सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
सोमवार, 17 अक्टूबर 2016
रविवार, 16 अक्टूबर 2016
शनिवार, 15 अक्टूबर 2016
शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016
संजय कुमार _ जानिए क्या है मनोचकित्सा- मेरे एक रिस्तेदार हैं( किसी कारण से उनका नाम नहीं ले सकता) . कल उनके घर जाना हुआ तो पता चला की उनकी पत्नी कई दिनों से बीमार हैं , कई डॉक्टर्स से उन्हें दिखाया किन्तु कोई लाभ न हुआ ।उनका दावा है की डॉक्टर्स तो उनकी पत्नी के रोग के बारे में पता भी न कर पाएं । इसलिए थक हार के वे निराश हो चुके थे तब एक दिन किसी पडोसी ने उन्हें गाजियाबाद के एक बाबा का नाम बताया ।यह बाबा मंत्रो के जरिये लोगो को ठीक करता है , मन्त्र मार जल पीने को देता है मरीजो को । उस तांत्रिक के अभिमंत्रित जल से रिस्तेदार की पत्नी ठीक होने लगी हैं और पहले से आराम है ऐसा वह कह रहे हैं । पर ,जंहा तक मुझे समझ आया है की यह सब ढोंग है ,वह बाबा लोगो को मुर्ख बना रहा है । तन्त्र मन्त्र से ठीक होने का दावा करने वाला व्यक्ति 99.9% कंही न कंही मनोरोगी होता है जिसके बारे में उसे भी नहीं पता होता है । मनोचकित्सको के अनुसार मनोरोग सैकड़ो प्रकार के होते है जिसे फोबिया भी कहते हैं ,अमूमन भारत में मनोरोग के बारे में बहुत कम जागरूकता है ।गाँव -देहात में ही नहीं शहरों में भी लोग या तो मनोरोग के बारे में जानते ही नहीं या मानते ही नहीं की उन्हें मनोरोग हुआ है ।जबकि अधिकतर व्यक्ति मनोरोग के शिकार होते हैं जिसमे सनक से लेके पागलपन तक शामिल है । मेरा एक मित्र है जो मंगलवार को शराब नहीं पीता जबकि अन्य दिन खूब पी सकता है । मंगलवार को शराब या मांस से परहेज करने वाले आप के आस पास भी बहुत होंगे ।इसका कारण बेशक वे 'श्रद्धा 'अथवा 'आस्था ' कहें किन्तु मनोचकित्सको के अनुसार यह 'मनोरोग ' है । यदि भूल से वह व्यक्ति मंगलवार को मांस या शारब पी ले तो उसे यह भयंकर अपराध बोध लगेगा जो और यह अपराधबोध सामान्य से पागलपन की हद तक जा सकता है ।जिसमे यदि व्यक्ति का कभी कोई अनिष्ट हो जाता है तो उसका कारण वह उसी अपराधबोध को मानेगा , अतः वह टोने टोटके करेगा या पागलपन वाली हरकत करेगा। यही मनोरोग है ,यह कम या ज्यादा इस पर निर्भर करेगा की वह आपनी आस्था के प्रति कितना अंधभक्त है । आपने अभी हाल की घटना सुनी या पढ़ी होगी की एक जैन परिवार ने आस्था के चलते अपनी 13 वर्षीय पुत्री को 64 दिनों से उपवास पर रखा जिसके चलते उस लड़की की मृत्यु हो गई ।यह मनोरोग का चरम था जिसके चलते परिवार ने लड़की को भूँखा मार दिया । प्रसिद्ध वैज्ञानिक फ्रायड ने सिद्ध किया था की मानव मन के तीन धरातल होते है जो इस प्रकार है - 1-चेतन 2-अचेतन 3-अवचेतन मन तीन प्रकार के कार्य करता है -इच्छाओ का निर्माण, इच्छाओं पर नियंत्रण और उनकी संतुष्टि । पहला काम भोगा पर आश्रित मन का है ,दूसरा नैतिक मन का और तीसरा अहंकार का ।इच्छाओं का निर्माण अचेतन मन में होता है , उसका नियंत्रण अवचेतन मन में और उसकी संतुष्टि चेतन मन में । जब भोग की इच्छित मन और नैतिक मन का संघर्ष अवचेतन मन में चला जाता है और इच्छाओं को संघर्षपूर्वक कठोरता से नैतिक मन द्वारा दबा दिया जाता है तब यह संघर्स अचेतन मन में चलने लगता है तब यही संघर्ष ही ' रोग' बन जाता है ।यह इच्छाये अनगिनत प्रकार की हो सकती है अतः मनोरोग भी अनगिनत प्रकार के होते हैं । फ्रायड ने इस संघर्ष से व्यक्ति के मन को मुक्त करने की प्रक्रिया को ही ' मनोचकित्सा 'कहा है ।अचेतन मन में चल रहे नैतिक और इच्छित मन के संघर्ष के रेचन और चेतन मन को संतुष्टि ही मनोचकित्सा है । बहुत बार ऐसा होता है की लंबे समय तक डॉक्टर्स की दवाइयाँ खाने के बाद व्यक्ति जब ठीक होने की अवस्था में पहुंचता है तब वह बाबा या तांत्रिक की शरण में पहुँच जाता है ।