रविवार, 27 अगस्त 2017

न्यायालय हमारी संस्कृति को बदनाम कर रही है?


Radheshyam Mahaseth
और इन सबके बीच भाजपा सांसद साक्षी महाराज के मीठे बोल | पढ़ लीजिए ,सुन लीजिए | दिल को शान्ति मिलेगी , सुकून होगा | जनतंत्र में आस्था बढ़ेगी | साक्षी महाराज ने कहा " न्यायपालिका को उसकी औकात में रहनी चाहिए , न्यायलय हमारी संस्कृति को बदनाम कर रही है , बाबा राम रहीम के है लाखों अनुयायी है , अपने फैसले पर विचार करे न्यायपालिका | " ठीक यही बात 2013 में उस वक्त उमा भारती बोली थी जब आसाराम को गिरफ्तार किया गया था | " तो क्या माना जाए , बलात्कार ही है हिन्दुस्तान की संस्कृति ? बलात्कारियों को बचाना ही हिन्दू धर्म है ?और बलात्कार के इस संस्कृति के खिलाफ फैसला देने अक्धिकार किसी में नही ? आरएसएस जिस संस्कृति की बात करता है ,क्या उसकी सच्चाई यही है ? और फिर सही -गलत का फैसला जब समर्थकों की संख्या देखकर ही होगी ,तब तो देश के सभी भ्रष्ट नेताओं के पास करोड़ों समर्थक है ? फिर तो वे सभी निर्दोष हुए | आपको बताते चले कि साक्षी महाराज खुद भी हिन्दू धर्म गुरु है | भगवा चोला धारण करते है | इनके ऊपर भी न्यायालय में बलात्कार और हत्या के दो मामले दर्ज है | क्या साक्षी महाराज को अपना काला भविष्य नजदीक आता दिख रहा है ? लेकिन सवाल साक्षी महाराज या किसी भोगी नाथ जैसों तक की नही है | चिंताजनक स्थिति तो यही है कि जब क़ानून बनाने वाली संसद में बलात्कारी बाबाओं को बैठने और बोलने का मौका मिलने लगे तो जाहिर है कार्यवाही बलात्कारियों के खिलाफ नही बल्कि बलात्कार पीड़ितों के ही खिलाफ होगी | आवाज इंसाफ के लिए नही बल्कि जुल्मियों के पक्ष में ही बुलंद होगी | और तब महिला सुरक्षा और समृद्धि की बात ,नेताओं के जुबान से मजाक नही तो क्या समझा जाए ? याद रहे उसी हरियाणा में पीएम मोदी ने बेटी बचाओ का नारा भी दिया था ,यूपी चुनाव के दौरान जोर -शोर से महिला सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया था | तो क्या अब मोदी अपने इस बेशर्म सांसद के खिलाफ कार्यवाही करेंगे ? उन दो महिलाओं के दर्द को समझेंगे जिसने ऐसे ताकतवर राम -रहीम के खिलाफ पिछले पन्द्रह सालों से लड़ाई लड़ रही , जिस राम -रहीम के चरणों में अमित साह शीश झुकाते है ,मनोहर लाला खट्टर नतमस्तक होते है ,भाजपा सहित तमाम दलों के नेता जिसकी आरती उतारते है ? क्या किसी नेता ने उन दो महिलाओं के पक्ष में बयान दिया ,उसके घर जाकर हौसला अफजाई की ? आप सोच लीजिए उन महिलाओं के ऊपर इन पन्द्रह सालों में कैसे -कैसे जुल्म हुए होंगे ? कितनी धमकियां मिली होंगी ? कितना सताया गया होगा ? मगर सलाम करिए उन दोनों महिलाओं को जिसने अपनी जिद्द और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की जूनून की बदौलत इस बलात्कारी बाबा को सलाखों में पहुंचा दिया ,जिस बाबा के समर्थन में आपके सांसद खुलकर बयान दे रहे है |और तब एक सवाल यह भी कि धर्म माना किसे जाए ?
इन बाबाओं के पाखण्ड और कर्मकांडों को , या फिर महात्मा गांधी के उस शब्द को जिसमे उन्होंने कहा कि " सत्य ही इश्वर है ,सेवा ही धर्म है " ,विवेकानंद के उन विचारों को जब उन्होंने कहा " मानव सेवा ,दीन -दुखियों की सहायता ही धर्म है " | वाकई अगर धर्म और धर्म गुरु के मायने आपके लिए वही रह गए है जो साक्षी महाराज ,राम -रहीम ,रामपाल ,आदित्यनाथ और आसाराम जैसे पाखंडियों के बोल है तब फिर दुनिया थूकेगी आपके इस धर्म और संस्कृति पर | दुनिया में कही मुंह दिखाने के लायक नही रहेंगे आप | और तब यूरोपीयन आपको असभ्य ,अशिक्षित ,गंवार नही तो क्या तार्किक ,बौद्धिक और विवेकशील समझेगा |

