फेसबुक में एक पोस्ट_
"""""" अंत मे शास्त्री जी युद्ध के बाद समझोता करने ताशकंद गए ! और फिर जिंदा कभी वापिस नहीं लौट पाये !! पूरे देश को बताया गया की उनकी मृत्यु हो गई ! जब कि उनकी ह्त्या कि गई थी !!
******* मेरा विचार_
पाकिस्तान ने पहले हमला किया था| दोनो. देशों के जन धन की बहुत हानि हो रही थी|| युद्ध में भारत की जीत रहा था| भारतीय सेना सीमा से आगे दूर तक बढ़ चुकी थी| इस स्थिति में ताशकंद में समझौता हुआ| उसके पालन में युद्ध बंद हुआ|
हमारे प्रधाम मंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी आज के नेताओं जैसे नहीं थे| वे एक सरल स्वभाव के ईमानदार देश प्रेमी थे| समझौते में हस्ताक्षर करने के बाद रात को सोते समय वे सोचने लगे | यह तो गलत हुआ| पाक ने हमला किया| हम जीत रहे थे| बिना कोई क्षतिपूर्ति लिए, निःशर्त समझौता हमारे हित में नहीं हुआ| बहुत गलत हुआ| वे चाहते तो भारतीय सेना जहां तक पहुंची थी उस पर हमारा कब्जा और क्षति पूर्ति की शर्त रखी जा सकती थी| इसके लिए वे खुद को जिम्मेदार मानकर रात भर छटपटाते रहे| बहुत तनाव में हृदयाघात से मृत्यु हो गई|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
बुधवार, 22 मार्च 2017
शास्त्री जी की मृत्यु
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