🌝ईश्वर और उसकी उपयोगिता
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एक बार बट्रेण्ड रसेल से किसी ने पूंछा " ईश्वर क्या है ?
रसेल का जबाब था , ' मन को शक्ति देने वाली एक अध्यात्मिक कल्पना का नाम ' ईश्वर है '।
आत्म विश्वास को दृढ़ बनाने के लिए ईश्वर का अस्तित्व बनाया गया है ।इसके साथ-- साथ ही ईश्वर की कल्पना मनुष्य को भयभीत भी करती है । एकांत में भी , मनुष्य पाप या गलत कार्य करने में डरे इसी लिए उसे सर्व दृष्टा व सर्वव्यापी बतलाया गया है । एकांत में भी
मनुष्य को सुमार्ग पर चलाने के लिए " ईश्वर " कारगर अस्त्र है ,जो ठीक भी है ।
वास्तविकता तो यह है कि हमारे कर्म ही हमारे भाग्यविधाता हैं । हमें अपने ही कर्मों के फल भोगने पड़ते हैं । सफलता असफलता में कार्यपद्धति ,परिस्थितियां और संयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है ,परन्तु लोग अपने आलस्य, अकर्मण्यता ,नियति और क्षमता पर पर्दा डालने के लिए इसे भाग्य कहते हैं
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
बुधवार, 17 मई 2017
ईश्वर
मंगलवार, 16 मई 2017
पूना एक्ट
पूना एक्ट के अम्बेडकर जी का वह
अलग निर्वाचन क्षेत्र क्या होता. कैसे होता. क्यों होना चाहिए था? कोई पूर्णतः दलित निवासियों का क्षेत्र है क्या? या उस समय कहीं था? यदि नहीं था ऐसा कोई क्षेत्र तो अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग का क्या औचित्य था|
कानून द्वारा जाति भेद दूर किया गया| भले ही कुछ स्वार्थी संकीर्ण चालाक घमंडी लोग अब भी जाति भेद करते हैं| हम उम्मीद कर सकते हैं कि जाति भेद अवश्य खतम होगा एक दिन|
तीन तलाक
सोमवार, 15 मई 2017
कल्पित किंतु सत्य
Engr Kanwarjit Singh > Dadi Ma Ke Nuske
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*एक मुस्लिम,* लन्दन में एक बस में चढ़ा और उस ने बस चालक से अनुरोध किया कि बस में बज रहे पाश्चात्य संगीत को तत्काल बन्द कर दे...बस चालक ने इस का कारण पूछा तो मुस्लिम ने कहा कि इस्लाम की शिक्षा के अनुसार संगीत सुनना हराम है, क्यूँ कि प्यारे नबी के समय संगीत नहीं था और विशेष रूप से पाश्चात्य संगीत...
बस चालक ने विनम्रतापूर्वक रेडियो बन्द कर दिया , बस का दरवाज़ा खोला और मुस्लिम को बस से नीचे उतर जाने का निवेदन किया... मुस्लिम ने इस का कारण पूछा...
बस चालक ने विनम्रता से उत्तर दिया.." हे भाई प्यारे नबी के समय कोई टेक्सी नहीं थी, कोई बस नहीं थी , कोई बम नहीं थे, हवाई जहाजों का अपहरण करने वाले नहीं थे , मसजिद में शोरगुल मचाने वाले लाउड स्पीकर नहीं थे , कोई आत्मघाती हमले नहीं होते थे , आर डी एक्स नहीं था, ए के 47 नहीं थी, सर्वत्र केवल शान्ति थी ! अतः चुपचाप नीचे उतर जाओ और गंतव्य तक पहुँचने के लिए ऊँट का इन्तजार करो...
रविवार, 14 मई 2017
सत्य
P.M.Panda_
सत्य की जीत सदा नहीं होती
यदा कदा हो जाती है
सत्य को पराजित करने
झूठ फरेब मक्कारी जैसे
अनेक महारथी एकजुट होकर
सत्य को घेर लेते हैं
और सत्य चक्रव्यूह में फंसकर
अभिमन्यु जैसा
मार डाला जाता है!
