सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

सीता की ब्यथा

Secular

कन्या पूजन

ठग

बैठ जाता हूं मिट्टी में अक्सर _ हरिवंश राय बच्चन की कविता

https://youtu.be/sGnASaK6S5U

अजब गजब plastic girl

https://youtu.be/qQ8IOHp6zcc

बैठ जाता हूँ मिट्टी में अक्सर _ हरिवंश राय बच्चन

बैठ जाता हूँ मिट्टी में अक्सर _ हरिवंश राय बच्चन

अजब गजब plastic

धंधा

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

सावधान सावधान

सावधान सावधान

Shashi Atulkar _

तलाक-- दिनेश कुमार प्रजापति _ कोई आलिमे दीन जब निकाह के समय लड़की की हाँ जरूरी होती हे तो तलाक के समय क्यों नही ??

विज्ञान _ वैज्ञानिक सोच से किसे नुकसान? मुल्ला मौलवियों, पंडित पुरोहित, साधू संतों को..

आस्था पर चोंट- किसी वैज्ञानिक विश्लेषण / विचार का कोई जबाब न हो तो कहते हैं हमारी धार्मिक आस्था पर चोंट पहुंचा रहे हैं| अरे वाह! ये सड़ी गली परम्पराएं हमारी वैज्ञानिक आस्था पर चोंट पहुंचाती है| तो कानून को इस पर भी विचार करना चाहिए|

हम सब धार्मिक हैं | हमें भगवान पर पूरा विश्वास है | वे हमारे हर गलत काम को माफ कर देंगे| तो फिर हम भ्रष्टाचार में अब्बल रहेंगे ही|

