरे प्रदेशों जैसी बेहतर शिक्षा व्यवस्था नहीं है। और आए दिन आयोजित होने वाले बंद से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है।ऐसे नौजवानों और उनके परिवार वालों को पूरी सुरक्षा देना देश का पहला दायित्व है। आज के कश्मीर की सबसे बड़ी जरूरत यह है कि उसे ऐसे और रोल मॉडल मिलें। आतंकवाद और अलगाववाद आज के कश्मीर की एक हकीक़त है और हमें उससे हर कदम पर, हर तरह की लड़ाई लड़नी ही होगी। इसमें किसी तरह की कोई रियायत नहीं दी जा सकती, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी जरूरत यह भी है कि हम एक नए कश्मीर के निर्माण में जुट जाएं। यह काम कश्मीर को एक नई सोच वाली नई पीढ़ी देकर ही किया जा सकता है। एक ऐसी पीढ़ी, जो अपने वर्तमान और भविष्य को कश्मीर समस्या के अतीत से जोड़कर न देखती हो। कश्मीरी नौजवानों को अच्छी शिक्षा और रोज़गार देकर हम न सिर्फ उनके, बल्कि अपने सपनों को भी पूरा कर सकते हैं। यही पीढ़ी आगे चलकर कश्मीर को समाधान के रास्ते पर लेकर जाएगी।

~साभार - हिंदुस्तान

मर्दानगी


Nikhilesh Mishra

लड़की उम्र में बड़ी हो तो मर्दानगी को ठेस लग जाती है, लड़की लंबाई में बड़ी हो तो भी मर्दानगी को चोट लग जाती है, लड़की अधिक कमाती हो तो मर्दानगी हर्ट होती है, लड़की आर्ग्यूमेंटेटिव हो तो मर्दानगी को ठेस, राह चलते समय लड़की दो क़दम आगे चलने लगे तो मर्दानगी घायल हो जाती है, लड़की 'न' कह दे तब तो पक्का मर्दानगी छलनी हो जाती है, बिना पूछे या एक्सप्लेन किये पत्नी किसी पुरुष दोस्त से बात कर ले तो डाह के मारे मर्दानगी दांत पीसने लगती है, फेसबुक पे लड़की की फ़ोटो पे अधिक लाइक आने से भी अधिकांश मर्दों को कलेजा भभक उठता है....मतलब ये कि स्त्री पुरुषों से कमतर रहे, उनके नियंत्रण में रहे, उनपे निर्भर रहे और उनका एहसान मानती रहे तभी मर्दानगी साबित होती है!

मर्दानगी (मैस्क्युलिनिटी) एक कुंठित श्रेष्ठताबोध है! इसका शारीरिक बल से कोई लेना देना नहीं बल्कि ये मानसिक दुर्बलता है, रोग है!
Tara Shanker

धर्म का चेहरा


आर कृष्णन शर्मा
कुछ साल पहले की बात है। मैं ट्रैन से कही जा रहा था। उस ट्रैन में जिस सीट पर बैठा था वह सीट दो ही व्यक्ति के लिए था लेकिन मेरे बगल में एक बुढ़िया आकर बैठ गयी। उसपे मेरी नजर पड़ी तो देखा माथे पर लम्बी टिका लिए , गला में कंठीमाला लिए हुए और हाथ में कोई माला फेर रही थी और मन ही मन बुदबुदा रही थी। जैसे देखने से प्रतीत हुआ सम्पूर्ण धर्म का ठेका लेकर चल रही हो और ट्रेन में सफर के साथ। अभी मैं कुछ सोच ही रहा था कि उस बुढ़िया के तरफ से मेरे मान में एक सवाल गूंजा मैं स्तब्ध रह गया। बुढ़िया ने कहा कौन जाट हो बाबू मैं सकपका गया क्यूं कि मुझको इसकी उम्मीद कतई न थी। लेकिन कुछ छन मैं अपने नास्तिक मन टटोलने के बाद तपाक से जवाब दिया डोम हूँ। उसने कहा मजाक करते हो बबुआ देखने में तो नही लगते । मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर था मैंने कहा चेहरे पर लिखा होता है क्या या फिर मैं आपको अपनी जाति सर्टिफिकेट दिखाऊं। इतने बोलने के बाद बुढ़िया ने मुझे गुरेर कर देखा और कहा बहुत बिगड़ल बच्चा है। और उसने राम राम कहते हुए अपनी सीट बदल ली। मै अब सीट पर आराम से पैर फैला कर बैठा था और मुझे सुकून मिल रही थी । ट्रैन के पैसेंजर मुस्कुरा रहे थे। तब एक बगल के बुजुर्ग ने कहा बिलकुल सही जवाब दिए । उस दिन धर्म का जीता जागता चेहरा देखते हुए मुझे भयावह महसूस हो रहा था और कई सवाल सोचते हुए ढूंढते हुए वो ट्रैन का सफर कट गया लेकिन ये घटना मेरे स्मृति पटल पर छप गयी।
© #आर_कृष्णन