सत्यमेव जयते
यह कथन सिर्फ तसल्ली देने का है
सत्य को स्वीकार करना
बिरलों का ही काम है!
सत्य को हराने के लिए
भारी एकजुटता देखी गई है
सत्य निर्बल सत्य बदनाम
और सत्य को अविश्वसनीय बनाने
पुरजोर कोशिश की जाती है
लेकिन इस यकीन पर
यकीन करना दोस्तों!
अंततः जीत सच्चाई की ही होती है।
पद्ममुख पंडा
पद्मीरा सदन
महापल्ली
हमारी मानसिकता
🌷मेरा देश ऐसा है जहाँ
🌷
हम बच्चे को संस्कार तो भारतीय देना चाहते है लेकिन शिक्षा अन्ग्रेजी !
कहने को तो हम डिजिटल इंडिया का सपना देखते है लेकिन बाते आज भी हम मंदिर मस्जिद गाय गधा की करते है !
पूरे विश्व मे केवल हमारा देश ऐसा है जहाँ भगवान के नाम पर वोट माँगा और दिया जाता है !
हम दूध तो दोनो का पीते है लेकिन गाय हमारी सगी और भैस सौतेली माता है !
हम अपनी गिनती तो अमेरिका चीन जापान और रूस के साथ करते है
लेकिन हमारे सैनिक सिरिया इराक और अफगानिस्तान की तरह मरते है !
हमारा देश ऐसा है जहाँ शिक्षित लोग रिक्शा और गवार लोग देश चलाते है !
भारत ऐसा देश है जहाँ full educated केजरीवाल और राहुल पर चुटकुले बनते है लेकिन चाय बेचने वाले को सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है !
हम आज भी logic से ज्यादा magic पर विश्वास करते है इसलिए हमारे देश मे scientist कम और बाबा ज्यादा बनते है !
हम गाय को माँ कहते है और गाय हमारे यहा कूडा खाने को मजबूर है !
हम गंगा को माँ कहते है और सबसे ज्यादा गंदगी गंगा मे डालते है !
हम अपने देश को माँ कहते है और भ्रस्टाचार, बेइमानी , रेप ,मर्डर करके देश को खोखला और बदनाम करते है !
हम अपने माँ - बाप को दर्जा तो भगवान का देते है लेकिन उनको वृद्धआश्रम मे मरने के लिये छोड़ देते है !
हमारे धर्म -कर्म मे लाख बुराइयां हो लेकिन हम सवाल दूसरे के उपर ही उठायेगे!
हमारे यहाँ स्त्रियो को देवी का दर्जा दिया जाता है लेकिन सबसे ज्यादा जुल्म उन्ही पर किया जाता है !
हमारे यहाँ कहानियाँ तो सीता और सावित्री की पढाई जाती है लेकिन अनुसरण sunny leon का किया जाता है !
हमारा देश ऐसा है जहाँ अन्न पैदा करने वाला किसान खुद अन्न और पानी के लिये मर जाता है !
हमारा देश ऐसा है जहाँ मंदिरो मे पैसा machine से गिना जाता है लेकिन लाखो लोग हर साल भूखे मर जाते है !
हमारा देश ऐसा है जहाँ साई बाबा को लोग मंदिर मे रहने लायक नही समझते लेकिन मोदी जी का मंदिर बनाते है और मोदी चालीसा और आरती गाते है !
हमारा देश ऐसा है जहाँ भगवा पहन कर गुंडई,पुजारी बनकर रेप, गौरक्षक बनकर हत्या , बाबा बनकर ठगी , योगी बनकर राज्य , किया जाता है !
कुल मिलाकर हमारे देश मे 130 करोड़ की जनसंख्या मे केवल 30 करोड़ लोग ही अपनी बुद्धि का प्रयोग करते है बाकी लोग अपनी शिक्षा को दरकिनार करते हुए नेताओ , बाबाओ और अफ़वाहो की बातो मे आकर जाति धर्म मंदिर मस्जिद आदि चीजो मे फसकर अपने देश को पीछे ले जाने का काम करते है ! अगर ऐसा न होता तो हम जरुर आज चीन से हर क्षेत्र मे आगे होते !