अंधापन

Santosh Vishwakarma
जरूरी नही आप मोतियाबिंद से ही अँधे हो।।
धर्म/मज़हब

आस्था बनाम तर्क

Suresh Soni
आस्था को मैं इसलिए सही नहीं मानता क्योंकि इससे सच को पहचानने की क्षमता नहीं रह जाती ! मैं तार्किकता को महत्व देता हूं |

बाबा राम रहीम का सच

Ruba Ansari -
#एनडीटीवी के प्राइम टाइम शो में स्वराज इंडिया पार्टी के प्रमुख योगेंद्र यादव ने बताया कि रेप पीड़िता साध्वी की इस गुमनाम चिट्ठी को पंचकूला के स्थानीय सांध्य दैनिक अखबार 'पूरा सच' में अक्षरश: प्रकाशित किया गया था. आरोप है कि इसके बाद राम रहीम के इशारे पर 'पूरा सच' अखबार के संपादक रामचन्द्र छत्रपति के घर में घुसकर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था. उसी चिट्ठी के आधार पर राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने रेपिस्ट करार दिया है. कोर्ट की ओर से गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद साध्वी की उसी गुमनाम चिट्ठी को दैनिक जागरण ने प्रकाशित किया है, आप पढ़िए किन शब्दों में पीड़िता ने बयां किया था दर्द-:
सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत सरकार
विषय : डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें.
श्रीमान जी, यह है कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा, हरियाणा (धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में सेवा कर रही हूं. मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 18-18 घंटे सेवा करती हैं. हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है. साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा योनिक शोषण (बलात्कार) किया जा रहा है. मैं बीए पास लड़की हूं. मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं, जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी.
साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्या साधु गुरुजोत ने रात के 10 बजे मुङो बताया कि आपको पिता जी ने गुफा (महाराज के रहने का स्थान) में बुलाया है. मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी. यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुङो बुलाया है. गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं. हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है. बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है. मैं यह सब देखकर हैरान रह गई. मुझे चक्कर आने लगे. मेरे पांव के नीचे की जमीन खिसक गई. यह क्या हो रहा है. महाराज ऐसे होंगे? ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. महाराज ने टीवी को बंद किया व मुङो साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है. मेरा यह पहला दिन था.
महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं. तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं, क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था. तो अब ये तन-मन हमारा है. मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं.
जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है तो उन्होंने कहा - श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे. फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं, यह कोई नई बात नहीं है. हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं. तुम्हारे घरवाले इस प्रकार से हमारे पर विश्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं. वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते. यह तुमको अच्छे से पता है. हमारी सरकार में बहुत चलती है.
हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं. राजनीतिज्ञ हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे. हम तुम्हारे परिवार के नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे. सभी सदस्यों को अपने सेवादारों (गुडों) से मरवा देंगे. सबूत भी नहीं छोड़ेंगे. यह तुम्हें अच्छी तरह पता है कि हमने गुंडों से पहले भी डेरे के प्रबंधक फकीर चंद को खत्म करवा दिया था जिनका अता-पता तक नहीं है. ना ही कोई सबूत बकाया है. जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे. 1इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन मास में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है.
आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं, उन सबके साथ मुंह काला किया गया है. डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं. जिन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है. इनमें ज्यादातर लड़कियां बीए, एमए, बीएड, एमफिल पास हैं, मगर घरवालों के अंधविश्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं.
हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख न उठाकर देखना, आदमी से 5-10 फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है लेकिन दिखाने में देवी हैं मगर हमारी हालत वेश्याओं जैसी है.
मैंने एक बार अपने परिवारवालों को बताया कि डेरे में सबकुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में होते हुए कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है. तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं.