कमजोर दिमाग

यादें_
ट्रेन में मेरे सामने सीट पर दो लोग बात कर रहे थे|
एक ने कहा- कमजोर दिमाग वाले लकीर के फकीर होते हैं, मूढ़ होते हैं| वे ही भक्त होते हैं|
दूसरा हां हूं कर रहा था|
पहला समझा रहा था जो ठीक से मुझे सुनाई नहीं दे रहा था,हल्ला गुल्ला के कारण|
मुझे ये भक्त वाली बात समझ में नहीं आई| पूछने का मन कर रहा था| बहुत सारे लोग मंदिर मस्जिद में भक्ति करते हैं वे सब के सब मूढ़ नहीं हो सकते| मोदी जी भी भक्त हैं हमारे देश को चला रहे हैं|
कुछ कहना ठीक नहीं लगा दो की बातचीत में जबर्दस्ती घुसना |

बुधवार, 17 मई 2017

अचानक परिवर्तन

यह समझ में नहीं आता की साठ बासठ के बाद लोगों को समाज सेवा, भजन कीर्तन, मंदिर मस्जिद, तीर्थ यात्रा, .... की कैसे सूझती है/ यह सब थोडा बहुत पहले से क्यों नहीं होता? कुछ लोग सेवा निवृत्ति पश्चात् पेंट शर्ट छोड़ कर धोती कुरता पहनते हैं, कोई दाढ़ी रखने लगते हैं/ यह अचानक परिवर्तन,,, ..?
एक शिक्षक अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर बोले "मैं अब भागवत शरण में जीवन बिताऊंगा/ पता नहीं वे अब तक किसके शरण में थे?

ईश्वर


Ram Bahadur Pandey

🌝ईश्वर और उसकी उपयोगिता 🌝
🔜🔜🔜🔜🔜🔜🔜🔜
एक बार बट्रेण्ड रसेल से किसी ने पूंछा " ईश्वर क्या है ?
रसेल का जबाब था , ' मन को शक्ति देने वाली एक अध्यात्मिक कल्पना का नाम ' ईश्वर है '।
आत्म विश्वास को दृढ़ बनाने के लिए ईश्वर का अस्तित्व बनाया गया है ।इसके साथ-- साथ ही ईश्वर की कल्पना मनुष्य को भयभीत भी करती है । एकांत में भी , मनुष्य पाप या गलत कार्य करने में डरे इसी लिए उसे सर्व दृष्टा व सर्वव्यापी बतलाया गया है । एकांत में भी
मनुष्य को सुमार्ग पर चलाने के लिए " ईश्वर " कारगर अस्त्र है ,जो ठीक भी है ।
वास्तविकता तो यह है कि हमारे कर्म ही हमारे भाग्यविधाता हैं । हमें अपने ही कर्मों के फल भोगने पड़ते हैं । सफलता असफलता में कार्यपद्धति ,परिस्थितियां और संयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है ,परन्तु लोग अपने आलस्य, अकर्मण्यता ,नियति और क्षमता पर पर्दा डालने के लिए इसे भाग्य कहते हैं 