एक बार ध्यान से पढने के बाद इसे अपने उपर रखकर अवस्य सोचे ॥
शनिवार, 13 मई 2017
in case of emergency
Lallusingh ने वाट्सएप ग्रुप में भेजा है_
*आकस्मिक घटना संकेत -*
*जरूर पढे- और करे भी*
"ICE"(In Case of Emergency /आपात स्थिति
के समय)
हम सभी अपने मोबाइल की मेमोरी में नाम के साथ नम्बर दर्ज करते हैं किंतु हमारे अलावा कोई नहीं जानता कि इनमें से कौन सा नम्बर हमारे परिवार के सदस्य अथवा नजदीकी रिश्तेदार या मित्र का है।
यदि हम दुर्घटना ग्रस्त हो जाय या अचानक बीमार पड़ जायें तो जो व्यक्ति हमें अस्पताल पहुँचाता है, उसके पास हमारा मोबाइल फोन तो मिल जाता है परंतु वह यह नहीं जानता कि किसे फोन किया जाय ?क्योंकि मोबाइल में सैकड़ों नम्बर
दर्ज है किंतु आपात स्थिति(Emergency) में किससे सम्पर्क किया जाय ?
अतः"ICE"(In Case of Emergency /आपात स्थिति के समय) की परिकल्पना की गई ।
"ICE" की संकल्पना आपात स्थिति (Emergency)में तुरंत सम्पर्क स्थापित करने की विधा है ।जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन रखता है।आपको चाहिए कि आपात स्थिति (Emergency)में जिससे तुरंत सम्पर्क करना चाहिए, उसका फोन नंबर "ICE"(In Case of Emergency) के साथ दर्ज करें।
यह विचार एक पुलिसकर्मी के दिमाग में आया जिसने अनुभव किया कि जब भी वह दुर्घटना स्थल पर पहुंचा, दुर्घटना ग्रस्त अथवा बीमार व्यक्ति के पास मोबाइल फोन तो होता है पर यह पता नहीं चल पाता था कि किससे तुरंत सम्पर्क कर सूचना दी जाय।इस कारण उसने विचार किया कि यदि ऐसी स्थिति हेतु राष्ट्रीय स्तर पर मान्य एक शब्द की संकल्पना की जाय तो आपात कालीन स्थितियों में आपात सेवा देने वाले व्यक्ति या पुलिसकर्मी आपके द्वारा "ICE " के साथ दर्ज किए गए नंबर पर, उचित व्यक्ति से तुरंत सम्पर्क स्थापित करने में सक्षम होंगे।
आज ही अपने मोबाइल फोन में आपात स्थिति में सम्पर्क हेतु "ICE " के साथ नम्बर दर्ज कर इस विचार धारा को विस्तारित करें।
उदाहरणार्थ;
नाम : ICE Deepak
नंबर : +91 xxxxx xxxxx
आवश्यक हो तो, आपात स्थिति हेतु एक से अधिक व्यक्तियों के नाम भी ICE 1, ICE 2, ICE 3 के साथ दर्ज किए जा सकते हैं।
एक उत्तम विचार बहुत बड़ा
बदलाव लायेगा।
कृपया इसे अपने प्रियजनों और मित्रों को भेजिए, यह वास्तव में किसी का जीवन बचाने में सहायक सिद्ध होगा।
याद रखिए जब आप बोलने में असमर्थ होंगे,
" ICE "आपके लिए बोलेगा।
जनहित में जारी - 🙏🏻
satyamshiwamsundaram.blogger.com: हमारा धर्म हमारा संविधान
पाप मुक्ति और भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार कायम रहेगा, जब तक हमारे कृपालु भगवान और देवी देवता हमें पाप मुक्त करते रहेंगे
