कांग्रेस के अधिकतर सदस्य गांधी जी के शांतिपूर्ण अहिंसक आंदोलन के समर्थक थे जबकि सुभाष जी सशस्त्र आंदोलन के समर्थक थे । जयप्रकाश नारायण ने अपनी आत्म कथा में लिखा है - 'गांधी जी का रास्ता सुविधाजनक लगा इसलिए हम उनके साथ हो गए ।"
गांधी और सुभाष के रास्ते अलग अलग थे किंतु मकसद एक ही था देश की आजादी ।
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019
गांधी सुभाष के रास्ते अलग किंतु मकसद एक देश की आजादी
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