प्रेम

Sunita Maya -

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति...

अरुण जैन
Shashi Atulkar
जब जब इस धरती पर अधर्म होगा
तब तब इस धरती पर भगवान जन्म लेगे !!
अब आपको समझ आ गया न की इस कलयुग में कोई अधर्म नहीं हो रहा इसलिए भगवान् ने भी रिटायरमेंट ले लिया 😊

आस्था की दुकानदारी

Manish Chouhan
आस्था की दुकानदारी:-
नमस्कार दोस्तो,भरे मन से ही सही आपके लिए आज का दिन शुभ होने की दुआ करता हूं।
रेप जैसे संगीन गुनाह पर एक ढोंगी बाबा को दोषी करार दिया जाता है और पूरे पश्चिमोत्तर भारत में उसके गुंडों का तांडव शुरू हो जाता है। इधर प्रधानमंत्री घोषणा करते हैं कि आस्था के नाम पर किसी की भी गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी (यह जानते हुए भी कि उनकी तो पार्टी ही इसी आस्था नाम की बुनियाद पर टिकी है) तो दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी का मुख्यमंत्री हालात को बेकाबू होने देता है। पार्टी का एक भी नेता इस ढोंगी बाबा की निंदा नहीं करता, बल्कि उसके एक सांसद साक्षी महराज उसके बचाव में यह कहते हुए खड़े हो जाते हैं कि उस पर केवल एक महिला ने आरोप लगाए हैं जबकि लाखों-करोड़ों लोग 'उनके' साथ खड़े हैं। यह वही सोच है, वही संख्या- बल है जिसके सहारे पार्टी निरंतर जनता की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील बनी रहती है।
न्यायालय में बहस पूरी हो जाने के बाद फैसले की तारीख भी तय हो जाती है फिर भी हरियाणा सरकार के दो मंत्री अनिल विज और राम विलास शर्मा 10 अगस्त को सिरसा के डेरे में (या यों कहें कि अड्डे पर) मनाए जा रहे ढोंगी बाबा के जन्मदिन समारोह में भाग लेने जाते हैं और 51 लाख का गिफ्ट चैक दे कर चले आते हैं। आत्मा पर लेषमात्र भी कोई बोझ नहीं। कोर्ट बार बार निर्देश देता है कि भीड़ को इकट्ठा मत होने दें, लेकिन प्रशासन है कि धारा 144 तक नहीं लगाता और कोर्ट में इसे क्लैरीकल भूल बताता है। तारीख, समय और तबाही मचाने वाले लोगों का पता होने के बावजूद हरियाणा सरकार नागरिकों के जान-माल की रक्षा नहीं कर पाती। इसे प्रशासन की काहिली और नाकामी कहें या अनावश्यक दबाव बनाने की सियासी चाल ! फैसला तो आपको करना है ।
बात केवल एक राजनीतिक पार्टी की हो ऐसा भी नहीं है। लगभग सभी पार्टियां इसी सिंड्रोम से ग्रस्त हैं। इस मामले में कांग्रेस,भाजपा और अकाली दल कोई भी अछूता नहीं है। आखिरकार सवाल तो एक करोड़ वोटों के एक साथ झोली आ गिरने की बात है भाई ! कैसे उस व्यक्ति के पांव न छुए जाएं? हमारे प्रधानमंत्री ने भी अगर छू लिए तो कौन सा आसमान टूट पड़ा !
लेकिन इस सब का दुखद पहलू यह है कि मीडिया या किसी भी नेता ने रेप की शिकार दोनों साध्वियों के प्रति सांत्वना का एक शब्द भी कहना मुनासिब नहीं समझा;
मामले को अंजाम तक पहुंचाने वाले सीबीआई जांबाज अफसर डीएसपी डागर की प्रशंसा में दो बोल नहीं बोले और न ही ढोंगी बाबा का पर्दाफाश करने वाले बहादुर पत्रकार राम चंद्र छत्रसाल के साहस और ईमानदारी को याद किया। याद रहे इस पत्रकार को इसकी कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी है। उसे काफी समय तक धमकियां दी गई, फिर भी नहीं माना तो गोली मार कर हत्या कर दी गई । गोली लगने के बावजूद पीजीआई, चंडीगढ़ में ईलाज के लिए दाखिल वह व्यक्ति बीस दिन तक जीवित रहता है और बयान देना चाहता है लेकिन हरियाणा पुलिस उसका बयान तक नहीं लेती।
एक हो तो बात भी की जाए। पूरे देश में कुकरमुत्तों की तरह उग आए और मौजूद ऐसे ही ढोंगियों के आश्रम निरीह जनता की आस्था का ही कारोबार करते हैं। भूल जाइए कि कोई भी आपको इनके मोहपाश से कभी आजाद कर सकता है। नेता लोग तो इन्हें बढ़ावा देकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे रहेंगे ; अपनी मदद तो आपको स्वयं ही करनी होगी।

