सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016
Sudhir Kumar Jatav _ साभार : Manoj Abhigyan एक हिन्दू धर्मगुरू शिवानन्द ने अपनी एक पुस्तक मे गायत्री मंत्र के बारे मे लिखा कि इसका जाप करने से आदमी सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्त हो जाता है. ये बात एक जर्मन जर्नलिस्ट ने पढ़ी और उछल पड़ा. उसने सोचा... ये आदमी जीनियस है, जिसने इतनी बड़ी ईजाद कर दी. दुनिया भी पागल है... पता नही किस किस को नोबल पुरस्कार दे देती है... यह पुरस्कार तो इस डॉ शिवानंद को देना चाहिए. सारी बीमारियाँ एक झटके मे ख़तम!! उसे शक की कोई गुंजाइश भी नही लगी क्योंकि शिवानंद एक क्वालिफाइड डॉक्टर था... सो ऐसा आदमी जब आध्यात्म मे उतरेगा तो तथ्य के साथ ही बोलेगा.. पूरा निरीक्षण करके ही बोलेगा. अब उस बेचारे को क्या पता कि भारत मे ऐसे बोलने वाले गली- गली मे मिल जाएगें. क्या डॉक्टर और क्या इंजिनियर... यहाँ सारे पढ़े लिखे पागल बसते हैं... विज्ञान पढ़ लिया है पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण किसी का नही है. अंततः वो जर्नलिस्ट भारत आया और ढूँढता-ढूँढता डॉ शिवानंद के आश्रम पहुँच गया. उसे वहाँ शिवानंद का चेला मिला. उसने चेले से कहा कि मुझे डॉ. शिवानंद से मिलना है. चेला बोला कि आप अभी गुरुजी से नही मिल सकते. कारण पूछने पर चेले ने बताया कि गुरुजी बीमार हैं सो अभी नही मिल सकते, दो चार दिन बाद आना. वो जर्मन जर्नलिस्ट हैरान रह गया. उसने कहा कि खुद शिवानंद ने लिखा है कि इस मंत्र से समस्त बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं तो वो इसका जाप करके ठीक क्यों नही हो जाते ? अब चेला बेचारा क्या बोलता, असलियत तो सभी को पता है. असल धंधा कुछ और होता है, ये तो दिखावे के बोल बचन है. खैर, चेले ने उसे सारी असली बात बता दी कि ऐसा कहते तो हैं पर होता कुछ नही. वो बेचारा जर्नलिस्ट अवाक् रह गया... इतना बड़ा फ्रॉड !!! वो वापस जर्मनी चला गया.
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