चुकी उस उसे लगता है की दवाइयाँ खाने से कुछ नहीं हो रहा है इसलिए वह बाबा पर आस्था रख के आता है , और यही आस्था उसे यह विश्वास दिलाती है की बाबा उसे ठीक कर देंगे ।बाबा उन्हें अहसास दिला देता है की उसका मन्त्र तंत्र उसे ठीक कर देगा , तब यब आस्था काम आती है और दवाईयो का श्रेय बाबा ले जाता है ।चेतन मन संतुष्ट हो जाता है और मरीज को लगता है की वह ठीक हो गया है। यही सब मेरे उस रिस्तेदार की पत्नी के साथ भी हुआ , बाबा के प्रति आस्था और उसका विश्वाश दिलाने से उनके चेतन मन को संतुष्टि हुई और उन्हें लगा की वह ठीक हो रही हैं ।जबकि तंत्र मन्त्र केवल बकवास है और इससे कोई लाभ नहीं होता । http://kahaniyakeshavki.blogspot.in/2016/10/blog-post_13.html?m=1 -संजय(केशव)
गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016
Sudhir Kumar Jatav _ साभार : Manoj Abhigyan एक हिन्दू धर्मगुरू शिवानन्द ने अपनी एक पुस्तक मे गायत्री मंत्र के बारे मे लिखा कि इसका जाप करने से आदमी सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्त हो जाता है. ये बात एक जर्मन जर्नलिस्ट ने पढ़ी और उछल पड़ा. उसने सोचा... ये आदमी जीनियस है, जिसने इतनी बड़ी ईजाद कर दी. दुनिया भी पागल है... पता नही किस किस को नोबल पुरस्कार दे देती है... यह पुरस्कार तो इस डॉ शिवानंद को देना चाहिए. सारी बीमारियाँ एक झटके मे ख़तम!! उसे शक की कोई गुंजाइश भी नही लगी क्योंकि शिवानंद एक क्वालिफाइड डॉक्टर था... सो ऐसा आदमी जब आध्यात्म मे उतरेगा तो तथ्य के साथ ही बोलेगा.. पूरा निरीक्षण करके ही बोलेगा. अब उस बेचारे को क्या पता कि भारत मे ऐसे बोलने वाले गली- गली मे मिल जाएगें. क्या डॉक्टर और क्या इंजिनियर... यहाँ सारे पढ़े लिखे पागल बसते हैं... विज्ञान पढ़ लिया है पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण किसी का नही है. अंततः वो जर्नलिस्ट भारत आया और ढूँढता-ढूँढता डॉ शिवानंद के आश्रम पहुँच गया. उसे वहाँ शिवानंद का चेला मिला. उसने चेले से कहा कि मुझे डॉ. शिवानंद से मिलना है. चेला बोला कि आप अभी गुरुजी से नही मिल सकते. कारण पूछने पर चेले ने बताया कि गुरुजी बीमार हैं सो अभी नही मिल सकते, दो चार दिन बाद आना. वो जर्मन जर्नलिस्ट हैरान रह गया. उसने कहा कि खुद शिवानंद ने लिखा है कि इस मंत्र से समस्त बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं तो वो इसका जाप करके ठीक क्यों नही हो जाते ? अब चेला बेचारा क्या बोलता, असलियत तो सभी को पता है. असल धंधा कुछ और होता है, ये तो दिखावे के बोल बचन है. खैर, चेले ने उसे सारी असली बात बता दी कि ऐसा कहते तो हैं पर होता कुछ नही. वो बेचारा जर्नलिस्ट अवाक् रह गया... इतना बड़ा फ्रॉड !!! वो वापस जर्मनी चला गया.
शुक्रवार, 30 सितंबर 2016
गुरुवार, 29 सितंबर 2016
शनिवार, 17 सितंबर 2016
शनिवार, 20 अगस्त 2016
शनिवार, 6 अगस्त 2016
बुधवार, 27 जुलाई 2016
शनिवार, 23 जुलाई 2016
गुरुवार, 21 जुलाई 2016
सोमवार, 13 जून 2016
बुधवार, 4 मई 2016
शनिवार, 2 अप्रैल 2016
मंगलवार, 22 मार्च 2016
शुक्रवार, 18 मार्च 2016
रविवार, 6 मार्च 2016
शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016
गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016
मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016
सोमवार, 22 फ़रवरी 2016
शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016
बुधवार, 10 फ़रवरी 2016
मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016
सोमवार, 8 फ़रवरी 2016
रविवार, 31 जनवरी 2016
शनिवार, 30 जनवरी 2016
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