बाबा राम रहीम

हे बाबा!  तुम्हारी दिव्य शक्ति कहाँ गई?

बाबा राम रहीम क्या देश भक्त हैं

कोई बताएंगे ये बाबा राम रहीम और उनके भक्त भारत माता की जय बोलते थे या नहीं?

मंगलवार, 22 अगस्त 2017

उन्हें पता नहीं मजहब क्या है

Neha Thakur > ‎Friends are Friend
शुक्र है परिंदों को नहीं पता
उनका मजहब क्या है �
वरना आसमाँ से भी खून की बारिश ☔ � होती
#नेहाठाकुर��

धर्म कर्म

Suresh Soni
मेरा एक मित्र -
धर्म कर्म में भी तो पैसा लगाया करो , दान दिया करो | मंदिर निर्माण पट्टिका में बहुत लोगों के नाम हैं पर आपका नाम नही है |
मेरा जवाब -
धर्म कर्म में पैसा खर्च करता तो हूं | किसी गरीब बच्चे की फीस भरना , कापी किताब खरीद कर देना , आपके लिए धर्म भले न होगा पर मेरे लिए यही धर्म है |
मंदिर के लिए दान देने वाले बहुतेरे मिल जाएंगे पर गरीबों की समस्या को कौन देखता है ?

अंतर्विरोध

Dinesh Sharma _
यदि कोई पौराणिक गाथा होती तो इसे रचनाकार की कल्पना मान सकते थे या किसी चीज़ का सांकेतिक वर्णन समझ कर छोड़ा जा सकता था। आखिर किसी स्त्री की पवित्रता का मापदंड उसके ‘अग्निरोधी’ होने में कैसे हो सकता है? यदि ऐसा ही है तो सभी
पवित्र स्त्रियों को ‘अग्निरोधी’ होना चाहिए। पर ऐसा संभव नहीं है क्योंकि पवित्रता आप के शरीर पर कोई ‘अग्निरोधी कवच’ नहीं चढ़ा देती।
Like · Reply · 1 · 41 mins
Dinesh Sharma
Dinesh Sharma ऐसा कर के कौन सा आदर्श स्थापित होता है – यह भी स्पष्ट नहीं है। बल्कि इस से सैंकड़ों पीढ़ियों तक स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार की छूट दे दी गयी। किसी स्त्री के सतीत्व के परीक्षण की ऐसी अवधारणा वेदों और मनुस्मृति के बिलकुल ख़िलाफ़ है।

संकीर्ण नहीं

Ravi Kumar
फ़िल्मी दुनिआं के लोग संकीर्ण मानसिकता से बहुत ऊपर उठ चुके हैं आज न वो हिन्दू हैं और न मुसलमान वो लोग सिर्फ इंसान हैं. एक ही परिवार में हिन्दू नाम और मुस्लिम नाम मिल जायेंगे. वो मंदिर भी जाते हैं और मस्जिद भी . वो लोग ईद भी मानते हैं और दिवाली भी, और हम अभी भी भ्रमित हैं की शाहरुख़ खान मुसलमान हैं और ऋतिक रोशन हिन्दू .