शुक्रवार, 12 मई 2017
ईश्वर
कोई ईश्वर रास्ता दिखाता है क्या किसी को? सब की सुननी चाहिए| स्वयं सोच विचार कर निर्णय लेना चाहिए|
अगर ईश्वर रास्ता दिखाता तो दुनियाँ में इतने पाप अपराध भ्रष्टाचार मार काट नहीं होते|
इसीलिए गौतम बुद्ध ने कहा है " अप्प दीपो भव|" अपना रास्ता खुद बनाओ|
गुरुवार, 11 मई 2017
हर तरह के विचार पढ़ें
लोगों की जानकारी तथा डिबेट करने के लिए मैं दूसरों के विचार शेअर करता हूँ| हमें उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़कर सोच विचार करना चाहिए| सहमत नहीं होने से तर्क आधार सह विरोध भी करना चाहिए|
हमारा धर्म हमारा संविधान
समाज के लिए जो नियम बनाए जाते थे वह धर्म है| यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करें वह धर्म है| कुरान, मनु स्मृति . . सभी तब के धर्म थे जिसका पालन करना अनिवार्य होता था| नए जमाने में समाज उन पुराने धर्मों को उचित नहीं मानता| हर देश में संविधान है | अब यही हमारा धर्म होना चाहिए| लेकिन कुछ लकीर के फकीर कट्टर पंथी अब भी मनु स्मृति/कुरान को अपना धर्म मानते हैं| संविधान के साथ साथ मनु स्मृति/कुरान को एक साथ मानना संभव ही नहीं है|
मनु स्मृति का संशोधित रूप हमारा संविधान
पहले मनु स्मृति अनुसार हमारा देश हमारा समाज चलता था| संशोधन परिवर्तन कर आज का हमारा संविधान बनाया गया है| संशोधन क्रम से नहीं हुआ| आजादी के पश्चात मनुवाद की बुराइयों को हटाकर संविधान बना|
गुरुवार, 4 मई 2017
क्यों???
सभी प्रश्नों के उत्तर जीवन में मिलना संभव नहीं| फिर भी हर बात पर मन में क्या? क्यों? कैसे? आना चाहिए| इनमें ज्यादा महत्वपूर्ण है क्यों?
क्यों का जबाब पाने की हर दम कोशिश करनी चाहिए|
बुधवार, 3 मई 2017
ईश्वर की सेवा
मेरे विचार से सर्व शक्तिमान कथित ईश्वर या किसी देवी देवता को हमारी सेवा की जरूरत नहीं है|
सोमवार, 1 मई 2017
ईश्वर और समाज का हित
ईश्वर को मानने से समाज का कोई हित नहीं है , आम जन का धन और समय बर्बाद हो रहा है, मनुष्य मनुष्य से दूर हो रहा है |
रविवार, 30 अप्रैल 2017
समाज के लिए नियम
समाज के लिए बनाए गए नियम धर्म कहलाता जिसका धारण (पालन) करना चाहिए| उसमें देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवर्तन होते रहना चाहिए जैसा कि संविधान| जिसमें परिवर्तन नहीं वहां गति नहीं| जिसमें गति नहीं वह जीवंत नहीं मृत हो जाता है|
शनिवार, 29 अप्रैल 2017
श्रीकृष्ण
श्रीकृष्ण जी उस जमाने के most intelligennt थे| बहुत सारी लड़कियां उनसे प्रेम करती थीं| कृष्ण जी सबसे प्रेम करते थे| he was best lover.
