किसी को भी अपने संविधान, अपने धर्म की जानकारी अधिक होती है । उसे अपने संविधान, धर्म की बुराई देख समझ कर बतानी चाहिये। अगर वह दूसरे संविधान धर्म की जानकारी रखता है तो उस पर भी बताए लेकिन कम ।
बुराई को जानकर समझ कर देश काल परिस्थिति अनुसार आवश्यक संशोधन होना चाहिए ।
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