Ram Bahadur Pandey _
🌹प्रायः सभी कथित धर्मों के धर्माचारियों ने एक अन्धों का समाज निर्मित किया और कहा कि तुम्हें अपनी आंखों की कोई आवश्यकता नही है| तुम्हें देखने की नहीं, बस भरोसे की ,श्रद्धा की अनुकरण करने की जरूरत है| इन धर्माचारियों ने यह कहते हुए कि तुम सोचोगे ,विचार करोगे और चिन्तन करोगे तो असली मार्ग से भटक जाओगे , सोचने समझने व चिन्तन करने के अधिकार से वंचित कर दिया ।
ऐसा लगता है कि यह तथाकथित धर्माचारी नही चाहते किसी की सन्देह की धार तेज हो या बुद्धि पैनी हो । वह यही चाहते हैँ कि सब मरे मरे से , किसी तरह अपने को घसीटते हुए मन्दबुद्धि और प्रतिभाहीन बने रहें । इन धर्माचारियों ने मन्दबुद्धि बनाने मे सफलता ही नहीं हासिल की बल्कि इनके हाथ मे विश्वास और श्रद्धा नामक झुनझुना भी पकड़ा दिया , जिसे हम आंख बन्द करके बजाते फिर रहे हैँ ।🌷
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016
धर्म का झुनझुना
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