मंगलवार, 16 मई 2017

पूना एक्ट

पूना एक्ट के अम्बेडकर जी का वह
अलग निर्वाचन क्षेत्र क्या होता. कैसे होता. क्यों होना चाहिए था? कोई पूर्णतः दलित निवासियों का क्षेत्र है क्या? या उस समय कहीं था? यदि नहीं था ऐसा कोई क्षेत्र तो अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग का क्या औचित्य था|
कानून द्वारा जाति भेद दूर किया गया| भले ही कुछ स्वार्थी संकीर्ण चालाक घमंडी लोग अब भी जाति भेद करते हैं| हम उम्मीद कर सकते हैं कि जाति भेद अवश्य खतम होगा एक दिन|

तीन तलाक

तीन तलाक़ को सपोर्ट करने वालें सभी मुसलमान भाई बहनों को बहुत बहुत मुबारकबाद अल्लाह से दुआ है कि आपकी ये खुशी और दुगनी करें और आपको और आपके घर की औरतों को जल्दी ही अल्लाह के इस कानून तीन तलाक़ को देखने का मुबारक मौका नसीब हो ! ये मुबारक दिन आपकी माँ बहनो कीं ज़िन्दगी में बार बार आएं !
आमीन

सोमवार, 15 मई 2017

कल्पित किंतु सत्य


Engr Kanwarjit Singh > ‎Dadi Ma Ke Nuske


*एक मुस्लिम,* लन्दन में एक बस में चढ़ा और उस ने बस चालक से अनुरोध किया कि बस में बज रहे पाश्चात्य संगीत को तत्काल बन्द कर दे...बस चालक ने इस का कारण पूछा तो मुस्लिम ने कहा कि इस्लाम की शिक्षा के अनुसार संगीत सुनना हराम है, क्यूँ कि प्यारे नबी के समय संगीत नहीं था और विशेष रूप से पाश्चात्य संगीत...

बस चालक ने विनम्रतापूर्वक रेडियो बन्द कर दिया , बस का दरवाज़ा खोला और मुस्लिम को बस से नीचे उतर जाने का निवेदन किया... मुस्लिम ने इस का कारण पूछा...

बस चालक ने विनम्रता से उत्तर दिया.." हे भाई प्यारे नबी के समय कोई टेक्सी नहीं थी, कोई बस नहीं थी , कोई बम नहीं थे, हवाई जहाजों का अपहरण करने वाले नहीं थे , मसजिद में शोरगुल मचाने वाले लाउड स्पीकर नहीं थे , कोई आत्मघाती हमले नहीं होते थे , आर डी एक्स नहीं था, ए के 47 नहीं थी, सर्वत्र केवल शान्ति थी ! अतः चुपचाप नीचे उतर जाओ और गंतव्य तक पहुँचने के लिए ऊँट का इन्तजार करो...

रविवार, 14 मई 2017

सत्य

P.M.Panda_
सत्य की जीत सदा नहीं होती
यदा कदा हो जाती है
सत्य को पराजित करने
झूठ फरेब मक्कारी जैसे
अनेक महारथी एकजुट होकर
सत्य को घेर लेते हैं
और सत्य चक्रव्यूह में फंसकर
अभिमन्यु जैसा
मार डाला जाता है!
सत्यमेव जयते
यह कथन सिर्फ तसल्ली देने का है
सत्य को स्वीकार करना
बिरलों का ही काम है!

सत्य को हराने के लिए
भारी एकजुटता देखी गई है
सत्य निर्बल सत्य बदनाम
और सत्य को अविश्वसनीय बनाने
पुरजोर कोशिश की जाती है
लेकिन इस यकीन पर
यकीन करना दोस्तों!
अंततः जीत सच्चाई की ही होती है।

पद्ममुख पंडा
पद्मीरा सदन
महापल्ली

हमारी मानसिकता

Rattan Lal Gottra

🌷मेरा देश ऐसा है जहाँ 🌷

हम बच्चे को संस्कार तो भारतीय देना चाहते है लेकिन शिक्षा अन्ग्रेजी !