हम इंसान इंसानी दुनियां के लिए नियम बनाएंगे

Nikhilesh Mishra
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारतीय गणराज्य का नागरिक होने के नाते ख़ुशी से ज्यादा मुझे दुःख है कि 5 में से मात्र 2 न्यायाधीश ये कहने का साहस जुटा पाये कि तीन तलाक संविधान की आत्मा के विरुद्ध है। मुझे हैरत है उन दो माननीयो की सोच पर, जिनके अनुसार तीन तलाक सिर्फ इसलिए जायज है क्योंकि ये हजार साल से चली आ रही प्रथा है?
हजार लानत है उस तीसरे न्यायधीश पर, जिनके अनुसार तीन तलाक सिर्फ इसलिए नाजायज है क्योंकि ये कुरान का हिस्सा नही है? ये संविधान की आत्मा के लिए शर्मनाक पल है कि इतनी जद्दोजहद के बावजूद इस देश के माननीय अभी तक हलाला और बहुविवाह जैसी अमानवीय प्रथाओ की सुनवाई करने का आत्मबल नही दिखा पाये और इस मुद्दे को भविष्य की सुनवाई के लिए टाल दिया गया है?
देश की सर्वोच्च न्याय संस्था में धर्मसत्ता के विरुद्ध खड़े होने के साहस का अभाव क्यों है?
.
प्राचीन इस्लाम का हिस्सा मात्र होने के कारण अगर सब कुछ जायज है तो क्या इस्लाम छोड़ने पर व्यक्ति के क़त्ल के फरमान पे माननीय ठप्पा लगायेगे?
अगर हजारो साल की परम्परा मात्र किसी अमानवीय प्रवत्ति को क़ानूनी जामा पहनाने के लिए पर्याप्त है तो क्या माननीय हिन्दुओ की प्राचीन प्रथाए जैसे सती प्रथा, बाल विवाह आदि को क़ानूनी संरक्षण प्रदान करेगे?
आखिर इस्लाम के नाम पे ही माननीयो के मुह में दही क्यों जम जाता है?
सौहार्द बिगड़ने का डर है अथवा इस्लाम के चरमपंथ से जीवन का भय?
.
ये बात इस देश के हर नागरिक को समझ लेनी होगी की ये देश हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाइयो के ईश्वर के बनाये कानून से नही चलेगा।
संवैधानिक संस्थाये चलती है.. शक्ति के जोर से !!!
Power To Enforce !!!!
.
देश के संविधान ने नागरिको को अपने धार्मिक मान्यताओ में विश्वास रखने की आजादी मात्र दी है लेकिन समानता और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर जहां आपके विश्वास संविधान से टकराएंगे.. वहा नागरिको की नियति का फैसला आपका अल्लाह अथवा भगवान नही बल्कि.. कानून का डंडा करेगा !!!
.
मैं सही मायने में भारत का पुनर्जागरण तभी मानुगा जब भारत की सर्वोच्च संस्थाये बिना लिंग,जाति, मजहब के भेदभाव के अपनी अंतिम नागरिक के मौलिक अधिकारो की सुरक्षा के लिए खड़े हो कर सबके लिए समान कानून यानी समान नागरिक संहिता लागू कर पाने का साहस दिखा पाएगी।
.
प्रधान सेवक जी। गेंद अब आपके पाले में है। आसमानी खुदा की सल्तनत के विरुद्ध खड़े होने का साहस दिखाइए। तभी सही मायने में मानवता के नायक कहलायेगे
.
हम इंसानो ने ये खूबसूरत दुनिया, चमकते चाँद सितारे, ब्लैकहोल्स, न्युट्रान, प्रोट्रान आदि नही बनाये हैं।
लेकिन.. इस दुनिया की बेहतरी के लिये फैसले.. हम लेते हैं !!!
पृथ्वी पर खुदाओं, ईश्वरो, आसमानी फरिश्तों की जरुरत नही है।
इंसानो की दुनिया के नियम हम इंसान स्वयं बनायेगे
Our Decision !!!
...........विजय सिंह ठकुराय

