जो लिखता है वह लेखक है चाहे चिट्ठी ,डायरी ही ही लिखे या अपने स्कूल में स्वतंत्र निबंध लिखे ।
जो रचना करे वह रचनाकार है चाहे उसे कचरा, घास फूस कहा जाय । लेकिन ऐसे लेखकों रचनाकारों को साहित्यकार नहीं कह सकते ।
उच्च स्तर के लेखकों कवियों को को पढ़ने से बहुत मिलता है लेकिन कचरे घास फूस से भी कुछ तो मिलता है ।
लेख, कहानी, कविता रचना है जो एक विचार ही होता है, भाषा शैली का स्तर ऊंच नीच हो सकता है ।
हम भी घास फूस कविता लिखते हैं ।
घास फूस को साहित्य नहीं कहा जा सकता ।
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
रविवार, 20 अक्टूबर 2019
घास फूस कविता हम भी करते हैं
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