इसमें आलोचना की कोई गु्ंजाईश नहीं|
कृष्ण की 8 ही पत्नियां थीं यथा- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
उस जमाने में एकाधिक विवाह करने का रिवाज था| क्योंकि बहुत युद्ध होने के कारण पुरूषों की संख्या कम थी|
उस समय विवाहेत्तर प्रेम को समाज बुरा नहीं मानता था| प्रेमिका को कभी पत्नी का दर्जा नहीं मिलता | इसलिए श्रीकृष्ण की 16008 पत्नियां थीं कहना गलत है| आठ के अलावा बाकी सब प्रेमिकाएं थीं| कृष्ण जी के शानदार व्यक्तित्व के कारण बाद में भी मीरा उन्हें पति मानने लगी| आज भी कई लड़कियां खुद को उनकी प्रेमिका/ पत्नी मानती हैं| उनमें से कई शादी भी नहीं करतीं|
एकाधिक विवाह
पहले युद्ध बहुत होते थे| सैनिक मारे जाते थे| फलस्वरूप. पुरुष की अपेक्षा स्त्रियों की संख्या अधिक होती थी| समायोजन के लिए पुरुष को एकाधिक शादी करने की छूट थी| मुस्लिम अब भी उसे बनाए रखना चाहते हैं|
शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
क्रूर बनाम मानवतावादी
भगवान को मानने वाल कई लोग अपराध करते हैं खूब बाद में मंदिरों में पाप मुक्ति के लिए खूब चढ़ावा देते हैं| भगवान को नहीं मानने वाले मानवतावादी होते हैं| कट्टर धार्मिक क्रूर सहिष्णु होते हैं आतंकवादी होते हैं धर्म के नाम पर हत्या करते हैं|
रविवार, 23 अप्रैल 2017
कल पुस्तक दिवस था| याद आ रहे हैं
कलवपुस्तक दिवस था| याद आ रहे हैं_
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उपन्यास-
प्यारे लाल अवारा, गुलशन नंदा,
कुशवाहा कांत, वेद प्रकाश काम्बोज, वेद प्रकाश शर्मा, ... .
सुरेन्द्र मोहन पाठक, ओम प्रकाश शर्मा,
इब्ने सफी बी ए, कर्नल रंजीत, मीना सरकार. हेडली चेईस, ....
वी वहानवी, मस्त राम, ...
बंकिम चन्द्र, रवीन्द्र नाथ, धर्मवीर भारती, रांगेय राघव, जयशंकर प्रसाद, कृष्ण चंदर, जैनेन्द्र कुमार, भगवती चरण वर्मा, प्रेम चंद, राहिल सांकृत्यायन, राजेन्द्र यादव, चतुरसेन शास्त्री, अमृत लाल नागर, विमल मित्र, ... ..
पत्र पत्रिका_
साप्ताहिक ब्लीट्ज,
कल्याण, अखंड ज्योति, दिव्य ज्योति,
धर्म युग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, सारिका,
नुतन पुरातन ज्ञान विज्ञान ...की पत्रिका नवनीत ( भारती भवन से समन्वित से पहले), सरिता, मुक्ता,..
मंगलवार, 18 अप्रैल 2017
लाउड स्पीकर
Loud speaker पे अजान भी बंद हो ,भजन भी बंद हो ,गुरुद्वारा से गुरुवाणी भी बंद हो .....