कहने को तो हम डिजिटल इंडिया का सपना देखते है लेकिन बाते आज भी हम मंदिर मस्जिद गाय गधा की करते है !

पूरे विश्व मे केवल हमारा देश ऐसा है जहाँ भगवान के नाम पर वोट माँगा और दिया जाता है !

हम दूध तो दोनो का पीते है लेकिन गाय हमारी सगी और भैस सौतेली माता है !

हम अपनी गिनती तो अमेरिका चीन जापान और रूस के साथ करते है 
लेकिन हमारे सैनिक सिरिया इराक और अफगानिस्तान की तरह मरते है !

हमारा देश ऐसा है जहाँ शिक्षित लोग रिक्शा और गवार लोग देश चलाते है !

भारत ऐसा देश है जहाँ full educated केजरीवाल और राहुल पर चुटकुले बनते है लेकिन चाय बेचने वाले को सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है !

हम आज भी logic से ज्यादा magic पर विश्वास करते है इसलिए हमारे देश मे scientist कम और बाबा ज्यादा बनते है !

हम गाय को माँ कहते है और गाय हमारे यहा कूडा खाने को मजबूर है !

हम गंगा को माँ कहते है और सबसे ज्यादा गंदगी गंगा मे डालते है !

हम अपने देश को माँ कहते है और भ्रस्टाचार, बेइमानी , रेप ,मर्डर करके देश को खोखला और बदनाम करते है !

हम अपने माँ - बाप को दर्जा तो भगवान का देते है लेकिन उनको वृद्धआश्रम मे मरने के लिये छोड़ देते है !

हमारे धर्म -कर्म मे लाख बुराइयां हो लेकिन हम सवाल दूसरे के उपर ही उठायेगे!

हमारे यहाँ स्त्रियो को देवी का दर्जा दिया जाता है लेकिन सबसे ज्यादा जुल्म उन्ही पर किया जाता है !

हमारे यहाँ कहानियाँ तो सीता और सावित्री की पढाई जाती है लेकिन अनुसरण sunny leon का किया जाता है !

हमारा देश ऐसा है जहाँ अन्न पैदा करने वाला किसान खुद अन्न और पानी के लिये मर जाता है !

हमारा देश ऐसा है जहाँ मंदिरो मे पैसा machine से गिना जाता है लेकिन लाखो लोग हर साल भूखे मर जाते है !

हमारा देश ऐसा है जहाँ साई बाबा को लोग मंदिर मे रहने लायक नही समझते लेकिन मोदी जी का मंदिर बनाते है और मोदी चालीसा और आरती गाते है !

हमारा देश ऐसा है जहाँ भगवा पहन कर गुंडई,पुजारी बनकर रेप, गौरक्षक बनकर हत्या , बाबा बनकर ठगी , योगी बनकर राज्य , किया जाता है !

कुल मिलाकर हमारे देश मे 130 करोड़ की जनसंख्या मे केवल 30 करोड़ लोग ही अपनी बुद्धि का प्रयोग करते है बाकी लोग अपनी शिक्षा को दरकिनार करते हुए नेताओ , बाबाओ और अफ़वाहो की बातो मे आकर जाति धर्म मंदिर मस्जिद आदि चीजो मे फसकर अपने देश को पीछे ले जाने का काम करते है ! अगर ऐसा न होता तो हम जरुर आज चीन से हर क्षेत्र मे आगे होते !