संजय कुमार _ जानिए क्या है मनोचकित्सा- मेरे एक रिस्तेदार हैं( किसी कारण से उनका नाम नहीं ले सकता) . कल उनके घर जाना हुआ तो पता चला की उनकी पत्नी कई दिनों से बीमार हैं , कई डॉक्टर्स से उन्हें दिखाया किन्तु कोई लाभ न हुआ ।उनका दावा है की डॉक्टर्स तो उनकी पत्नी के रोग के बारे में पता भी न कर पाएं । इसलिए थक हार के वे निराश हो चुके थे तब एक दिन किसी पडोसी ने उन्हें गाजियाबाद के एक बाबा का नाम बताया ।यह बाबा मंत्रो के जरिये लोगो को ठीक करता है , मन्त्र मार जल पीने को देता है मरीजो को । उस तांत्रिक के अभिमंत्रित जल से रिस्तेदार की पत्नी ठीक होने लगी हैं और पहले से आराम है ऐसा वह कह रहे हैं । पर ,जंहा तक मुझे समझ आया है की यह सब ढोंग है ,वह बाबा लोगो को मुर्ख बना रहा है । तन्त्र मन्त्र से ठीक होने का दावा करने वाला व्यक्ति 99.9% कंही न कंही मनोरोगी होता है जिसके बारे में उसे भी नहीं पता होता है । मनोचकित्सको के अनुसार मनोरोग सैकड़ो प्रकार के होते है जिसे फोबिया भी कहते हैं ,अमूमन भारत में मनोरोग के बारे में बहुत कम जागरूकता है ।गाँव -देहात में ही नहीं शहरों में भी लोग या तो मनोरोग के बारे में जानते ही नहीं या मानते ही नहीं की उन्हें मनोरोग हुआ है ।जबकि अधिकतर व्यक्ति मनोरोग के शिकार होते हैं जिसमे सनक से लेके पागलपन तक शामिल है । मेरा एक मित्र है जो मंगलवार को शराब नहीं पीता जबकि अन्य दिन खूब पी सकता है । मंगलवार को शराब या मांस से परहेज करने वाले आप के आस पास भी बहुत होंगे ।इसका कारण बेशक वे 'श्रद्धा 'अथवा 'आस्था ' कहें किन्तु मनोचकित्सको के अनुसार यह 'मनोरोग ' है । यदि भूल से वह व्यक्ति मंगलवार को मांस या शारब पी ले तो उसे यह भयंकर अपराध बोध लगेगा जो और यह अपराधबोध सामान्य से पागलपन की हद तक जा सकता है ।जिसमे यदि व्यक्ति का कभी कोई अनिष्ट हो जाता है तो उसका कारण वह उसी अपराधबोध को मानेगा , अतः वह टोने टोटके करेगा या पागलपन वाली हरकत करेगा। यही मनोरोग है ,यह कम या ज्यादा इस पर निर्भर करेगा की वह आपनी आस्था के प्रति कितना अंधभक्त है । आपने अभी हाल की घटना सुनी या पढ़ी होगी की एक जैन परिवार ने आस्था के चलते अपनी 13 वर्षीय पुत्री को 64 दिनों से उपवास पर रखा जिसके चलते उस लड़की की मृत्यु हो गई ।यह मनोरोग का चरम था जिसके चलते परिवार ने लड़की को भूँखा मार दिया । प्रसिद्ध वैज्ञानिक फ्रायड ने सिद्ध किया था की मानव मन के तीन धरातल होते है जो इस प्रकार है - 1-चेतन 2-अचेतन 3-अवचेतन मन तीन प्रकार के कार्य करता है -इच्छाओ का निर्माण, इच्छाओं पर नियंत्रण और उनकी संतुष्टि । पहला काम भोगा पर आश्रित मन का है ,दूसरा नैतिक मन का और तीसरा अहंकार का ।इच्छाओं का निर्माण अचेतन मन में होता है , उसका नियंत्रण अवचेतन मन में और उसकी संतुष्टि चेतन मन में । जब भोग की इच्छित मन और नैतिक मन का संघर्ष अवचेतन मन में चला जाता है और इच्छाओं को संघर्षपूर्वक कठोरता से नैतिक मन द्वारा दबा दिया जाता है तब यह संघर्स अचेतन मन में चलने लगता है तब यही संघर्ष ही ' रोग' बन जाता है ।यह इच्छाये अनगिनत प्रकार की हो सकती है अतः मनोरोग भी अनगिनत प्रकार के होते हैं । फ्रायड ने इस संघर्ष से व्यक्ति के मन को मुक्त करने की प्रक्रिया को ही ' मनोचकित्सा 'कहा है ।अचेतन मन में चल रहे नैतिक और इच्छित मन के संघर्ष के रेचन और चेतन मन को संतुष्टि ही मनोचकित्सा है । बहुत बार ऐसा होता है की लंबे समय तक डॉक्टर्स की दवाइयाँ खाने के बाद व्यक्ति जब ठीक होने की अवस्था में पहुंचता है तब वह बाबा या तांत्रिक की शरण में पहुँच जाता है ।चुकी उस उसे लगता है की दवाइयाँ खाने से कुछ नहीं हो रहा है इसलिए वह बाबा पर आस्था रख के आता है , और यही आस्था उसे यह विश्वास दिलाती है की बाबा उसे ठीक कर देंगे ।बाबा उन्हें अहसास दिला देता है की उसका मन्त्र तंत्र उसे ठीक कर देगा , तब यब आस्था काम आती है और दवाईयो का श्रेय बाबा ले जाता है ।चेतन मन संतुष्ट हो जाता है और मरीज को लगता है की वह ठीक हो गया है। यही सब मेरे उस रिस्तेदार की पत्नी के साथ भी हुआ , बाबा के प्रति आस्था और उसका विश्वाश दिलाने से उनके चेतन मन को संतुष्टि हुई और उन्हें लगा की वह ठीक हो रही हैं ।जबकि तंत्र मन्त्र केवल बकवास है और इससे कोई लाभ नहीं होता । http://kahaniyakeshavki.blogspot.in/2016/10/blog-post_13.html?m=1 -संजय(केशव)

जो देश काल परिस्थिति अनुसार अपने धर्म, परम्पराओं में परिवर्तन संशोधन करना न चाहें वही कट्टरता है