secularism का मतलब किसी भी धर्म की कोई भी मूर्खता जो नागरिक धर्म का उल्लंघन हो, उसे किसी हालात मॆं इजाजत ना हो ।
चार दीवारों के अंदर , .....बाहर आवाज़ न जाये इस तरीके से जिसे अजान ,भजन कूछ भी और 365*24*7 करने हो तो खुशी से करे ।
धेट इज आल
सोमवार, 17 अप्रैल 2017
धर्म का संशोधित रूप संविधान
जिसका धारण करना अर्थात पालन करना अनिवार्य होता था उसे धर्म कहते थे|| लेकिन देश काल परिस्थिति अनुसार परिवर्तन संशोधन होना चाहिए| अब हमारा धर्म हमारा संविधान होना चाहिए|
गुरुवार, 13 अप्रैल 2017
भीमराव अम्बेडकर को नमन
भीमराव अम्बेडकर को नमन | वे दलितों के नहीं थे हम सबके थे| हमारा संविधान किसी एक वर्ग का नहीं हम सबका है | संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए| संविधान निर्माण करने वालों को नमन | संविधान को मान्य करने वाले सांसदों को नमन |
सोमवार, 10 अप्रैल 2017
गंगा नदी
कुछ चालाक लोगों ने गंगा नदी को पाप नाशिनी मोक्ष प्रदायिनी माता बनाकर उसे पवित्र बना दिया| फलस्वरूप वह स्वच्छ नहीं रह गया|
हमारा संविधान महान
हमारा संविधान सभी धर्मों के नियम परम्पराओं के विरुद्ध होते हुए भी महान है| जिन्होंने इसका निर्माण किया, मान्यता दी वे निश्चित ही महान हैं|
रविवार, 9 अप्रैल 2017
भारत की जय
यदि संविधान में यह "भारत माता की जय" राष्ट्रीय नारा घोषित हो या कानून बना दिया जाय बोलने के लिए तब तो बोलना ही पड़ेगा | तब तक भारत की जय |
ईश्वर का जन्म
दरअसल जब संसार का रहस्य कुछ भी समझ में नहीं आया तो ईश्वर की कल्पना की गई| यही उनके जन्म की सच्ची कहानी है|
ईश्वर की सत्ता को मान लेने से सारे प्रश्न.. जन्म मृत्यु जीवन ...समाप्त हो जाते हैं| मन शांत हो जाता है|
शनिवार, 8 अप्रैल 2017
धर्म के परिणाम
विभिन्न धर्मों के परिणाम - ईश्वर अल्लाह गॉड देवी देवताओं को पटाने की कोशिश में हम मनुष्य मनुष्य से दूर होते गए|
शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017
गौदान
मरने के बाद आत्मा को गाय की पूँछ पकड़ कर वैतरणी नदी पार करना पड़ता है| आत्मा को तैरना नहीं आता| बाम्हन को एक गाय दान में चाहिए|
मन की शांति के लिए उपाय
मन की शांति के लिए कुछ सरल सुलभ प्रचलित उपाय हैं .
घर परिवार दुनियाँदारी से दूर हो जाना|
1_. कम समय के लिए- मंदिर मस्जिद चर्च, पूजा पाठ, भजन कीर्तन, सत्संग प्रवचन कथा सुनना, ...
2_. कोई नशा शराब गांजा....
३_.अधिक समय के लिए- बाबा बन जाना
क्या जरूरत है
ये पूजा पाठ भजन कीर्तन यज्ञ हवन नमाज प्रार्थना हमारे समाज से बुराइयों को दूर नहीं कर सकते तो इसकी जरूरत क्या है?
पाप मुक्ति के साधनों का आविष्कार
हमारे देश में लगभग सभी लोग धार्मिक आस्थावान पूजा पाठ यज्ञ हवन भक्ति भजन कीर्तन करते हैं फिर भी भ्रष्टाचार अपराध चोरी डकैती मार काट बलात्कार बढ़ रहे हैं लगातार...
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हमारे सारे पाप से मुक्ति के सरल सुलभ उपाय ब्राह्मणों द्वारा आविष्कार किए गए हैं| परिणाम
हमारे देश में भ्रष्टाचार अपराध चोरी डकैती मार काट बलात्कार बढ़ रहे हैं लगातार...
गुरुवार, 6 अप्रैल 2017
ग्रह दशा
ललित दार्शनिक _
अमेरिका और रूस जैसे देश दूसरे ग्रहों पर जीवन या फ़िर जीवन बचाने के लिये पृथ्वी जैसा दूसरा ग्रह ढूँढ़ने की कोशिश में रात -दिन एक किये हुए हैं वहीँ दूसरी तरफ़ हम अँगूठी में लगे पत्थर के द्वारा उन्हीं ग्रहों की दिशा बदलने में लगे हुए हैं l
पृथ्वी स्थिर है शेषनाग के सर पर
धार्मिक ग्रंथ के अनुसार शेषनाग के सर पर पृथ्वी स्थिर है. सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर प्रति दिन यात्रा करता है|
जो अपने दिमाग का उपयोग न करें. वे स्वीकार कर लेगा लेकिन गेलिलियो नहीं|.