एक बार ध्यान से पढने के बाद इसे अपने उपर रखकर अवस्य सोचे ॥

शनिवार, 13 मई 2017

in case of emergency

Lallusingh ने वाट्सएप ग्रुप में भेजा है_
*आकस्मिक घटना संकेत -*
   *जरूर पढे- और करे भी*

    "ICE"(In Case of Emergency /आपात स्थिति
          के समय)

हम सभी अपने मोबाइल की मेमोरी में नाम के साथ नम्बर दर्ज करते हैं किंतु हमारे अलावा कोई नहीं जानता कि इनमें से कौन सा नम्बर हमारे परिवार के सदस्य अथवा नजदीकी रिश्तेदार या मित्र का है।

यदि हम दुर्घटना ग्रस्त हो जाय या अचानक बीमार पड़ जायें तो जो व्यक्ति हमें अस्पताल पहुँचाता है, उसके पास हमारा मोबाइल फोन तो मिल जाता है परंतु वह यह नहीं जानता कि किसे फोन किया जाय ?क्योंकि मोबाइल में सैकड़ों नम्बर
दर्ज है किंतु आपात स्थिति(Emergency) में किससे सम्पर्क किया जाय ?

अतः"ICE"(In Case of Emergency /आपात स्थिति के समय) की परिकल्पना की गई ।

"ICE" की संकल्पना आपात स्थिति (Emergency)में तुरंत सम्पर्क स्थापित करने की विधा है ।जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन रखता है।आपको चाहिए कि आपात स्थिति (Emergency)में जिससे तुरंत सम्पर्क करना चाहिए, उसका फोन नंबर "ICE"(In Case of Emergency) के साथ दर्ज करें।

यह विचार एक पुलिसकर्मी के दिमाग में आया जिसने अनुभव किया कि जब भी वह दुर्घटना स्थल पर पहुंचा, दुर्घटना ग्रस्त अथवा बीमार व्यक्ति के पास मोबाइल फोन तो होता है पर यह पता नहीं चल पाता था कि किससे तुरंत सम्पर्क कर सूचना दी जाय।इस कारण उसने विचार किया कि यदि ऐसी स्थिति हेतु राष्ट्रीय स्तर पर मान्य एक शब्द की संकल्पना की जाय तो आपात कालीन स्थितियों में आपात सेवा देने वाले व्यक्ति या पुलिसकर्मी आपके द्वारा "ICE " के साथ दर्ज किए गए नंबर पर, उचित व्यक्ति से तुरंत सम्पर्क स्थापित करने में सक्षम होंगे।

आज ही अपने मोबाइल फोन में आपात स्थिति में सम्पर्क हेतु "ICE "  के साथ नम्बर दर्ज कर इस विचार धारा को विस्तारित करें।

उदाहरणार्थ;
नाम : ICE Deepak
नंबर : +91 xxxxx xxxxx
आवश्यक हो तो,  आपात स्थिति हेतु एक से अधिक व्यक्तियों के नाम भी ICE 1, ICE 2, ICE 3 के साथ दर्ज किए जा सकते हैं।
एक उत्तम विचार बहुत बड़ा
        बदलाव लायेगा।
कृपया इसे अपने प्रियजनों और मित्रों को भेजिए, यह वास्तव में किसी का जीवन बचाने में सहायक सिद्ध होगा।

याद रखिए जब आप बोलने में असमर्थ होंगे,
      " ICE "आपके लिए बोलेगा।
            जनहित में जारी - 🙏🏻

satyamshiwamsundaram.blogger.com: हमारा धर्म हमारा संविधान

satyamshiwamsundaram.blogger.com: हमारा धर्म हमारा संविधान: समाज के लिए जो नियम बनाए जाते थे वह धर्म है| यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करें वह धर्म है| कुरान, मनु स्मृति . . सभी तब के धर्म थे जिसका पालन...

पाप मुक्ति और भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार कायम रहेगा, जब तक हमारे कृपालु भगवान और देवी देवता हमें पाप मुक्त करते रहेंगे

शुक्रवार, 12 मई 2017

ईश्वर

कोई ईश्वर रास्ता दिखाता है क्या किसी को? सब की  सुननी चाहिए| स्वयं सोच विचार कर निर्णय लेना चाहिए|
अगर ईश्वर रास्ता दिखाता तो दुनियाँ में इतने पाप अपराध भ्रष्टाचार मार काट नहीं होते|
इसीलिए गौतम बुद्ध ने कहा है " अप्प दीपो भव|" अपना रास्ता खुद बनाओ|