सोच बदलो

DC Yadav
*कटु सत्य*
◆ जिन देशों में गाय की पूजा नहीं होती, वहां की गायें ज्यादा दूध देती हैं और प्लास्टिक व सड़कों का कचरा भी नहीं खाती।
◆जिन देशों में किसी नदी में स्नान करने से पाप धुलने की बात नहीं कही जाती है, वहां की नदियां अधिक साफ व शुद्ध पायी जाती हैं।
◆ जिन देशों में स्त्रियों की पूजा नहीं होती, वहां की स्त्रियाँ से कम बलात्कार होते हैं और वे अधिक स्वतंत्र होती हैं।
◆ जिन देशों में धर्म व्यक्तिगत विषय की चीज़ है, वो देश ज्यादा विकसित और ताकतवर हैं और वहां कभी सांप्रदायिक दंगे नहीं होते।
◆ जिन देशों में लोग धर्म और जाति में बंटे नहीं होते और कोई भी समस्या सबकी सामूहिक जिम्मेदारी होती है, वहां सारे काम मिलकर किये जाते हैं।
● जिस देश में साधू व मौलवी अधिक नहीं होते उस देश में वैज्ञानिक अधिक होते हैं।
● केवल बातें करने से बदलाव नहीं आने वाला, जरुरत सोच बदलने की है, कमी हमारी मानसिकता में भी है।