बुधवार, 5 अप्रैल 2017
नास्तिक स्वतंत्र होता है
नास्तिक स्वतंत्र होता है अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है| वह किसी ग्रंथ से बंधा नहीं होता|
जो होता है अच्छा होता है|
P.M.Panda Mahapalli_
कहा जाता है कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। पर आजकल जो घृणित घटनाएँ होती हैं क्या वह किसी अच्छे के लिए है? चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार?फिर उसकी हत्या??
ये जो पहले से बनाकर रखी गई अवधारणाएं हैं निहायत ही घटिया व बकवास हैं।
मंगलवार, 4 अप्रैल 2017
धार्मिक ग्रंथों से शिक्षा
कहते हैं धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने से कुछ न कुछ शिक्षा मिलती है| इन ग्रंथों का इतना ही महत्व है तो ...
बालीवुड की सभी फिल्मों से कुछ न कुछ शिक्षा मिलती है| बस कुछ सोचने समझने की बात है|
वैसे ही इसी तरह बहुत सारे लेखकों के कथा उपन्यास भी ह क्या इन्हें धार्मिक ग्रंथ का दर्जा दिया जा सकता है?
प्यारे लाल अवारा, गुलशन नंदा,
कुशवाहा कांत, वेद प्रकाश काम्बोज, वेद प्रकाश शर्मा, ... .
सुरेन्द्र मोहन पाठक, ओम प्रकाश शर्मा,
इब्ने सफी बी ए, कर्नल रंजीत, मीना सरकार. हेडली चेईस, ....
वी वहानवी, मस्त राम, ...
बंकिम चन्द्र, रवीन्द्र नाथ, धर्मवीर भारती, रांगेय राघव, जयशंकर प्रसाद, कृष्ण चंदर, जैनेन्द्र कुमार, भगवती चरण वर्मा, प्रेम चंद, राहुल सांकृत्यायन, राजेन्द्र यादव, चतुरसेन शास्त्री, अमृत लाल नागर. ... ..
सम्पूर्ण विश्व के लिए एक धर्म एक संविधान
यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करने योग्य हो या धारण करते हैं वह धर्म है|
कुरान, मनु स्मृति, गीता रामायण में बताई गई हर बात/ नियम को क्या पालन करना/मानना संभव है? क्या आप ऐसा करते हैं?
(मैं केवल नमाज अदा करना, पूजा पाठ भक्ति की बात नहीं कर रहा)
धर्मों में बताई/ कही गई बातों के विपरीत भी हैं हमारे संविधान के नियम कानून|
विशिष्ट वर्ग द्वारा समाज के लिए बनाए गए विभिन्न धर्मों के नियमों को आज का शिक्षित वर्ग समाज के हित में मानने को तैयार नहीं है| इसी लिए लोकतंत्र द्वारा राष्ट्र के हित में सम्पूर्ण समाज के लिए नए नियम कानून बनाए गए जो संविधान कहलाता है|
आज का संविधान राष्ट्र के सम्पूर्ण समाज के हित में सभी धर्मों का संशोधित परिवर्तित रूप है|
लेकिन कई लोग वर्तमान संविधान के साथ साथ धर्मों के पुराने नियमों को भी पालन करना चाहते हैं | जबकि पूरा पूरा पालन करना संभव नहीं है|
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कुछ लकीर के फकीर धर्म में कोई परिवर्तन संशोधन पसंद नहीं करते| धार्मिक नियमों के विपरीत कोई नियम कानून संविधान में भी बनता है तो उसका विरोध करते हैं| उनका वश चले तो धार्मिक नियमों परंपराओं को यथावत संविधान में रख लें|
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बेहत्तर है सभी धर्मों का विसर्जन कर अपने अपने संविधान का पालन करें|
उम्मीद करें भविष्य में सम्पूर्ण विश्व के लिए एक संविधान हो|
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जय जगत|
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सोमवार, 3 अप्रैल 2017
खाली दिमाग
गलत कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर?