गुरुवार, 11 मई 2017

हर तरह के विचार पढ़ें

लोगों की जानकारी तथा डिबेट करने के लिए मैं दूसरों के विचार शेअर करता हूँ| हमें उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़कर सोच विचार करना चाहिए| सहमत नहीं होने से तर्क आधार सह विरोध भी करना चाहिए|

हमारा धर्म हमारा संविधान

समाज के लिए जो नियम बनाए जाते थे वह धर्म है| यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करें वह धर्म है| कुरान, मनु स्मृति . . सभी तब के धर्म थे जिसका पालन करना अनिवार्य होता था| नए जमाने में समाज उन पुराने धर्मों को उचित नहीं मानता| हर देश में संविधान है | अब यही हमारा धर्म होना चाहिए| लेकिन कुछ लकीर के फकीर कट्टर पंथी अब भी मनु स्मृति/कुरान को अपना धर्म मानते हैं| संविधान के साथ साथ मनु स्मृति/कुरान को एक साथ मानना संभव ही नहीं है|

मनु स्मृति का संशोधित रूप हमारा संविधान

पहले मनु स्मृति अनुसार हमारा देश हमारा समाज चलता था| संशोधन परिवर्तन कर आज का हमारा संविधान बनाया गया है| संशोधन क्रम से नहीं हुआ| आजादी के पश्चात मनुवाद की बुराइयों को हटाकर संविधान बना|

गुरुवार, 4 मई 2017

विद्यार्थी बने रहें

हमें जीवन भर विद्यार्थी बने रहना चाहिए | पढें, सुनें और विचार करें |

क्यों???

सभी प्रश्नों के उत्तर जीवन में मिलना संभव नहीं| फिर भी हर बात पर मन में क्या? क्यों? कैसे? आना चाहिए| इनमें ज्यादा महत्वपूर्ण है क्यों?
क्यों का जबाब पाने की हर दम कोशिश करनी चाहिए|

बुधवार, 3 मई 2017

ईश्वर की सेवा

मेरे विचार से सर्व शक्तिमान कथित ईश्वर या किसी देवी देवता को हमारी सेवा की जरूरत नहीं है|

सोमवार, 1 मई 2017

ईश्वर और समाज का हित

ईश्वर को मानने से समाज का कोई हित नहीं है , आम जन का धन और समय बर्बाद हो रहा है, मनुष्य मनुष्य से दूर हो रहा है |

रविवार, 30 अप्रैल 2017

समाज के लिए नियम

समाज के लिए बनाए गए नियम धर्म कहलाता जिसका धारण (पालन) करना चाहिए| उसमें देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवर्तन होते रहना चाहिए जैसा कि संविधान| जिसमें परिवर्तन नहीं वहां गति नहीं| जिसमें गति नहीं वह जीवंत नहीं मृत हो जाता है|

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

श्रीकृष्ण

श्रीकृष्ण जी उस जमाने के most intelligennt थे| बहुत सारी लड़कियां उनसे प्रेम करती थीं|  कृष्ण जी सबसे प्रेम करते थे| he was  best lover.
इसमें आलोचना की कोई गु्ंजाईश नहीं|
कृष्ण की 8 ही पत्नियां थीं यथा- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
उस जमाने में एकाधिक विवाह करने का रिवाज था| क्योंकि बहुत युद्ध होने के कारण पुरूषों की संख्या कम थी|
उस समय विवाहेत्तर प्रेम को समाज बुरा नहीं मानता था| प्रेमिका को कभी पत्नी का दर्जा नहीं मिलता | इसलिए श्रीकृष्ण की 16008 पत्नियां थीं कहना गलत है| आठ के अलावा बाकी सब प्रेमिकाएं थीं| कृष्ण जी के शानदार व्यक्तित्व के कारण बाद में भी मीरा उन्हें पति मानने लगी| आज भी कई लड़कियां खुद को उनकी प्रेमिका/ पत्नी मानती हैं| उनमें से कई शादी भी नहीं करतीं|