कोई धर्म अंतिम सत्य नहीं

Tufail Chaturvedi with Abhay Ranjan and 44 others.
22 अगस्त की सुब्ह बहुत अच्छी है। सुप्रीम कोर्ट जिसके 5 जजों की बैंच, विभिन्न धर्मों के जजों से बनाई गई थी, ने तीन तलाक़ को बहुमत से अवैध ठहवराया है। इसके परिणामस्वरूप भारत में लगभग 9 करोड़ मुस्लिम औरतों के सर से 24 घंटे झूल रही अस्थिरता की तलवार हट गई। जब तक चाहा रक्खा, भोगा और जब दिल से उतर गई, तीन तलाक़ कह कर चुटिया पकड़ कर घर से निकाल बाहर किया।
थीं अल्लाही खेतियाँ मियाँ रहे थे जोत
टाँग अड़ाई कोर्ट ने मुँह पर स्याही पोत
जनार्दन पांडे प्रचण्ड
ज़ाहिर है यह क्षण किसी भी सभ्य व्यक्ति से प्रसन्न होने का है। आख़िर हर मुसलमान पुरुष पति होने के साथ-साथ किसी मुस्लिम महिला का बेटा, किसी मुस्लिम महिला का भाई, किसी मुस्लिम महिला का पिता भी तो है। इस निर्णय से अगर उसकी पति के नाते असीमित दुष्टता पर रोक लगी है तो बेटे, भाई, पिता के नाते जीवन में सुखदता भी तो बढ़ी है।
उर्दू की निर्विवाद सबसे बड़ी लेखिका इस्मत चुग़ताई के शब्दों में कहूँ तो मुँहझौंसे दाढ़ीज़ार मुल्ला ऐसे बिलबिला रहे हैं जैसे ततैयों का छत्ता ही पीछे पड़ गया हो। इसका कारण समझने जैसा है।
मुहम्मद का क़ुरआन के संदर्भ में आख़िरी सम्बोधन है। यह सूरा मायदा आयत 3 में आता है। "ऐ मुसलमानों आज तुम पर तुम्हारा दीन मुकम्मल हुआ।" इस्लाम अपने दावे के अनुसार संसार के अंतिम क्षण तक मनुष्यों के लिये सम्पूर्ण, उपयुक्ततम जीवन शैली है। इस फ़ैसले ने उसके मुकम्मल होने के दावे की दीवार से ईंटें खिसका दीं। यह जिहालत के किले की दीवार गिर जाने के बराबर है।
अभी टी वी पर एक मुल्ला बहस में कह रहे थे। इस्लाम अल्लाह का दीन है। इस्लाम किसी के ताबे नहीं रहता। आपको मुसलमान रहना है तो इस्लाम के ताबे रहना होगा। यह क़दम किसी स्त्री-पुरुष के इस्लाम के ताबे रहने की जगह मनुष्यता के ताबे रहने की ओर छोटा सा क़दम है। मनुष्यता अर्थात जिस समाज में हर व्यक्ति के अधिकार क़ानूनी रूप से समान हैं। हर स्त्री पुरुष क़ानूनी रूप से बराबर हैं। जहाँ जीवन की तार्किक स्वतंत्रता होती है। ये उस बर्बर और असभ्य सोच को त्यागना है जहाँ ससुर बहू का रेप कर दे तो मुल्ला पार्टी बहू को ससुर के हवाले करने का फ़तवा दे देती है। ( प्रसंग मुज़फ़्फ़रनगर का इमराना कांड स्मरण करें )
यह एक छोटा सा फ़ैसला सही मगर इससे न जाने कितनी गंदगी को नष्ट करने के रास्ते खुलेंगे। आइये चलते-चलते आपको मुकम्मल दीन होने के दावे के प्रामाणिक उल्लेख दिखाता चलूं।
जाफ़र अल सादिक़ शिया लोगों के 12 इमामों में से 6वें इमाम हैं और मुहम्मद के परपोते, सड़पोते कुछ हैं, ने तथा कई अन्य इस्लामी न्याय व्यवस्था देने वाले लोगों ने महरम यानी माँ, बहन, बेटी, फूफी, ख़ाला इत्यादि के साथ लिंग पर रेशम लपेट कर कुछ शर्तों के साथ निकाह/सैक्स की व्यवस्था दी है।
सन्दर्भ अल मुग़नी बानी इमाम इब्ने-क़दामा वॉल्यूम 7 पेज नम्बर 485
जवादे-मुग़निया बानी इमाम जाफ़र अल सादिक़ वॉल्यूम 5 पेज नम्बर 222
फ़िक़हे-इस्लामी बानी मुहम्मद तक़ी अल मुदर्रिसी वॉल्यूम 2 पेज नम्बर 383
जब तक आम मुसलमान के दिमाग़ में इस्लाम के अंतिम सत्य होने के दावे पर संदेह नहीं उपजेगा। उसके सृष्टि के अंतिम क्षण तक की उपयुक्ततम जीवन शैली होने के दावे की जगह कालबाह्य व्यवस्था होने का विश्वास नहीं उभरेगा, आतंकवाद की समस्या का समाधान नहीं होगा। यह फ़ैसला आतंकवाद के ख़ात्मे की ओर बड़ा क़दम भी है।
तुफ़ैल चतुर्वेदी

पुनर्जन्म?