दिमाग में कचरा भरा हो तो नई बात कहाँ से घुसेगी| लकीर के फकीरों का दिमाग खाली नहीं रहता|
धर्म ने क्या दिया
बड़े आये आहत होनेवाले धर्म के नाम पर ! और कितना टाइम चाहिए ?
धर्मों ने क्या दिया हमको ? हमने तो उनको पांच हज़ार साल और चौदह सौ साल दिए ! फिर भी वही युद्ध, वही कुपोषण, वही गरीबी, वही रोग और बीमारियां, वही मुट्ठी भर लोगों का राज, वही औरतों की ग़ुलामी , वही जाति-व्यवस्था, वही प्रकृति का अंधाधुंध नाश ! आप दोनों पंडित-मुल्ला के फेरे में हम रहे तो पांच हज़ार साल बाद लौट कर भी यही देखेंगे। वही युद्ध, गरीबी और रोग-बलाय और आपलोगों का बजता हुआ रिकॉर्ड, "मेरा धर्म बनाम तुम्हारा धर्म !"
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रविवार, 2 अप्रैल 2017
धर्म का दुश्मन शिक्षा और विज्ञान
धर्म हमेशा शिक्षा और विज्ञान से नफरत करता है. क्योकि उसे पता है "क्यों का जबाब / कारण " और ज्ञान उसके जादुई सोच के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार हैं, जो एक दिन उसे खत्म कर देंगे.!
विरोधाभास
धार्मिक नैतिकता का विरोधाभास !
भारत के करोड़ों हिन्दू भक्ति ,पूजा ,प्रार्थना ,तीर्थयात्रा और साधु सेवा में कभी आंच नहीं आने देते ,परन्तु नित्य जीवन मैं नैतिक एवं अन्य अपराध करने से बाज़ नहीं आते। यदि देशभर के जेलों मैं विभिन्न अपराधों के कारण बंद अपराधियों का सर्वेक्षण किया जाये तो ९९ प्रतिशत कैदी विभिन्न धर्मों के कटर अनुयायी मिलेंगे जो जेल मैं भी अपने अपने धरम और उस के रीति रिवाज का पालन कर रहे हैं. उनसभी को पूरा विश्वास है कि अपराध कैसा भी हो,भगवानजी की आराधना एवं तुष्टिकरण से न केवल पापों से मुक्ति मिलती है वरन मरने के पश्चात दूसरे संसार मैं सुख सुविधा का अग्रिम प्रबंध हो जाता है. भगवानजी हमारे अपने आत्मीय हैं और हम उनसे कुछ भी नहीं छुपाते -वह हमारे राज़दार हैं पालनहार हैं।
युवाओं से
जो लकीर के फकीर नहीं बनना चाहते खास कर
युवा वर्ग के लिए_ ****
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लकीर के फकीर कुछ चालाक और स्वार्थी लोग नहीं चाहते कि नई पीढ़ी के दिमाग खुले हों|
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जो बिना सोचे समझे दूसरों की हाँ में हाँ मिलाते हैं, लिखी हुई या सुनी हुई बात को बिना विचारे स्वीकार कर लेते हैं वे अपने दिमाग का उपयोग नहीं करते|
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उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ो| इतिहास विज्ञान खूब पढ़ो| पढ़ कर सुन कर सोच विचार करो|
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हर बात पर प्रश्न करो| क्या? क्यों? कैसे?
सबसे महत्वपूर्ण है क्यों???
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जिनके पास कोई तर्क आधार युक्त जबाब नहीं होता वे गाली देने लगते हैं|
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जो इंटेलिजेंट होते हैं वे लकीर के फकीर नहीं हो सकते| वे विद्रोही होते हैं|
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दिमाग खुली रखो| तर्क करो| आधार सहित जबाब दो| जबाब न हो तो गाली मत दो|
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जो डिबेट पसंद नहीं करते वे सच जानना नहीं चाहते या जान बूझकर सच को उजागर होने देना नहीं चाहते |
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