एकाधिक विवाह

पहले युद्ध बहुत होते थे| सैनिक मारे जाते थे| फलस्वरूप. पुरुष की अपेक्षा स्त्रियों की संख्या अधिक होती थी| समायोजन के लिए पुरुष को एकाधिक शादी करने की छूट थी| मुस्लिम अब भी उसे बनाए रखना चाहते हैं|

शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017

क्रूर बनाम मानवतावादी

भगवान को मानने वाल कई लोग अपराध करते हैं खूब बाद में मंदिरों में पाप मुक्ति के लिए खूब चढ़ावा देते हैं| भगवान को नहीं मानने वाले मानवतावादी होते हैं| कट्टर धार्मिक क्रूर सहिष्णु होते हैं आतंकवादी होते हैं धर्म के नाम पर हत्या करते हैं|

रविवार, 23 अप्रैल 2017

कल पुस्तक दिवस था| याद आ रहे हैं

कलवपुस्तक दिवस था| याद आ रहे हैं_
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उपन्यास-
प्यारे लाल अवारा, गुलशन नंदा,
कुशवाहा कांत, वेद प्रकाश काम्बोज, वेद प्रकाश शर्मा, ... .
सुरेन्द्र मोहन पाठक, ओम प्रकाश शर्मा,
इब्ने सफी बी ए, कर्नल रंजीत, मीना सरकार. हेडली चेईस, ....
वी वहानवी, मस्त राम, ...
बंकिम चन्द्र, रवीन्द्र नाथ, धर्मवीर भारती, रांगेय राघव, जयशंकर प्रसाद, कृष्ण चंदर, जैनेन्द्र कुमार, भगवती चरण वर्मा, प्रेम चंद, राहिल सांकृत्यायन, राजेन्द्र यादव, चतुरसेन शास्त्री, अमृत लाल नागर, विमल मित्र, ... ..
पत्र पत्रिका_
साप्ताहिक ब्लीट्ज,
कल्याण, अखंड ज्योति, दिव्य ज्योति,
धर्म युग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, सारिका,
नुतन पुरातन ज्ञान विज्ञान ...की पत्रिका नवनीत ( भारती भवन से समन्वित से पहले), सरिता, मुक्ता,..

मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

लाउड स्पीकर


Dr Vijay Mehta

Loud speaker पे अजान भी बंद हो ,भजन भी बंद हो ,गुरुद्वारा से गुरुवाणी भी बंद हो .....

secularism का मतलब किसी भी धर्म की कोई भी मूर्खता जो नागरिक धर्म का उल्लंघन हो, उसे किसी हालात मॆं इजाजत ना हो ।

चार दीवारों के अंदर , .....बाहर आवाज़ न जाये इस तरीके से जिसे अजान ,भजन कूछ भी और 365*24*7 करने हो तो खुशी से करे ।

धेट इज आल

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

धर्म का संशोधित रूप संविधान

जिसका धारण करना अर्थात पालन करना अनिवार्य होता था उसे धर्म कहते थे|| लेकिन देश काल परिस्थिति अनुसार परिवर्तन संशोधन होना चाहिए| अब हमारा धर्म हमारा संविधान होना चाहिए|

गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

भीमराव अम्बेडकर को नमन


भीमराव अम्बेडकर को नमन | वे दलितों के नहीं थे हम सबके थे| हमारा संविधान किसी एक वर्ग का नहीं हम सबका है | संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए| संविधान निर्माण करने वालों को नमन | संविधान को मान्य करने वाले सांसदों को नमन |

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

गंगा नदी

कुछ चालाक लोगों ने गंगा नदी को पाप नाशिनी मोक्ष प्रदायिनी माता बनाकर उसे पवित्र बना दिया| फलस्वरूप वह स्वच्छ नहीं रह गया|

हमारा संविधान महान

हमारा संविधान सभी धर्मों के नियम परम्पराओं के विरुद्ध होते हुए भी महान है| जिन्होंने इसका निर्माण किया,  मान्यता दी वे निश्चित ही महान हैं|