जो देश काल परिस्थिति अनुसार परिवर्तन संशोधन न चाहें वही कट्टरता है

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

Sudhir Kumar Jatav _ साभार : Manoj Abhigyan एक हिन्दू धर्मगुरू शिवानन्द ने अपनी एक पुस्तक मे गायत्री मंत्र के बारे मे लिखा कि इसका जाप करने से आदमी सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्त हो जाता है. ये बात एक जर्मन जर्नलिस्ट ने पढ़ी और उछल पड़ा. उसने सोचा... ये आदमी जीनियस है, जिसने इतनी बड़ी ईजाद कर दी. दुनिया भी पागल है... पता नही किस किस को नोबल पुरस्कार दे देती है... यह पुरस्कार तो इस डॉ शिवानंद को देना चाहिए. सारी बीमारियाँ एक झटके मे ख़तम!! उसे शक की कोई गुंजाइश भी नही लगी क्योंकि शिवानंद एक क्वालिफाइड डॉक्टर था... सो ऐसा आदमी जब आध्यात्म मे उतरेगा तो तथ्य के साथ ही बोलेगा.. पूरा निरीक्षण करके ही बोलेगा. अब उस बेचारे को क्या पता कि भारत मे ऐसे बोलने वाले गली- गली मे मिल जाएगें. क्या डॉक्टर और क्या इंजिनियर... यहाँ सारे पढ़े लिखे पागल बसते हैं... विज्ञान पढ़ लिया है पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण किसी का नही है. अंततः वो जर्नलिस्ट भारत आया और ढूँढता-ढूँढता डॉ शिवानंद के आश्रम पहुँच गया. उसे वहाँ शिवानंद का चेला मिला. उसने चेले से कहा कि मुझे डॉ. शिवानंद से मिलना है. चेला बोला कि आप अभी गुरुजी से नही मिल सकते. कारण पूछने पर चेले ने बताया कि गुरुजी बीमार हैं सो अभी नही मिल सकते, दो चार दिन बाद आना. वो जर्मन जर्नलिस्ट हैरान रह गया. उसने कहा कि खुद शिवानंद ने लिखा है कि इस मंत्र से समस्त बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं तो वो इसका जाप करके ठीक क्यों नही हो जाते ? अब चेला बेचारा क्या बोलता, असलियत तो सभी को पता है. असल धंधा कुछ और होता है, ये तो दिखावे के बोल बचन है. खैर, चेले ने उसे सारी असली बात बता दी कि ऐसा कहते तो हैं पर होता कुछ नही. वो बेचारा जर्नलिस्ट अवाक् रह गया... इतना बड़ा फ्रॉड !!! वो वापस जर्मनी चला गया.

गरबा नृत्य

गरबा नृत्य
https://youtu.be/ftW6vc4esZ4

शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

शिल्पा शर्मा _ युवाओं की सोच समंदर सी गहरी होनी चाहिए

वंदे मातरम् कविता_ दिनेश देवांगन " दिव्य"

सचिन देव टंडन कविता- पढ़ाई और मोहब्बत में उलझी मेरी जिंदगी मुझे वो भी प्...

दिनेश देवांगन "दिव्य" कविता - वतन की लाज रखने को

भावेश्वर राणा की कविता नटवर नंद किशोर

रेणु मिश्रा_ खुश रहना

September 30, 2016

September 30, 2016

गुरुवार, 21 जुलाई 2016

कविता कैसे जीवन गीत सुनाएं

कविता.. देश गया भाड़ में

कविता.. देश गया भाड़ में

कविता.. देश गया भाड़ में

कविता पाठ .. सूना सूना

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

जाट उपद्रव हरियाणा में

रिकारंडिग डांस ता fधन ता.. मेरे ढोलना..

Recording dance

ओड़िया डांस,

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

JNU 2

JNU

iscon temples

शंबुक

शंबुक

February 23, 2016

February 23, 2016

February 23, 2016

February 23, 2016

सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

kranti ki geet Punjabi

chhattisgarhi awaj,,ab nai peena hai

chhattisgarhi awaj,,ab nai peena hai

chhattisgarhi awaj,,ab nai peena hai

muslim ho ya hindu

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

Poet shri sahu ji Bilaspur

recording dance chhattisgarhi Cycle se aya re

Mix hindi odiya recording dance

beleriya folk dance

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

chhattisgarhi folk dance suana

beleriya Chhattisgarhi folk dance Mandar baje

batmool Tere bina kya jina

batmool Tere bina kya jina

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

batmool collage, dance mast magan

batmool ,,,song gaddi le k aaya,,

loing ishk hai sar jamin se

loing odiya

loing odiya

सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

beleriya folk hamar para tumhar para 2

beleriya 5

beleriya 5

beleriya 5

beleriya 5

beleriya 5

beleriya 5

रविवार, 31 जनवरी 2016

ktr folk dance suana 2

ktr folk dance suana 2

ktr folk dance suana 2

ktr folk dance suana 2

ktr 2 folk suana