Rattan Lal Gottra
🔴🔴🔴🔴
अगर पुनर्जन्म सही है तो श्राद्ध-पक्ष कैसा?
धर्म के “धंधे” का सबसे हास्यास्पद और विकृत रूप देखना है तो पितृ पक्ष श्राद्ध और इसके कर्मकांडों को देखिये. इससे बढ़िया केस स्टडी दुनिया के किसी कोने में आपको नही मिलेगी. एसी भयानक रूप से मूर्खतापूर्ण और विरोधाभासी चीज सिर्फ विश्वगुरु के पास ही मिल सकती है. एक तरफ तो ये माना जाता है कि पुनर्जन्म होता है, मतलब कि घर के बुजुर्ग मरने के बाद अगले जन्म में कहीं पैदा हो गए होंगे. दूसरी तरफ ये भी मानेंगे कि वे अंतरिक्ष में लटक रहे हैं और खीर पूड़ी के लिए तडप रहे हैं.
अब सोचिये पुनर्जन्म अगर होता है तो अंतरिक्ष में लटकने के लिए वे उपलब्ध ही नहीं हैं. किसी स्कूल में नर्सरी में पढ़ रहे होंगे. *अगर अन्तरिक्ष में लटकना सत्य है तो पुनर्जन्म गलत हुआ*. *लेकिन हमारे पोंगा पंडित दोनों हाथ में लड्डू चाहते हैं इसलिए मरने के पहले अगले जन्म को सुधारने के नाम पर भी उस व्यक्ति से कर्मकांड करवाएंगे और मरने के बाद उसके बच्चों को पितरों का डर दिखाकर उनसे भी खीर पूड़ी का इन्तेजाम जारी रखेंगे.*
अब मजा ये कि कोई कहने पूछने वाला भी नहीं कि महाराज इन दोनों बातों में कोई एक ही सत्य हो सकती है ... उसपर दावा ये कि ऐसा करने से सुख समृद्धि आयेगी. लेकिन इतिहास गवाह है कि ये सब हजारों साल तक करने के बावजूद यह देश गरीब और गुलाम बना रहा है ..... बावजूद इसके हर घर में हर परिवार में श्राद्ध का ढोंग बहुत गंभीरता से निभाया जाता है .... और वो भी पढ़े लिखे और शिक्षित परिवारों में .... ये सच में एक चमत्कार है.👁🙏🏼👁
- ओशो
♣♣♣♣

खुद को जगाओ

Rattan Lal Gottra
जगाना खुद को है
और पत्थरों को
घंटा बजाकर जगाते हो।
अंधेरा मन में है,
और दीये
मंदिरों मे जलाते हो
सपने आपके हैं और उम्मीद
पंडे पुजारियों से लगाते हो

रविवार, 20 अगस्त 2017

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

Swami Balendu जब मैं सुनता हूँ "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा" तो ये "विजयी विश्व" सुनकर मेरे मन में युद्ध, रक्तपात और मारकाट का चित्र उभर आता है! क्योंकि बिना इसके कोई "विजयी विश्व" हो भी कैसे सकता है? इतिहास में भी जब किसी ने "विश्व विजयी" होने की कल्पना से कदम बढ़ाया तो उसने खून खराबा ही मचाया. आखिर कोई भी "विजयी विश्व" या "विश्व गुरु" क्यों होना चाहता है? ये कल्पना ही कितनी हिंसक है! हम विद्यार्थी बनकर सभी जगह से कुछ भी अच्छा सीखने का प्रयास क्यों नहीं कर सकते! आखिर अपने घर, गाँव, देश से किसे प्रेम नहीं होगा! मुझे भी है परन्तु माफ़ करना मैं राष्ट्रवादी नहीं हूँ और सोचता हूँ कि जैसे मुझे अपनी जगह से प्रेम है वैसे ही अन्य देशों में रहने वालों को भी होगा! फिर मैं "विश्व विजयी" क्यों बनना चाहूँगा! आखिर सबको अपनी जगह से प्रेम करने और अपने ढंग से जीने का अधिकार है!

हमारी दिमागी गुलामी

Swami Balendu 70 साल हो गए आपको राजनैतिक रूप से स्वतंत्र हुए, परन्तु यदि आप किसी भी संगठित धर्म के अनुयायी हैं तो आपका मन मस्तिष्क अभी भी गुलाम है! हर संगठित धर्म आपके सोचने समझने की शक्ति पर कुठाराघात करके काल्पनिक भ्रम, भय और लालच में फँसा देता है. सही मायने में आप स्वतंत्र तब होंगे जबकि स्त्री और शूद्र को पाप योनि बताने अथवा धरती को चपटी बताने वाली, अन्धविश्वास, रूढ़ियाँ, संकीर्णता और नफरत फैलाने वाली किताबों से स्वयं को मुक्त करके अपने विषय में कुछ खुद के दिमाग से भी विचार करेंगे. याद रखिये हजारों सालों से मानवता की जितनी हानि धर्म ने करी उतनी किसी ने भी नहीं करी. आज भी इन मजहबों के कारण इंसानियत का खून बह रहा है. स्वतंत्र करो खुद को इनसे, हिन्दू और मुसलमान नहीं इंसान बनो.