रविवार, 9 अप्रैल 2017

भारत की जय

यदि संविधान में यह "भारत माता की जय" राष्ट्रीय नारा घोषित हो या कानून बना दिया जाय बोलने के लिए तब तो बोलना ही पड़ेगा | तब तक भारत की जय |

ईश्वर का जन्म

दरअसल जब संसार का रहस्य कुछ भी समझ में नहीं आया तो ईश्वर की कल्पना की गई| यही उनके जन्म की सच्ची कहानी है|
ईश्वर की सत्ता को मान लेने से सारे प्रश्न.. जन्म मृत्यु जीवन ...समाप्त हो जाते हैं| मन शांत हो जाता है|

शनिवार, 8 अप्रैल 2017

धर्म के परिणाम

विभिन्न धर्मों के परिणाम - ईश्वर अल्लाह गॉड देवी देवताओं को पटाने की कोशिश में हम मनुष्य मनुष्य से दूर होते गए|

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

गौदान


मरने के बाद आत्मा को गाय की पूँछ पकड़ कर वैतरणी नदी पार करना पड़ता है| आत्मा को तैरना नहीं आता| बाम्हन को एक गाय दान में चाहिए|

मन की शांति के लिए उपाय

मन की शांति के लिए कुछ  सरल सुलभ प्रचलित उपाय हैं .
घर परिवार दुनियाँदारी से दूर हो जाना|
1_. कम समय के लिए- मंदिर मस्जिद चर्च, पूजा पाठ, भजन कीर्तन, सत्संग प्रवचन कथा सुनना, ...
2_. कोई नशा शराब गांजा....
३_.अधिक समय के लिए- बाबा बन जाना

क्या जरूरत है

ये पूजा पाठ भजन कीर्तन यज्ञ हवन नमाज प्रार्थना हमारे समाज से बुराइयों को दूर नहीं कर सकते तो इसकी जरूरत क्या है?

पाप मुक्ति के साधनों का आविष्कार

हमारे देश में लगभग सभी लोग धार्मिक आस्थावान पूजा पाठ यज्ञ हवन भक्ति भजन कीर्तन करते हैं फिर भी भ्रष्टाचार अपराध चोरी डकैती मार काट बलात्कार बढ़ रहे हैं लगातार...
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हमारे सारे पाप से मुक्ति के सरल सुलभ उपाय ब्राह्मणों द्वारा आविष्कार किए गए हैं| परिणाम
हमारे देश में भ्रष्टाचार अपराध चोरी डकैती मार काट बलात्कार बढ़ रहे हैं लगातार...

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

ग्रह दशा

ललित दार्शनिक _
अमेरिका और रूस जैसे देश दूसरे ग्रहों पर जीवन या फ़िर जीवन बचाने के लिये पृथ्वी जैसा दूसरा ग्रह ढूँढ़ने की कोशिश में रात -दिन एक किये हुए हैं वहीँ दूसरी तरफ़ हम अँगूठी में लगे पत्थर के द्वारा उन्हीं ग्रहों की दिशा बदलने में लगे हुए हैं l

पृथ्वी स्थिर है शेषनाग के सर पर

धार्मिक ग्रंथ के अनुसार शेषनाग के सर पर पृथ्वी स्थिर है. सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर प्रति दिन यात्रा करता है|
जो अपने दिमाग का उपयोग न करें. वे स्वीकार कर लेगा लेकिन गेलिलियो नहीं|.

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

नास्तिक स्वतंत्र होता है

नास्तिक स्वतंत्र होता है अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है| वह किसी ग्रंथ से बंधा नहीं होता|

जो होता है अच्छा होता है|

P.M.Panda Mahapalli_
कहा जाता है कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। पर आजकल जो घृणित घटनाएँ होती हैं क्या वह किसी अच्छे के लिए है? चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार?फिर उसकी हत्या??
ये जो पहले से बनाकर रखी गई अवधारणाएं हैं निहायत ही घटिया व बकवास हैं।